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Kajari Teej Vrat Katha 2026: कजरी तीज की व्रत कथा पढ़ें, जानें धार्मिक महत्व

By Tami

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Kajari Teej Vrat Katha 2026

धर्म संवाद / डेस्क : आज देशभर में कजरी तीज का पर्व श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को कजरी तीज मनाई जाती है। इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना से व्रत रखती हैं। वहीं, अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं।

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कजरी तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के साथ व्रत कथा का पाठ और श्रवण करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा के साथ कजरी तीज की कथा सुनने या पढ़ने से व्रत का पुण्य फल प्राप्त होता है और माता पार्वती की कृपा से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। आइए जानते हैं कजरी तीज की संपूर्ण पौराणिक व्रत कथा

कजरी तीज व्रत कथा | Kajari Teej Vrat Katha

पौराणिक कथा के अनुसार, एक गांव में एक ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। एक बार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को ब्राह्मणी ने कजरी तीज का व्रत रखा।

व्रत के लिए पूजा की तैयारियां करते हुए ब्राह्मणी ने अपने पति से पूजा में चढ़ाने के लिए चना सत्तू लाने को कहा। लेकिन उस समय ब्राह्मण के पास पैसे नहीं थे। ब्राह्मणी ने अपने पति से कहा कि किसी भी तरह उसके लिए सवा किलो सत्तू लेकर आएं। पत्नी की इच्छा पूरी करने के लिए ब्राह्मण मजबूर होकर रात में घर से निकल पड़ा।

मजबूरी में साहूकार की दुकान पर पहुंचा ब्राह्मण

रात के समय ब्राह्मण एक साहूकार की दुकान पर पहुंचा। उस समय दुकान खाली थी। आर्थिक परेशानी के कारण उसने वहां से चने की दाल, घी और शक्कर लेकर सवा किलो सत्तू तैयार कर लिया। लेकिन तभी दुकान का नौकर वहां पहुंच गया और ब्राह्मण को देखकर शोर मचाते हुए ‘चोर-चोर’ चिल्लाने लगा। आवाज सुनकर साहूकार भी वहां पहुंच गया और उसने ब्राह्मण को पकड़ लिया।

ब्राह्मण ने बताई पूरी सच्चाई

साहूकार ने ब्राह्मण की तलाशी ली। उसके पास चोरी का सामान नहीं, बल्कि केवल तैयार किया हुआ सत्तू मिला। ब्राह्मण ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि उसकी पत्नी ने कजरी तीज का व्रत रखा है और पूजा के लिए सत्तू मांगा है। उसके पास पैसे नहीं थे, इसलिए वह मजबूरी में सत्तू लेने आया था। ब्राह्मण की बात सुनकर साहूकार को उसकी परिस्थिति पर दया आ गई। उसे ब्राह्मण की नीयत और पत्नी के प्रति उसके समर्पण का एहसास हुआ।

साहूकार ने ब्राह्मण को भाई मानकर दिया आशीर्वाद

कथा के अनुसार, ब्राह्मण की स्थिति देखकर साहूकार का हृदय पिघल गया। उसने ब्राह्मण को क्षमा कर दिया और कहा कि आज से उसकी पत्नी को वह अपनी धर्म बहन मानता है। साहूकार ने ब्राह्मण को सत्तू के साथ गहने, मेहंदी, लच्छा और कुछ रुपये भी दिए। इसके बाद उसने ब्राह्मण को सम्मानपूर्वक घर भेज दिया।

चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूरा हुआ व्रत

इधर ब्राह्मणी अपने पति का इंतजार कर रही थी। कजरी तीज का चंद्रमा निकल आया था और वह व्रत खोलने के लिए अपने पति की प्रतीक्षा कर रही थी।

कुछ समय बाद ब्राह्मण घर पहुंचा और उसने पत्नी को सत्तू तथा साहूकार द्वारा दिए गए सामान के बारे में बताया। इसके बाद ब्राह्मणी ने विधि-विधान से पूजा पूरी की और चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपना व्रत खोला। कथा के अनुसार, कजरी तीज के व्रत के प्रभाव से उनके घर में सुख-शांति आई और जीवन के संकट दूर होने लगे।

कजरी तीज व्रत कथा का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार कजरी तीज की कथा का संबंध पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास, समर्पण और वैवाहिक सुख से जोड़ा जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा के बाद इस कथा का श्रवण करती हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ कजरी तीज का व्रत और कथा करने से भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि, व्रत-कथा से जुड़े फल धार्मिक आस्था और मान्यताओं का विषय हैं।

कजरी तीज पर क्या करें?

कजरी तीज के दिन महिलाएं सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है।

पूजा के दौरान रोली, अक्षत, फूल, फल, मिठाई और सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद कजरी तीज व्रत कथा पढ़ी या सुनी जाती है। कई क्षेत्रों में नीमड़ी माता की पूजा और कजरी लोकगीत गाने की भी परंपरा है। शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं अपने व्रत का पारण करती हैं।

कजरी तीज व्रत कथा से मिलने वाली सीख

इस कथा में पति-पत्नी के बीच प्रेम और समर्पण के साथ-साथ मानवता और दया का संदेश भी मिलता है। साहूकार ने ब्राह्मण की मजबूरी को समझते हुए उसे दंड देने के बजाय सहायता की। कथा यह संदेश देती है कि जरूरतमंद व्यक्ति की परिस्थिति को समझकर उसकी मदद करना सबसे बड़ा मानवीय धर्म है।

Kajari Teej Vrat Katha 2026: FAQ

कजरी तीज की व्रत कथा क्यों पढ़ी जाती है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, कजरी तीज की पूजा के बाद व्रत कथा पढ़ने या सुनने से व्रत का धार्मिक महत्व बढ़ता है और भगवान शिव-माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कजरी तीज की कथा किससे जुड़ी है?

कजरी तीज की व्रत कथा में एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी की कहानी बताई गई है, जिसमें ब्राह्मणी के व्रत के लिए सत्तू लाने और साहूकार द्वारा सहायता करने का प्रसंग आता है।

कजरी तीज पर किसकी पूजा की जाती है?

कजरी तीज पर मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। कुछ क्षेत्रों में नीमड़ी माता की पूजा की भी परंपरा है।

कजरी तीज का व्रत कौन रखता है?

मुख्य रूप से विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं। अविवाहित युवतियां भी योग्य जीवनसाथी की कामना से व्रत रख सकती हैं।

कजरी तीज पर व्रत कब खोला जाता है?

कई परंपराओं में चंद्रमा के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार विधि अलग हो सकती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई कथा और धार्मिक मान्यताएं पारंपरिक धार्मिक स्रोतों एवं लोक-मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और समुदायों में कजरी तीज की पूजा-विधि एवं व्रत से जुड़ी परंपराओं में अंतर हो सकता है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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