धनतेरस 2026 पूजा विधि, मंत्र और खरीदारी का शुभ मुहूर्त

By Tami

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धर्म संवाद / डेस्क : धनतेरस का पर्व हिंदू धर्म में सुख-समृद्धि, धन और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। दीपावली से पहले मनाए जाने वाले इस विशेष त्योहार पर भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और यमराज की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता भी माना जाता है। इसलिए धनतेरस के दिन उनकी पूजा करने से अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की कामना की जाती है।

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धनतेरस को धनत्रयोदशी और धन्वंतरि जयंती के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सोना-चांदी, बर्तन और अन्य शुभ वस्तुओं की खरीदारी करना मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है कि धनतेरस पर की गई खरीदारी से घर में सुख-समृद्धि और बरकत आती है। वहीं, यमराज के नाम से दीपदान करने की भी परंपरा है। आइए जानते हैं धनतेरस पर घर में पूजा करने की विधि, भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी के मंत्र तथा खरीदारी के शुभ मुहूर्त के बारे में।

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धनतेरस पर किन देवी-देवताओं की पूजा की जाती है?

धनतेरस के दिन मुख्य रूप से चार देवताओं की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

  • भगवान धन्वंतरि: इन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है। इनकी पूजा अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की कामना के लिए की जाती है।
  • माता लक्ष्मी: धन और ऐश्वर्य की देवी मां लक्ष्मी की पूजा घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक संपन्नता के लिए की जाती है।
  • भगवान कुबेर: इन्हें धन का देवता माना जाता है। इनकी पूजा से धन-धान्य और आर्थिक स्थिरता की कामना की जाती है।
  • यमराज: धनतेरस की शाम यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

घर पर धनतेरस की पूजा कैसे करें? जानें पूरी विधि

धनतेरस पर घर में विधि-विधान से पूजा करने के लिए सबसे पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। कथावाचक प्रदीप मिश्रा के अनुसार, दीपावली की मुख्य पूजा में शुभ मुहूर्त का विशेष ध्यान रखा जाता है, जबकि धनतेरस की पूजा के लिए मुहूर्त का विचार अनिवार्य नहीं माना जाता। हालांकि, पूजा करते समय अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग का ध्यान रखना चाहिए।

धनतेरस पूजा की आसान विधि इस प्रकार है:

  1. सबसे पहले घर के पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें। पक्का फर्श हो तो कपड़े से साफ करें और पारंपरिक मान्यता के अनुसार कच्चे फर्श को गोबर से लीपकर शुद्ध करें।
  2. पूजा स्थल पर आटे से चौक बनाएं और एक चौकी पर लाल या पीला साफ कपड़ा बिछाएं।
  3. चौकी पर माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। साथ में भगवान गणेश का पूजन भी करें।
  4. चौकी के सामने जल से भरा कलश रखें। इसके ऊपर गेहूं या चावल से भरा पात्र रख सकते हैं।
  5. एक पूजा थाली में रोली से स्वास्तिक बनाएं और उसके ऊपर चांदी का सिक्का रखें। चांदी का सिक्का उपलब्ध न होने पर एक रुपये का सिक्का भी रखा जा सकता है।
  6. पूजा सामग्री में मौली (कलावा), हल्दी, सुपारी, अक्षत, मिठाई, पान, धूप, दीप, गुड़, कमल गट्टा और फूल रखें।
  7. परंपरा के अनुसार सात लंबी बातियों वाले घी के दीपक जलाएं। आटे से बने दीपक का भी विशेष महत्व माना जाता है।
  8. अब माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर, भगवान धन्वंतरि और भगवान गणेश का ध्यान करते हुए उन्हें रोली, अक्षत, पुष्प और मिठाई अर्पित करें।
  9. हाथ में पुष्प, अक्षत, रोली और कमल गट्टा लेकर अपनी मनोकामना व्यक्त करें। परिवार की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और आर्थिक उन्नति की प्रार्थना करें।
  10. अंत में माता लक्ष्मी और अन्य देवी-देवताओं की आरती करें। आरती के बाद दोनों हाथ फैलाकर धन-धान्य और परिवार की खुशहाली की कामना करें। फिर परिवार के सभी सदस्यों को आरती दें।
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धनतेरस पूजा के मंत्र: 108 बार करें जाप

धनतेरस के दिन पूजा के दौरान माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार इन मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप कर सकते हैं।

भगवान कुबेर का मंत्र:

ॐ श्रीं कुबेराय नमः।

या

ॐ कुबेराय नमः।

माता लक्ष्मी का मंत्र:

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।

इन मंत्रों का जाप करते समय मन को शांत रखें और देवी-देवताओं का ध्यान करें।

धनतेरस 2026 खरीदारी का शुभ मुहूर्त

धनतेरस के दिन सोना-चांदी, नए बर्तन और घर के उपयोग की शुभ वस्तुएं खरीदने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तुएं घर में सुख-समृद्धि और धन-धान्य बढ़ाने का प्रतीक होती हैं। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, धनतेरस पर खरीदारी का शुभ समय 6 नवंबर को सुबह 11:06 बजे से लेकर 7 नवंबर को सुबह 10:46 बजे तक बताया गया है।

इसके अलावा खरीदारी के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त इस प्रकार हैं:

  • शुभ चौघड़िया: दोपहर 12:05 बजे से 1:27 बजे तक।
  • शाम का चौघड़िया: शाम 4:11 बजे से 5:33 बजे तक।

ध्यान रखें कि पूजा और खरीदारी के मुहूर्त शहर तथा पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए अंतिम समय की पुष्टि स्थानीय पंचांग से अवश्य कर लें।

धनतेरस पर दीपदान का क्या है महत्व?

धनतेरस की शाम यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर यमराज से परिवार की रक्षा और लंबी आयु की प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि यम दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

धनतेरस पर क्या खरीदना माना जाता है शुभ?

धनतेरस पर सोना, चांदी, पीतल, तांबे और अन्य धातुओं के बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। इसके अलावा लोग वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और घर के लिए उपयोगी नई वस्तुएं भी खरीदते हैं। हालांकि, खरीदारी अपनी आवश्यकता और सामर्थ्य के अनुसार करनी चाहिए। इस पर्व का मुख्य संदेश स्वास्थ्य, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करना है।

धनतेरस 2026: पूजा और खरीदारी से जुड़ी जरूरी बातें

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा अच्छे स्वास्थ्य के लिए, माता लक्ष्मी की पूजा आर्थिक समृद्धि के लिए और भगवान कुबेर की पूजा धन-धान्य की कामना के लिए की जाती है। वहीं, यम दीपदान को परिवार की सुरक्षा और लंबी आयु से जोड़कर देखा जाता है।

इस दिन घर की साफ-सफाई करें, पूजा स्थल को सजाएं, श्रद्धापूर्वक देवी-देवताओं की आराधना करें और जरूरत के अनुसार शुभ वस्तुओं की खरीदारी करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मन से की गई पूजा और सेवा से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता आती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएं परंपरागत मान्यताओं पर आधारित हैं। खरीदारी के शुभ मुहूर्त दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार हैं। स्थानीय शहर और पंचांग के अनुसार समय में अंतर संभव है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .