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जगन्नाथ चक्का नैन नीलाचल वारे – भजन

By Tami

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jagannath chakka nain neelachal vare - bhajan

धर्म संवाद / डेस्क : “जगन्नाथ चक्का नैन नीलाचल वारे” भगवान श्रीजगन्नाथ की भक्ति और उनके प्रति अटूट विश्वास को दर्शाने वाला भावपूर्ण भजन है। इसमें भक्त अपने आराध्य भगवान जगन्नाथ को अपना सबसे बड़ा सहारा मानते हुए उनके चरणों में समर्पण की भावना प्रकट करता है। भजन के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि सच्चे मन से भगवान पर भरोसा रखने वाले भक्त को हर परिस्थिति में उनका आशीर्वाद और संबल प्राप्त होता है।

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भजन में भगवान जगन्नाथ के विशाल और गोल नेत्रों का विशेष रूप से वर्णन मिलता है। जगन्नाथ जी का यह अनोखा स्वरूप भक्तों के बीच बेहद लोकप्रिय है। उनके बड़े नेत्रों को प्रभु की सर्वव्यापक दृष्टि का प्रतीक भी माना जाता है, जो अपने भक्तों पर हमेशा कृपा बनाए रखते हैं।

इस भजन में भक्त अपनी परेशानियों और चिंताओं को प्रभु के सामने रखकर उनसे मार्गदर्शन और संरक्षण की प्रार्थना करता है। उसका विश्वास है कि संसार में परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, भगवान जगन्नाथ का हाथ सिर पर हो तो कोई डर नहीं। यही भाव इस भजन को भक्तों के दिल के करीब बनाता है।

जगन्नाथ, जगन्नाथ, चका नैन, चका नैन
नीलाचल वारे, तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले
मेरी ये नैया है अब तो तेरे हवाले,
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले
जगन्नाथ।

तुझे छोड़ जाऊं मैं अब किस किसके द्वारे
तुझे छोड़ जाऊं मैं अब किस किसके द्वारे,
नीलाचल वारे, तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ।

जगन्नाथ स्वामी मेरे नैन के तारे
मेरे सारे काज स्वामी आप ही संवारे,
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले
नीलाचल वारे, तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ।

शरण तेरी पड़ा रहूं दास बनाले
तेरी ही सेवा करूं जो चाहे कराले,
तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले
नीलाचल वारे, तू ना संभाले तो हमें कौन संभाले,
जगन्नाथ।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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