धर्म संवाद / डेस्क : सनातन धर्म के प्रमुख धार्मिक ग्रंथों को घर-घर तक पहुंचाने वाली गीता प्रेस, गोरखपुर ने एक ऐतिहासिक प्रकाशन पहल की घोषणा की है। संस्थान अब पहली बार श्रीमद्भगवद्गीता का त्रिभाषी (संस्कृत, हिंदी और अंग्रेजी) संस्करण प्रकाशित करने जा रहा है। इस विशेष संस्करण का उद्देश्य भगवद्गीता को युवा पीढ़ी, भारतीय प्रवासी समुदाय और अंतरराष्ट्रीय पाठकों के लिए अधिक सरल, सुलभ और उपयोगी बनाना है।
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एक ही पुस्तक में मिलेंगी तीन भाषाएं
नए त्रिभाषी संस्करण में मूल संस्कृत श्लोक, हिंदी अनुवाद और अंग्रेजी अनुवाद को एक ही खंड में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ रोमन लिप्यंतरण (Roman Transliteration) भी शामिल किया जाएगा, जिससे देवनागरी लिपि न जानने वाले पाठक भी श्लोकों का सही उच्चारण कर सकेंगे और उनके अर्थ को आसानी से समझ पाएंगे।
गीता प्रेस का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य पवित्र ग्रंथ की प्रामाणिकता बनाए रखते हुए भाषा संबंधी बाधाओं को दूर करना है, ताकि अधिक से अधिक लोग भगवद्गीता की शिक्षाओं से जुड़ सकें।
युवा और विदेशी पाठकों को मिलेगा लाभ
यह नया संस्करण विशेष रूप से उन छात्रों, युवाओं, भारतीय मूल के विदेशों में रहने वाले लोगों और विदेशी पाठकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो भगवद्गीता का प्रामाणिक और सरल संस्करण पढ़ना चाहते हैं। तीनों भाषाओं को एक साथ प्रस्तुत करने से पाठकों को श्लोकों का उच्चारण, अर्थ और संदर्भ एक ही स्थान पर उपलब्ध होगा, जिससे अध्ययन और पाठ दोनों अधिक सहज हो जाएंगे।
100 वर्षों से धर्मग्रंथों के प्रकाशन में अग्रणी है गीता प्रेस
1923 में गोरखपुर में स्थापित गीता प्रेस पिछले एक शताब्दी से सनातन धर्म के धार्मिक साहित्य के प्रकाशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्था ने अब तक श्रीमद्भगवद्गीता, रामचरितमानस, पुराण, हनुमान चालीसा सहित अनेक धार्मिक ग्रंथों की करोड़ों प्रतियां प्रकाशित की हैं। किफायती मूल्य और प्रामाणिक सामग्री के कारण गीता प्रेस विश्व के सबसे बड़े धार्मिक प्रकाशकों में गिना जाता है।
आधुनिक पाठकों की जरूरतों के अनुरूप नई पहल
डिजिटल युग में बदलती पठन आदतों और भारतीय आध्यात्मिक साहित्य में बढ़ती वैश्विक रुचि को देखते हुए गीता प्रेस का यह कदम बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रोमन लिप्यंतरण के साथ प्रकाशित यह संस्करण उन पाठकों के लिए भी उपयोगी होगा, जो संस्कृत या देवनागरी लिपि से परिचित नहीं हैं, लेकिन भगवद्गीता के श्लोकों का सही उच्चारण और उनका भावार्थ समझना चाहते हैं।
यह पहल गीता प्रेस के उस मिशन को आगे बढ़ाती है, जिसके तहत संस्था सनातन धर्म के प्रामाणिक साहित्य को नई पीढ़ी और वैश्विक पाठकों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है।






