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गणेश चतुर्थी 2026 पर चांद क्यों नहीं देखना चाहिए? जानें मिथ्या दोष की कहानी और उपाय

By Tami

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धर्म संवाद / डेस्क : गणेश चतुर्थी का पावन पर्व नजदीक है और भगवान गणेश के भक्त बप्पा के स्वागत की तैयारियों में जुट गए हैं। हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस दिन घरों और पूजा पंडालों में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाती है और श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं।

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इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। गणेश उत्सव की शुरुआत गणपति स्थापना के साथ होगी और अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश विसर्जन किया जाएगा। महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में यह पर्व पूरे उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा को देखने से बचने की एक प्राचीन धार्मिक मान्यता भी जुड़ी हुई है? इसे मिथ्या दोष या मिथ्या कलंक से जोड़ा जाता है। आइए जानते हैं इस मान्यता के पीछे की पौराणिक कथा और अगर गलती से चांद दिखाई दे जाए तो क्या करना चाहिए।

गणेश चतुर्थी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को पड़ रही है। गणेश उत्सव के दौरान श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर उनकी पूजा करते हैं। इसके बाद श्रद्धा और परंपरा के अनुसार गणपति विसर्जन किया जाता है।

गणेश विसर्जन: 23 सितंबर 2026, बुधवार यानी अनंत चतुर्दशी के दिन।

पूजा और चंद्रदर्शन के सटीक समय के लिए स्थानीय शहर के पंचांग को देखना उचित रहेगा, क्योंकि समय स्थान के अनुसार बदल सकता है।

गणेश चतुर्थी पर चांद देखने से क्यों मना किया जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन करने से मिथ्या दोष लग सकता है। मिथ्या दोष का अर्थ है किसी व्यक्ति पर ऐसा आरोप लगना जो उसने किया ही न हो। इसी वजह से गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन से बचने की परंपरा बताई गई है। इस मान्यता के पीछे भगवान गणेश और चंद्रदेव से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है।

क्या है गणेश जी और चंद्रमा की पौराणिक कथा?

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश अपने वाहन मूषक पर सवार होकर जा रहे थे। भगवान गणेश के भारी शरीर के कारण उनका वाहन लड़खड़ा गया और वे गिर पड़े। कहा जाता है कि यह देखकर चंद्रदेव भगवान गणेश पर हंसने लगे। चंद्रमा के इस व्यवहार से भगवान गणेश क्रोधित हो गए। उन्होंने चंद्रदेव को श्राप दिया कि जो व्यक्ति भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी की रात चंद्रमा के दर्शन करेगा, उसे झूठे आरोप या अपयश का सामना करना पड़ सकता है।

बाद में चंद्रदेव ने भगवान गणेश से क्षमा मांगी। उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर गणेश जी ने श्राप को सीमित कर दिया। इसी कथा के आधार पर गणेश चतुर्थी पर चंद्रदर्शन से बचने की परंपरा मानी जाती है।

भगवान कृष्ण से भी जुड़ी है यह कथा

मिथ्या दोष की मान्यता का संबंध भगवान श्रीकृष्ण और स्यामंतक मणि की कथा से भी जोड़ा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान कृष्ण पर स्यामंतक मणि चोरी करने का आरोप लगा था। मान्यता है कि उन्हें गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा देखने के कारण मिथ्या कलंक का सामना करना पड़ा था। इसके बाद भगवान कृष्ण ने इस दोष से मुक्ति के लिए धार्मिक उपाय किए। इसी वजह से गणेश चतुर्थी पर चंद्रदर्शन से बचने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है।

गलती से गणेश चतुर्थी पर चांद दिख जाए तो क्या करें?

अगर गणेश चतुर्थी के दिन अनजाने में चंद्रमा दिखाई दे जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। धार्मिक मान्यताओं में इसके निवारण के लिए गणेश जी की पूजा और विशेष मंत्र के जाप का उल्लेख मिलता है।

इस दौरान भगवान गणेश का ध्यान करते हुए स्यामंतक मणि से संबंधित मंत्र का जाप करने की परंपरा है:

“सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यामन्तकः॥”

इसके साथ भगवान गणेश की पूजा करें और उनसे क्षमा प्रार्थना करें।

गणेश चतुर्थी पर चांद कब नहीं देखना चाहिए?

चंद्रदर्शन से बचने का समय स्थान और पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए गणेश चतुर्थी के दिन अपने शहर के स्थानीय पंचांग में दिए गए चंद्रदर्शन निषेध काल को देखना सबसे उचित रहेगा। कई पंचांगों में चतुर्थी तिथि के दौरान चंद्रमा देखने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि चतुर्थी तिथि चंद्रास्त से पहले समाप्त हो जाए, तब भी स्थानीय पंचांग में दिए गए निषेध काल का पालन करने की परंपरा है।

गणेश चतुर्थी पर क्या करें?

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जा सकता है:

  • भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें।
  • मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
  • लाल फूल अर्पित करें।
  • “ॐ गं गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें।
  • गणेश जी की आरती करें।
  • परिवार की सुख-समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना करें।

गणेश चतुर्थी 2026: ध्यान रखने वाली जरूरी बातें

गणेश चतुर्थी केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्सव है। इस दिन श्रद्धालु गणपति बप्पा को घर लाकर उनकी पूजा करते हैं और उत्सव के अंत में विधि-विधान से विसर्जन करते हैं। चंद्रदर्शन को लेकर मान्यताएं धार्मिक और पौराणिक परंपराओं पर आधारित हैं। इनका पालन श्रद्धा और स्थानीय पंचांग की जानकारी के अनुसार किया जाता है।

FAQs

Q1. गणेश चतुर्थी 2026 कब मनाई जाएगी?
गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी।

Q2. गणेश चतुर्थी पर चांद क्यों नहीं देखना चाहिए?
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा देखने से मिथ्या दोष या झूठे आरोप का सामना करना पड़ सकता है।

Q3. गणेश चतुर्थी पर गलती से चांद दिख जाए तो क्या करें?
मान्यता के अनुसार भगवान गणेश की पूजा करें, क्षमा प्रार्थना करें और स्यामंतक मणि से संबंधित मंत्र का जाप किया जा सकता है।

Q4. गणेश उत्सव 2026 कब समाप्त होगा?
गणेश उत्सव का समापन 23 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ होगा।

Q5. गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को क्या चढ़ाएं?
दूर्वा, मोदक, लड्डू और लाल फूल भगवान गणेश को अर्पित किए जाते हैं।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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