धर्म संवाद / डेस्क : उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दीपावली का उत्सव अनूठी परंपराओं और राजसी वैभव के साथ मनाया जाएगा। देश के अधिकतर मंदिरों में दीपावली अमावस्या के दिन मनाई जाती है, लेकिन बाबा महाकाल के दरबार में चतुर्दशी पर ही दीपोत्सव मनाने की विशेष परंपरा है। इस बार 8 नवंबर 2026 को चतुर्दशी और अमावस्या एक ही दिन पड़ने के कारण तड़के होने वाली भस्म आरती में भगवान महाकाल के दरबार में दीपावली का उत्सव मनाया जाएगा। वहीं, शाम को उज्जैन के लोग दीपोत्सव मनाएंगे।
यह भी पढ़े : Narak Chaturdashi 2026: छोटी दिवाली पर क्यों जलाते हैं यम दीप?
महाकाल मंदिर में दीपावली का यह आयोजन कई खास धार्मिक परंपराओं का साक्षी बनेगा। इस दिन भगवान महाकाल का तिल्ली के तेल से अभ्यंग स्नान कराया जाएगा। इसके बाद केसर-चंदन का उबटन लगाकर गर्म जल और सुगंधित द्रव्यों से स्नान कराया जाएगा। भगवान का सोने-चांदी के आभूषणों से राजसी शृंगार होगा और पारंपरिक पकवानों से अन्नकूट सजाया जाएगा।
सुबह 4 बजे खुलेंगे महाकाल मंदिर के पट, भस्म आरती में मनेगी दीपावली
दीपावली के दिन सुबह करीब चार बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर के पट खोले जाएंगे। इसके बाद भगवान महाकाल की भस्म आरती की विशेष तैयारियां शुरू होंगी। इस दौरान सबसे पहले बाबा का तिल्ली के तेल से अभ्यंग स्नान कराया जाएगा।
इसके बाद पुजारी परिवार की महिलाएं भगवान को केसर और चंदन का उबटन अर्पित करेंगी। गर्म जल और सुगंधित द्रव्यों से स्नान कराने के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक शृंगार किया जाएगा। इस अवसर पर बाबा को सोने-चांदी के आभूषणों से सजाया जाएगा। दीपावली के मौके पर भगवान का यह राजसी स्वरूप भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहेगा।
दीपावली के पकवानों से सजेगा भगवान महाकाल का अन्नकूट
महाकाल मंदिर में दीपावली के अवसर पर भगवान को पारंपरिक पकवानों का भोग लगाया जाएगा। इसके लिए अन्नकूट सजाया जाएगा, जिसमें कई तरह के पकवान और व्यंजन शामिल होंगे। अन्नकूट में गुजिया, पपड़ी, खुरमे, खीर, पूड़ी, भजिया, चावल, दाल, सब्जियां और विभिन्न प्रकार की चटनियां अर्पित की जाएंगी। दीपावली के पारंपरिक व्यंजनों से सजा यह अन्नकूट मंदिर की धार्मिक परंपरा और उत्सव की भव्यता को दर्शाएगा।
फुलझड़ियों से होगी पांचों आरतियां, रोशनी से जगमगाएगा महाकाल दरबार
महाकाल मंदिर की दीपावली परंपरा में फुलझड़ियों से आरती करना सबसे खास आकर्षण माना जाता है। दीपावली के दिन सुबह से लेकर रात तक होने वाली पांचों आरतियों में फुलझड़ियां जलाई जाएंगी। दीपों और फुलझड़ियों की रोशनी से बाबा महाकाल का दरबार जगमगा उठेगा। इस दौरान मंदिर परिसर में दीपोत्सव का विशेष माहौल रहेगा। भगवान महाकाल की आरती के समय रोशनी और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।
चतुर्दशी से होली तक भगवान महाकाल को कराया जाता है गर्म जल से स्नान
महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार, चतुर्दशी से भगवान को गर्म जल से स्नान कराने का क्रम शुरू हो जाता है। यह परंपरा फाल्गुन पूर्णिमा यानी होली तक जारी रहती है। दीपावली के अवसर पर होने वाला अभ्यंग स्नान भी इसी विशेष धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
सुबह बाबा के दरबार में दीपावली, शाम को शहर में दीपोत्सव
इस बार 8 नवंबर को चतुर्दशी और अमावस्या एक ही दिन होने के कारण महाकाल मंदिर में सुबह ही दीपावली का उत्सव मनाया जाएगा। तड़के भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का अभ्यंग स्नान, राजसी शृंगार, अन्नकूट और फुलझड़ियों से आरती की जाएगी।
वहीं, शाम को उज्जैन के लोग अपने घरों और प्रतिष्ठानों में दीप जलाकर दीपावली मनाएंगे। इस तरह बाबा महाकाल के दरबार में सुबह से शुरू होने वाला दीपोत्सव पूरे शहर में शाम को रोशनी और उल्लास का माहौल बनाएगा।
महाकाल मंदिर की यह अनूठी परंपरा दीपावली को धार्मिक आस्था, प्राचीन मान्यताओं और राजसी वैभव से जोड़ती है। यही वजह है कि उज्जैन के बाबा महाकाल की दीपावली देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है।






