धर्म संवाद / डेस्क : ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाने वाला बिपत्तारिणी पूजा का पर्व इस वर्ष 18 जुलाई 2026 (शनिवार) और 21 जुलाई 2026 (मंगलवार) को मनाया जाएगा। यह पर्व मां बिपत्तारिणी को समर्पित है, जिन्हें देवी दुर्गा और मां काली का ही एक शक्तिशाली स्वरूप माना जाता है। मान्यता है कि मां बिपत्तारिणी अपने भक्तों को जीवन की हर विपत्ति और संकट से रक्षा करती हैं।
यह भी पढ़े : माँ दुर्गा के 108 नाम | 108 Names of Maa Durga
कब मनाई जाती है बिपत्तारिणी पूजा?
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में रथ यात्रा और बहुदा यात्रा के बीच आने वाले मंगलवार और शनिवार को बिपत्तारिणी पूजा का विशेष महत्व होता है।
इस वर्ष पूजा की तिथियां:
- 18 जुलाई 2026 (शनिवार) – वरीयान योग एवं रवि योग, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र
- 21 जुलाई 2026 (मंगलवार) – सिद्ध योग एवं चित्रा नक्षत्र
इन दोनों दिनों में मां बिपत्तारिणी की पूजा शुभ मानी जाती है।
बिपत्तारिणी पूजा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां बिपत्तारिणी अपने भक्तों को दुर्घटनाओं, रोगों, आर्थिक संकट, पारिवारिक समस्याओं और अन्य विपत्तियों से बचाती हैं।
विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की सुरक्षा के लिए यह व्रत रखती हैं। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है और घर में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है।
बिपत्तारिणी पूजा विधि
बिपत्तारिणी पूजा के दिन श्रद्धालु विधि-विधान से मां की आराधना करते हैं।
- सुबह स्नान कर स्वच्छ या लाल रंग के वस्त्र पहनें।
- पूजा स्थल की सफाई कर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं।
- मां बिपत्तारिणी या मां दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें।
- मां को लाल फूल, सिंदूर, अक्षत, चुनरी, धूप, दीप, नारियल और मौसमी फल अर्पित करें।
- कई स्थानों पर परंपरा के अनुसार 13 प्रकार के फल, 13 प्रकार के फूल या 13 गांठ वाला लाल धागा भी चढ़ाया जाता है।
- मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करें और बिपत्तारिणी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
- पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
- विवाहित महिलाएं रक्षा और सौभाग्य की कामना से अपनी कलाई में लाल धागा बांधती हैं।
- पूजा पूर्ण होने के बाद श्रद्धा और परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।
किन राज्यों में विशेष रूप से मनाया जाता है यह पर्व?
बिपत्तारिणी पूजा का विशेष महत्व ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में है। इन राज्यों के मंदिरों और घरों में श्रद्धालु बड़ी संख्या में मां बिपत्तारिणी की पूजा-अर्चना करते हैं और परिवार की सुख-शांति की कामना करते हैं।






