धर्म संवाद / डेस्क : भारत में कई मंदिर अपनी दिव्यता, पवित्रता और अनूठी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं। इन्हीं में से एक है अट्टुकल भगवती मंदिर, जो केरल के तिरुवनंतपुरम शहर में स्थित है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां आयोजित होने वाला अट्टुकल पोंगाला उत्सव इसे विश्वभर में विशिष्ट पहचान दिलाता है।
यह भी पढ़े : मां कामाख्या: आदि शक्ति का अद्भुत स्वरूप
मां भद्रकाली का दिव्य धाम
अट्टुकल भगवती मंदिर में मां भगवती देवी भद्रकाली के रूप में गर्भगृह में विराजमान हैं। भक्तों की मान्यता है कि मां भद्रकाली समृद्धि और मोक्ष की देवी हैं और उनके दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। इच्छा पूर्ण होने पर भक्त विशेष अनुष्ठान और पूजा-अर्चना कर कृतज्ञता प्रकट करते हैं।
अट्टुकल पोंगाला: केवल महिलाओं का पर्व
इस मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा है अट्टुकल पोंगाला उत्सव, जो 10 दिनों तक चलता है। इस दौरान एक विशेष दिन ऐसा होता है जब मंदिर परिसर में पुरुषों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है और केवल महिलाएं ही मां भगवती की पूजा कर सकती हैं। लाखों महिलाएं एक साथ पोंगाला बनाकर मां को अर्पित करती हैं, जिसके कारण इसे दुनिया का सबसे बड़ा महिला धार्मिक आयोजन भी माना जाता है।
मंदिर की भव्य वास्तुकला
अट्टुकल भगवती मंदिर की वास्तुकला पारंपरिक तमिल और केरल शैली का सुंदर मिश्रण है। मंदिर के स्तंभों पर देवी काली, मां पार्वती, भगवान शिव और भगवान विष्णु के दस अवतारों की अद्भुत नक्काशी की गई है। यह कलात्मक सौंदर्य मंदिर की आध्यात्मिक ऊर्जा को और भी बढ़ा देता है।
पौराणिक कथा और मंदिर की स्थापना
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक दिन एक व्यक्ति नदी पार कर रहा था, तभी एक दिव्य कन्या ने उससे नदी पार कराने का आग्रह किया। कन्या के तेज से प्रभावित होकर व्यक्ति ने उसे अपने घर आने का निमंत्रण दिया। हालांकि कन्या अचानक अदृश्य हो गई और बाद में उस व्यक्ति को स्वप्न में दर्शन देकर पहाड़ी पर बनी तीन रेखाओं वाले स्थान की जानकारी दी।
कन्या ने कहा कि जहां पहाड़ी पर तीन निशान हों, वहीं उसका मंदिर बनाया जाए। अगले दिन व्यक्ति को बताए गए स्थान पर तीन चिह्न मिले। यह बात गांव में फैलते ही सभी ग्रामीणों ने मिलकर मंदिर का निर्माण कराया और वहां चार भुजाओं वाली मां भद्रकाली की प्रतिमा की स्थापना की गई।






