राजस्थान का प्रसिद्ध विभीषण मंदिर: जानिए इतिहास, मान्यताएं और धुलेंडी की अनोखी परंपरा

By Tami

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Vibhishan Temple, Kaithoon

धर्म संवाद / डेस्क : राजस्थान के कोटा जिले के कैथून में स्थित विभीषण मंदिर धार्मिक आस्था, पौराणिक मान्यताओं और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। रामायण के प्रमुख पात्र विभीषण को समर्पित यह मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां हर वर्ष लगने वाला विभीषण मेला, धुलेंडी पर हिरण्यकश्यप दहन की अनूठी परंपरा और भगवान शिव-हनुमान से जुड़ी मान्यताएं इस मंदिर को विशेष पहचान दिलाती हैं।

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रामायण में विभीषण का महत्व

रामायण में विभीषण को धर्म, सत्य और न्याय का पक्षधर बताया गया है। लंका के राजपरिवार से होने के बावजूद उन्होंने अधर्म का साथ छोड़कर भगवान श्रीराम का साथ दिया। इसी कारण उन्हें धर्म और नीति का प्रतीक माना जाता है। कैथून में श्रद्धालु विभीषण को सम्मानपूर्वक पूजते हैं और उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा लेते हैं।

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होली पर लगता है पांच दिवसीय विभीषण मेला

कैथून की सबसे बड़ी धार्मिक पहचान यहां आयोजित होने वाला पांच दिवसीय विभीषण मेला है। यह मेला हर वर्ष होली के अवसर पर आयोजित किया जाता है, जिसमें राजस्थान सहित कई राज्यों से श्रद्धालु शामिल होते हैं।

मेले की सबसे अनोखी परंपरा धुलेंडी के दिन हिरण्यकश्यप के पुतले का दहन है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह परंपरा भक्त प्रह्लाद और भगवान नृसिंह की कथा से जुड़ी है। माना जाता है कि होलिका दहन के बाद हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद की हत्या का प्रयास किया था, जिसके बाद भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर उसका वध किया। इसी घटना की स्मृति में कैथून में यह परंपरा निभाई जाती है।

45 वर्षों से निभाई जा रही है परंपरा

करीब 45 वर्षों से यह धार्मिक परंपरा लगातार जारी है। मेले के दौरान आसपास के मंदिरों से देव विमानों की भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है, जो विभीषण मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना के बाद मेला स्थल तक जाती है। धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और आकर्षक आतिशबाजी के कारण यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है।

जमीन में धंसती प्रतिमा से जुड़ी है मान्यता

मंदिर परिसर में स्थापित विभीषण की प्रतिमा को लेकर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था है। मान्यता है कि प्रतिमा का केवल ऊपरी भाग ही दिखाई देता है, जबकि शेष हिस्सा जमीन के भीतर है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह प्रतिमा हर वर्ष धीरे-धीरे और अधिक जमीन में समाती जा रही है।

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मंदिर के निकट स्थित प्राचीन कुंड और वहां मौजूद विक्रम संवत 1815 का शिलालेख इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व को और भी मजबूत बनाते हैं।

भगवान शिव और हनुमान से जुड़ी पौराणिक कथा

लोक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के बाद विभीषण ने भगवान शिव और हनुमानजी को कांवड़ में बैठाकर पृथ्वीलोक भ्रमण कराने का संकल्प लिया।

कथा के अनुसार, भगवान शिव ने शर्त रखी कि जहां कांवड़ धरती को स्पर्श करेगी, वहीं यात्रा समाप्त मानी जाएगी। कहा जाता है कि कैथून पहुंचने पर कांवड़ का एक भाग जमीन से स्पर्श कर गया।

मान्यता है कि कांवड़ का एक सिरा वर्तमान चारचौमा क्षेत्र में पहुंचा, जहां आज चोमेश्वर महादेव मंदिर स्थित है, जबकि दूसरा सिरा कोटा के रंगबाड़ी क्षेत्र तक पहुंचा, जहां प्रसिद्ध हनुमान मंदिर स्थापित है। जिस स्थान पर विभीषण रुके थे, वहीं आज विभीषण मंदिर स्थित माना जाता है।

महाराव उम्मेद सिंह प्रथम के शासनकाल में हुआ वर्तमान निर्माण

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना माना जाता है। हालांकि वर्तमान मंदिर संरचना का निर्माण महाराव उम्मेद सिंह प्रथम के शासनकाल में कराया गया था। समय-समय पर मंदिर का जीर्णोद्धार और विकास कार्य भी होते रहे हैं, जिससे इसकी धार्मिक और ऐतिहासिक विरासत सुरक्षित बनी हुई है।

वक्फ विवाद के बाद भी चर्चा में रहा मंदिर

बीते कुछ वर्षों में मंदिर की भूमि को लेकर विवाद भी सामने आया था। मंदिर की जमीन पर वक्फ संपत्ति होने का दावा किए जाने के बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अदालत के फैसले के पश्चात यह मंदिर एक बार फिर चर्चा में आया।

क्यों खास है कैथून का विभीषण मंदिर?

  • रामायण के प्रमुख पात्र विभीषण को समर्पित प्रसिद्ध मंदिर।
  • होली पर लगने वाला पांच दिवसीय विभीषण मेला।
  • धुलेंडी पर हिरण्यकश्यप दहन की अनूठी परंपरा।
  • भगवान शिव और हनुमान से जुड़ी पौराणिक मान्यता।
  • जमीन में धंसती प्रतिमा को लेकर प्रचलित लोकविश्वास।
  • ऐतिहासिक कुंड और विक्रम संवत 1815 का शिलालेख।

आस्था, इतिहास, लोकमान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम कैथून के विभीषण मंदिर को राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में विशेष स्थान दिलाता है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर विभीषण के दर्शन करते हैं, धार्मिक आयोजनों में शामिल होते हैं और इस अनूठी परंपरा का हिस्सा बनते हैं।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .