Harsiddhi Mata Mandir Ujjain: जहां गिरी थी माता सती की कोहनी

By Tami

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Harsiddhi Mata Mandir Ujjain

धर्म संवाद / डेस्क : पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब राजा दक्ष के यज्ञ में अपमानित होकर माता सती ने योगाग्नि में अपने प्राण त्याग दिए, तब भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने लगे। सृष्टि के संतुलन को बनाए रखने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के अंगों को पृथ्वी के विभिन्न स्थानों पर गिराया। उज्जैन में माता सती की कोहनी गिरी थी, इसलिए यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में पूजनीय माना जाता है।

लगभग 2000 वर्ष पुराना है हरसिद्धि मंदिर

हरसिद्धि माता मंदिर का इतिहास लगभग 2000 वर्ष पुराना बताया जाता है। यह मंदिर उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माता हरसिद्धि अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और उन्हें जीवन के संकटों से मुक्ति दिलाती हैं।

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सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ी है विशेष मान्यता

हरसिद्धि मंदिर को सम्राट विक्रमादित्य की तपोभूमि भी माना जाता है। लोककथाओं के अनुसार, राजा विक्रमादित्य माता की आराधना में इतने समर्पित थे कि प्रत्येक 12वें वर्ष अपने मस्तक की बलि अर्पित करते थे। कहा जाता है कि देवी की कृपा से उनका सिर पुनः जुड़ जाता था। मंदिर परिसर में आज भी कुछ सिन्दूर चढ़े हुए प्रतीकात्मक ‘सिर’ दिखाए जाते हैं, जिन्हें विक्रमादित्य से जोड़ा जाता है।

मंदिर की वास्तुकला और विशेषताएं

हरसिद्धि मंदिर चारों ओर मजबूत परकोटे से घिरा हुआ है और इसमें चार प्रवेश द्वार हैं। मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर स्थित है। मंदिर परिसर में एक प्राचीन बावड़ी, श्रीयंत्र स्थल तथा माता अन्नपूर्णा की सुंदर प्रतिमा भी स्थापित है।

मंदिर के सामने स्थित दो विशाल दीप स्तंभ (दीपमालाएं) इसकी सबसे बड़ी विशेषता हैं। नवरात्रि के दौरान इन दीप स्तंभों पर हजारों दीपक प्रज्ज्वलित किए जाते हैं, जिसका अद्भुत दृश्य श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देता है।

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रुद्रसागर तालाब के किनारे स्थित है मंदिर

हरसिद्धि माता मंदिर रुद्रसागर (सप्तसागर) तालाब के सुरम्य तट पर स्थित है। मंदिर के आसपास का शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है। मंदिर के पीछे अगस्तेश्वर महादेव का प्राचीन सिद्ध स्थल भी मौजूद है, जो इस क्षेत्र की धार्मिक महत्ता को और बढ़ाता है।

तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र

हरसिद्धि माता मंदिर को शाक्त, तांत्रिक, अघोरी और नवदुर्गा साधकों का प्रमुख साधना स्थल माना जाता है। आज भी देशभर से साधक यहां विशेष अनुष्ठान और साधना के लिए पहुंचते हैं। माता हरसिद्धि को ‘मांगल-चण्डिका’ के नाम से भी जाना जाता है, जिनकी आराधना से दिव्य सिद्धियों की प्राप्ति होने की मान्यता है।

भगवान कृष्ण की कुलदेवी मानी जाती हैं हरसिद्धि माता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता हरसिद्धि भगवान श्रीकृष्ण की कुलदेवी भी हैं। गुजरात के द्वारका में भी माता हरसिद्धि का एक प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जहां भक्त श्रद्धापूर्वक उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।

नवरात्रि में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

नवरात्रि, मंगलवार और शनिवार के दिन हरसिद्धि माता मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस दौरान हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भक्तों का विश्वास है कि माता हरसिद्धि शक्ति, साहस, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .