धर्म संवाद / डेस्क : भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा 2026 की शुरुआत से पहले पुरी श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) और अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (ISKCON) के बीच रथयात्रा की तारीख को लेकर विवाद गहरा गया है। पुरी मंदिर समिति का आरोप है कि ISKCON विदेशों में अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा आयोजित कर शास्त्रीय परंपरा का उल्लंघन कर रहा है, जबकि ISKCON का कहना है कि अलग-अलग देशों के मौसम और स्थानीय नियमों के कारण एक ही दिन रथयात्रा निकालना संभव नहीं है।
यह भी पढ़े : Jagannath Rath Yatra 2026: रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ को चढ़ाएं ये 5 प्रिय फूल, पूरी होगी हर मनोकामना
इस विवाद के बीच पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है।
क्या है पूरा विवाद?
पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होती है। इस वर्ष यह महोत्सव 16 जुलाई 2026 से आरंभ हो रहा है। मंदिर समिति का कहना है कि स्कंद पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रथयात्रा की यही निर्धारित तिथि है और पूरी दुनिया में इसी परंपरा का पालन होना चाहिए।
हालांकि, ISKCON कई देशों में पहले ही रथयात्रा आयोजित कर चुका है और कई स्थानों पर अलग-अलग तिथियों पर यात्रा निकालने की तैयारी कर रहा है, जिस पर पुरी मंदिर प्रशासन ने आपत्ति जताई है।
गजपति महाराजा ने जताई नाराजगी
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति (SJTMC) के अध्यक्ष और पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने कहा कि जब अन्य सभी धार्मिक पर्व निर्धारित तिथियों पर मनाए जाते हैं, तो रथयात्रा में अलग नियम क्यों अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों से ISKCON के साथ इस विषय पर चर्चा चल रही है। वर्ष 2021 में भारत में आयोजित होने वाली रथयात्राओं को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन विदेशों में निर्धारित तिथि का पालन नहीं किया जा रहा, जो निराशाजनक है।
मंदिर समिति का आरोप
पुरी मंदिर प्रशासन का कहना है कि ISKCON द्वारा जारी बयान श्रद्धालुओं को भ्रमित करने वाले हैं। समिति के अनुसार, 20 मार्च 2025 को भुवनेश्वर में दोनों पक्षों के विद्वानों के बीच बैठक हुई थी, जिसमें ISKCON ने विदेशों में अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा आयोजित करने के पक्ष में तर्क दिए, लेकिन मंदिर के विद्वानों ने शास्त्रों का हवाला देते हुए उन्हें स्वीकार नहीं किया। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि ISKCON यह प्रचारित करने की कोशिश कर रहा है कि गजपति महाराजा ने अलग-अलग तिथियों पर रथयात्रा आयोजित करने की अनुमति दी है, जबकि यह पूरी तरह गलत और भ्रामक है।
ISKCON ने क्या कहा?
ISKCON के राष्ट्रीय प्रवक्ता युधिष्ठिर गोविंद दास ने कहा कि दुनिया के विभिन्न देशों में स्थानीय मौसम, प्रशासनिक नियम और परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। ऐसे में हर देश में एक ही दिन रथयात्रा निकालना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने बताया कि भारत में आयोजित रथयात्राओं की तिथियां पुरी मंदिर प्रशासन से समन्वय के बाद तय की जाती हैं, जबकि विदेशों में स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर कार्यक्रम निर्धारित किए जाते हैं।
बेंगलुरु ISKCON ने लिया अलग फैसला
इस विवाद के बीच ISKCON की बेंगलुरु इकाई ने स्पष्ट किया है कि वह अपने सभी केंद्रों पर पुरी जगन्नाथ मंदिर द्वारा निर्धारित नौ दिवसीय रथयात्रा कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजन करेगी। बेंगलुरु इकाई ने यह भी कहा कि वह पश्चिम बंगाल के मायापुर स्थित ISKCON मुख्यालय से अलग और स्वतंत्र संस्था है।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
विवाद बढ़ने के बाद गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि मायापुर स्थित ISKCON को पारंपरिक तिथि से अलग रथयात्रा आयोजित करने से रोका जाए, ताकि भगवान जगन्नाथ की प्राचीन धार्मिक परंपरा और शास्त्रीय व्यवस्था को सुरक्षित रखा जा सके।






