धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में सालभर आने वाली चार नवरात्रियों में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। यह नवरात्रि विशेष रूप से मां दुर्गा की उपासना, साधना और तांत्रिक परंपराओं से जुड़ी होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान सच्चे मन से मां भगवती की आराधना करने पर भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
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गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा के साथ-साथ दस महाविद्याओं की साधना भी की जाती है। इनमें मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला की विशेष आराधना का विधान है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी?
वर्ष 2026 में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई (बुधवार) से शुरू होकर 22 जुलाई (बुधवार) तक चलेगी। इसके बाद 23 जुलाई 2026 (गुरुवार) को नवरात्रि व्रत का पारण किया जाएगा। इस वर्ष पंचांग के अनुसार तीसरी और चौथी नवरात्रि एक ही दिन, 17 जुलाई को पड़ रही है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 घटस्थापना मुहूर्त
गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ कलश स्थापना (घटस्थापना) से किया जाता है।
- घटस्थापना मुहूर्त: 15 जुलाई 2026, सुबह 05:33 बजे से 10:09 बजे तक
- प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 14 जुलाई 2026, दोपहर 03:12 बजे
- प्रतिपदा तिथि समाप्त: 15 जुलाई 2026, सुबह 11:50 बजे
इस शुभ मुहूर्त में विधि-विधान से कलश स्थापना करना अत्यंत शुभ माना गया है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 का पूरा कैलेंडर
- 15 जुलाई 2026 (बुधवार): पहला नवरात्र – घटस्थापना एवं मां शैलपुत्री की पूजा
- 16 जुलाई 2026 (गुरुवार): दूसरा नवरात्र – मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
- 17 जुलाई 2026 (शुक्रवार): तीसरा और चौथा नवरात्र – मां चंद्रघंटा एवं मां कूष्माण्डा की पूजा
- 18 जुलाई 2026 (शनिवार): पांचवां नवरात्र – मां स्कंदमाता की पूजा
- 19 जुलाई 2026 (रविवार): छठा नवरात्र – मां कात्यायनी की पूजा
- 20 जुलाई 2026 (सोमवार): सातवां नवरात्र – मां कालरात्रि की पूजा
- 21 जुलाई 2026 (मंगलवार): आठवां नवरात्र – दुर्गा अष्टमी एवं मां महागौरी की पूजा
- 22 जुलाई 2026 (बुधवार): नौवां नवरात्र – मां सिद्धिदात्री की पूजा एवं महा नवमी
- 23 जुलाई 2026 (गुरुवार): नवरात्रि व्रत का पारण
गुप्त नवरात्रि का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि साधना, तप और शक्ति उपासना का विशेष पर्व है। माना जाता है कि इस दौरान किए गए जप, तप, हवन और देवी आराधना का कई गुना फल प्राप्त होता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार वैदिक काल में गुप्त नवरात्रि की जानकारी मुख्य रूप से ऋषि-मुनियों और सिद्ध साधकों तक ही सीमित थी। वे इस अवधि में दस महाविद्याओं की साधना कर आध्यात्मिक सिद्धियां प्राप्त करने का प्रयास करते थे। आज भी कई साधक इस नवरात्रि को विशेष साधना काल के रूप में मानते हैं।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में किन देवियों की होती है पूजा?
गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ-साथ दस महाविद्याओं की भी पूजा की जाती है—
- मां काली
- मां तारा
- मां त्रिपुर सुंदरी
- मां भुवनेश्वरी
- मां छिन्नमस्ता
- मां त्रिपुर भैरवी
- मां धूमावती
- मां बगलामुखी
- मां मातंगी
- मां कमला
मान्यता है कि इन देवियों की उपासना से भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति, शत्रु बाधा से मुक्ति, धन-समृद्धि और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग पर आधारित जानकारी के अनुसार तैयार किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों और पंचांगों के अनुसार तिथि एवं मुहूर्त में आंशिक अंतर संभव है।






