धर्म संवाद / डेस्क : भारतीय सिनेमा में कई ऐसे भजन हैं, जो दशकों बाद भी लोगों की आस्था और भक्ति का हिस्सा बने हुए हैं। मंदिरों की आरती हो, धार्मिक आयोजन या घरों में पूजा-पाठ—कुछ भजन ऐसे हैं जिन्हें सुनते ही मन श्रद्धा से भर जाता है। इन्हीं कालजयी रचनाओं में एक नाम है “मन तड़पत हरि दर्शन को आज”।
यह भी पढ़े : श्री राम की गली में तुम जाना वहां नाचते मिलेंगे हनुमाना – भजन
सालों बीत जाने के बावजूद यह भजन आज भी उतनी ही श्रद्धा से सुना जाता है। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने वाले तीनों प्रमुख कलाकार मुस्लिम थे। संगीत, गीत और गायकी के अद्भुत संगम ने इस भजन को भारतीय संगीत इतिहास में अमर बना दिया।
फिल्म ‘बैजू बावरा’ का सबसे लोकप्रिय भजन
साल 1952 में रिलीज हुई फिल्म ‘बैजू बावरा’ अपने शानदार संगीत के लिए आज भी याद की जाती है। फिल्म का भजन “मन तड़पत हरि दर्शन को आज” भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय भक्ति गीतों में शामिल है। यह गीत केवल फिल्मी भजन नहीं, बल्कि भक्ति संगीत की ऐसी धरोहर बन गया जिसे आज भी लाखों लोग श्रद्धा के साथ सुनते हैं।
तीन मुस्लिम कलाकारों ने रचा था यह कालजयी भजन
इस अमर भजन के पीछे तीन महान कलाकारों की रचनात्मक प्रतिभा थी—
- संगीतकार नौशाद ने इसकी मधुर और शास्त्रीय धुन तैयार की।
- मोहम्मद रफी ने अपनी भावपूर्ण आवाज से इसे अमर बना दिया।
- शकील बदायूंनी ने ऐसे भावपूर्ण बोल लिखे, जो सीधे भक्त के हृदय से जुड़ जाते हैं।
तीनों कलाकार मुस्लिम थे, लेकिन उन्होंने भगवान श्रीहरि की भक्ति को जिस श्रद्धा और संवेदना से अभिव्यक्त किया, वह भारतीय संस्कृति की समावेशी परंपरा का सुंदर उदाहरण माना जाता है।
मन तड़पत हरि दर्शन को आज’ भजन के प्रसिद्ध बोल
मन तड़पत हरि दर्शन को आज,
मोरे तुम बिन बिगड़े सकल काज।
विनती करत हूँ रखियो लाज…
तुम्हरे द्वार का मैं हूँ जोगी,
हमरी ओर नज़र कब होगी।
सुन मोरे व्याकुल मन की बात…
बिन गुरु ज्ञान कहाँ से पाऊँ,
दान हरी गुण गाऊँ।
सब गुणी जन पे तुम्हारा राज…
मुरली मनोहर आस न तोड़ो,
दुख भंजन मोरा साथ न छोड़ो।
मोहे दर्शन भिक्षा दे दो आज…
