धर्म संवाद / डेस्क : गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से गणपति की पूजा करने और मंत्रों का जाप करने से जीवन के विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है। भक्त इस दिन भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा, मंत्र जाप और भोग अर्पित करते हैं।
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गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ माना जाता है शुभ
अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की उपासना के लिए गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसके पाठ से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने और धन, वैभव, यश व सफलता की प्राप्ति की कामना की जाती है।
मान्यता है कि भगवान गणेश की आराधना में गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ बेहद प्रभावशाली माना गया है। श्रद्धालु गणेश चतुर्थी के दिन श्रद्धा के साथ इसका पाठ कर सकते हैं।
भगवान गणेश का कौन सा मंत्र करें?
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश का प्रमुख मंत्र ‘ॐ गं गणपतये नमः’ माना जाता है। भक्त इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप कर सकते हैं। मंत्र जाप और हवन में मंत्र के उच्चारण को लेकर भी विशेष सावधानी बताई गई है। मंत्र जाप के दौरान ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का जाप किया जाता है, जबकि हवन में आहुति देते समय ‘ॐ गं गणपतये स्वाहा’ का उच्चारण किया जाता है।
गणेश जी को लगाएं मोदक और लड्डू का भोग
गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को उनके प्रिय माने जाने वाले मोदक और लड्डू का भोग लगाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शाम के समय चंद्रमा के उदय के दौरान भगवान गणेश को पीले लड्डू या मोदक अर्पित करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार गणपति को भोग अर्पित कर सकते हैं।
गणेश चतुर्थी पर क्या करें?
गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ या ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके साथ गणपति को मोदक या लड्डू का भोग अर्पित करें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश विघ्नहर्ता हैं और उनकी पूजा से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सफलता के मार्ग प्रशस्त होने की कामना की जाती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय मतों पर आधारित है। इसे आस्था और परंपरा के रूप में लें।






