सावन में विवाहित बेटियों को मायके क्यों बुलाया जाता है? जानें धार्मिक महत्व और परंपरा

By Tami

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Sawan Beti Mayka Tradition

धर्म संवाद / डेस्क : सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के साथ-साथ परिवार और रिश्तों को मजबूत करने वाली परंपराओं के लिए भी विशेष माना जाता है। इन्हीं परंपराओं में एक है सावन के दौरान विवाहित बेटियों को मायके बुलाना। आज भी भारत के कई हिंदू परिवार इस परंपरा को श्रद्धा और प्रेम के साथ निभाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में बेटी का मायके आना परिवार में सुख-समृद्धि, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। आइए जानते हैं इस परंपरा का धार्मिक और सामाजिक महत्व।

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सावन में बेटियों को मायके बुलाने की परंपरा क्यों है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन, प्रेम और पारिवारिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण इस महीने विवाहित बेटियों को मायके बुलाने की परंपरा प्रचलित है। मान्यता है कि इस दौरान बेटी का मायके आना परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, अपनापन और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करता है। साथ ही, यह परंपरा बेटी को अपने माता-पिता और भाई-बहनों के साथ समय बिताने का अवसर भी देती है।

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रिश्तों में बढ़ता है अपनापन

शादी के बाद बेटियां अपनी नई जिम्मेदारियों में व्यस्त हो जाती हैं, जिससे मायके आने के अवसर कम हो जाते हैं। ऐसे में सावन का महीना उन्हें अपने परिवार के साथ समय बिताने और रिश्तों में नई मिठास घोलने का अवसर प्रदान करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस परंपरा से परिवार में प्रेम, सम्मान और आपसी विश्वास मजबूत होता है।

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क्या बेटी का मायके आना शुभ माना जाता है?

लोक मान्यताओं के अनुसार, बेटी को घर की लक्ष्मी माना जाता है। माना जाता है कि सावन में बेटी के आगमन से घर में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसी कारण कई परिवार सावन के दौरान बेटियों को विशेष रूप से निमंत्रण देकर मायके बुलाते हैं।

क्या यह परंपरा केवल नवविवाहित बेटियों के लिए है?

नहीं। हालांकि नई शादी के बाद पहली या शुरुआती सावन का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन यह परंपरा केवल नवविवाहित महिलाओं तक सीमित नहीं है। कई परिवारों में वर्षों से विवाहित बेटियों को भी सावन में स्नेहपूर्वक मायके बुलाया जाता है। यह परंपरा रिश्तों को जीवंत बनाए रखने का प्रतीक मानी जाती है।

सावन में बेटी का स्वागत कैसे करें?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, यदि बेटी सावन में मायके आए तो उसका सम्मानपूर्वक स्वागत करना शुभ माना जाता है।

  • घर की दहलीज पर आरती उतारें।
  • रोली, अक्षत और चंदन का तिलक लगाएं।
  • श्रद्धा के साथ घर में प्रवेश कराएं।
  • घेवर, खीर, मालपुआ या अन्य मिठाइयों से मुंह मीठा कराएं।
  • बेटी के हाथों तुलसी का पौधा लगवाना शुभ माना जाता है।
  • सोलह श्रृंगार की सामग्री, वस्त्र या उपहार भेंट करने की भी परंपरा है।

धार्मिक और सामाजिक महत्व

सावन में बेटियों को मायके बुलाने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय पारिवारिक संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह परंपरा परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम, सम्मान और अपनापन बनाए रखने का संदेश देती है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .