Dhanteras 2026: काशी में खुलेगा मां अन्नपूर्णा का स्वर्णमयी दरबार, 21 किलो का चांदी का खजाना भक्तों में बंटेगा

By Tami

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Dhanteras 2026 Kashi Annapurna Temple

धर्म संवाद / डेस्क : दीपावली से पहले मनाए जाने वाले धनतेरस का पर्व इस बार काशी के श्रद्धालुओं के लिए बेहद खास होने जा रहा है। इस दिन वाराणसी के प्रसिद्ध श्री अन्नपूर्णा मंदिर में मां अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन होंगे। साल में केवल एक बार धनतेरस के अवसर पर माता का यह विशेष दरबार भक्तों के लिए खोला जाता है। धार्मिक मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा अपने भक्तों को धन, धान्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

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इस बार मंदिर में करीब 21 किलो के रजत खजाने को भक्तों में प्रसाद स्वरूप वितरित करने की तैयारी की गई है। खास बात यह है कि श्री अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट ने माता अन्नपूर्णा को भगवान शिव को भिक्षा देते हुए दर्शाने वाले विशेष चांदी के सिक्के भी तैयार कराए हैं। इन सिक्कों के साथ सामान्य सिक्के और धान का लावा भी श्रद्धालुओं को दिया जाएगा।

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मंदिर के महंत शंकर पुरी के अनुसार, 6 नवंबर 2026 से मां अन्नपूर्णा की स्वर्णमयी प्रतिमा के दर्शन शुरू होंगे। यह विशेष दर्शन लगातार पांच दिनों तक जारी रहेंगे।

धनतेरस 2026 पर कब खुलेंगे मां अन्नपूर्णा के कपाट?

धनतेरस के अवसर पर मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। मंदिर में 6 नवंबर की मध्यरात्रि के बाद सुबह 2 बजकर 45 मिनट पर शास्त्रोक्त विधि से पूजा शुरू होगी। इस दौरान माता के खजाने की भी विधि-विधान से पूजा की जाएगी।

करीब दो घंटे तक पूजा-अर्चना के बाद सुबह 5 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे। भक्त रात 11 बजकर 15 मिनट तक माता के दर्शन कर सकेंगे। वहीं, 7 नवंबर से श्रद्धालु सुबह 4 बजे से रात 11 बजकर 15 मिनट तक मां अन्नपूर्णा के दर्शन कर सकेंगे। इस दौरान भक्तों को माता का खजाना भी प्रसाद स्वरूप दिया जाएगा।

21 किलो के चांदी के खजाने में क्या होगा खास?

इस बार मां अन्नपूर्णा के दरबार में भक्तों को विशेष चांदी के सिक्के प्रसाद के रूप में मिलेंगे। श्री अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट की ओर से तैयार कराए गए इन सिक्कों पर मां अन्नपूर्णा और भगवान शिव से जुड़ी धार्मिक मान्यता को दर्शाया गया है।मान्यता के अनुसार, मां अन्नपूर्णा ने भगवान शिव को भिक्षा देकर संसार के पालन-पोषण में अन्न के महत्व का संदेश दिया था। इसी प्रसंग को सिक्कों पर विशेष रूप से उकेरा गया है।

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इन खास सिक्कों के अलावा भक्तों को सामान्य सिक्के और धान का लावा भी दिया जाएगा। श्रद्धालु माता के खजाने को प्रसाद के रूप में अपने घर ले जा सकेंगे।

मां अन्नपूर्णा के खजाने को तिजोरी में रखने की क्या है मान्यता?

काशी के श्री अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस के दिन मिलने वाले खजाने को लेकर भक्तों में विशेष आस्था है। धार्मिक मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा का खजाना घर की तिजोरी में रखने से परिवार पर माता की कृपा बनी रहती है।

मान्यता के अनुसार, इससे घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यही वजह है कि धनतेरस के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन करने और उनका खजाना प्राप्त करने के लिए काशी पहुंचते हैं।

धनतेरस पर 5 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान

धनतेरस के अवसर पर मां अन्नपूर्णा के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के लिए इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के काशी पहुंचने की संभावना है। अनुमान है कि पांच लाख से अधिक भक्त माता के दरबार में हाजिरी लगा सकते हैं।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए करीब दो किलोमीटर तक बैरिकेडिंग की गई है। इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की भी तैनाती की गई है।

धनतेरस पर क्यों होती है मां अन्नपूर्णा की पूजा?

हिंदू धर्म में मां अन्नपूर्णा को अन्न, पोषण और समृद्धि की देवी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां अन्नपूर्णा की कृपा से संसार के सभी जीवों को भोजन प्राप्त होता है। भगवान शिव और मां अन्नपूर्णा से जुड़ी पौराणिक कथा भी अन्न के महत्व को बताती है।

धनतेरस पर माता के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन करना और उनका खजाना प्राप्त करना काशी की एक विशेष धार्मिक परंपरा है। भक्त इस अवसर को बेहद शुभ मानते हैं और माता से अपने परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अन्न-धन से परिपूर्ण रहने की कामना करते हैं।

इस बार भी 6 नवंबर से काशी में मां अन्नपूर्णा का स्वर्णमयी दरबार श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .