धर्म संवाद / डेस्क : सनातन धर्म में ऋषि पंचमी का पर्व सप्त ऋषियों के सम्मान और उनके प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। यह पर्व हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ता है। इस बार ऋषि पंचमी 15 सितंबर 2026, यानी आज मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शुद्धि और पुण्य की प्राप्ति होती है।
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ऋषि पंचमी का व्रत खास तौर पर महिलाओं के बीच प्रचलित है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से इस व्रत को करने से रजस्वला दोष से मुक्ति की कामना की जाती है। इस दिन सप्त ऋषियों के साथ देवी अरुंधती की भी पूजा की जाती है।
ऋषि पंचमी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पंचमी तिथि की शुरुआत 15 सितंबर 2026 को सुबह 7:44 बजे हो रही है। वहीं, पंचमी तिथि का समापन 16 सितंबर को सुबह 8:59 बजे होगा। उदया तिथि के आधार पर ऋषि पंचमी का व्रत और पूजन 15 सितंबर को किया जा रहा है।
ऋषि पंचमी पूजा मुहूर्त: सुबह 11:12 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक
इसके अलावा दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:44 बजे से 5:41 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 बजे से 12:51 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:29 बजे से 3:18 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:35 बजे से 6:59 बजे तक
- रवि योग: सुबह 6:17 बजे से दोपहर 3:21 बजे तक
ऋषि पंचमी की पूजा विधि
ऋषि पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्य देव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें। पूजा के लिए एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और उस पर सप्त ऋषियों की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद ऋषियों को जल और पंचामृत से स्नान कराएं।
पूजा के दौरान सप्त ऋषियों को चंदन, हल्दी, कुमकुम, अक्षत, पीले फूल और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और ऋषि पंचमी की व्रत कथा का पाठ करें।
पूजा पूरी होने के बाद भगवान और सप्त ऋषियों को फल, मिठाई सहित अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग लगाएं। अंत में जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को अन्न, वस्त्र और सामर्थ्य के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है।
ऋषि पंचमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऋषि पंचमी का व्रत आत्मशुद्धि और सप्त ऋषियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन व्रत, पूजा और दान के माध्यम से सुख-शांति और परिवार की समृद्धि की कामना करते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग संबंधी जानकारी पर आधारित है। पूजा के शुभ मुहूर्त में स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।






