धर्म संवाद / डेस्क : सनातन धर्म में भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के दिव्य शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण-कला का अधिष्ठाता माना जाता है। हर साल भाद्रपद मास में सूर्य के सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करने के अवसर पर विश्वकर्मा जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ-साथ औजारों, मशीनों, वाहनों, दुकानों, फैक्ट्रियों और कार्यस्थल की पूजा करने की परंपरा है।
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मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए कई दिव्य भवनों, अस्त्र-शस्त्रों और नगरों का निर्माण किया था। यही वजह है कि इंजीनियर, कारीगर, श्रमिक, मैकेनिक, व्यापारी और औद्योगिक संस्थानों से जुड़े लोग इस दिन विशेष रूप से भगवान विश्वकर्मा की आराधना करते हैं।
कई जगहों पर विश्वकर्मा पूजा के दिन मशीनों और औजारों का इस्तेमाल नहीं किया जाता। इसके बजाय उनकी साफ-सफाई करके विधि-विधान से पूजा की जाती है। अगर आप भी घर, दुकान, ऑफिस या फैक्ट्री में विश्वकर्मा पूजा करने जा रहे हैं, तो पूजा से पहले सामग्री की पूरी लिस्ट जरूर तैयार कर लें।
विश्वकर्मा पूजा 2026 के लिए पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट
विश्वकर्मा पूजा के लिए बहुत अधिक सामग्री की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन पूजा में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजें पहले से जुटा लेना शुभ माना जाता है।
भगवान विश्वकर्मा की पूजा सामग्री
- भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर
- लकड़ी की चौकी
- पीला या लाल साफ कपड़ा
- फूल और फूलों की माला
- अक्षत यानी साबुत चावल
- रोली
- कुमकुम
- सुपारी
- रक्षासूत्र
- गुलाल
- धूप और अगरबत्ती
- दीपक और बाती
- शुद्ध देसी घी
- जल से भरा कलश
- गंगाजल
- पंचामृत
- दही
- मौसमी फल
- मिठाई
- पंचमेवा
- इलायची
इसके अलावा जिस स्थान पर पूजा की जा रही है, वहां मौजूद औजार, मशीन, वाहन या अन्य कार्य उपकरण भी पूजा के लिए साफ करके तैयार रखें।
विश्वकर्मा पूजा में औजारों और मशीनों की पूजा क्यों होती है?
भगवान विश्वकर्मा को दिव्य निर्माण और शिल्पकला का देवता माना जाता है। इसलिए इस दिन अपने काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों और उपकरणों के प्रति सम्मान व्यक्त करने की परंपरा है।
कारखानों और औद्योगिक संस्थानों में मशीनों की साफ-सफाई कर उन्हें फूलों से सजाया जाता है। कई स्थानों पर वाहन, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य कार्य-साधनों की भी पूजा की जाती है। इस परंपरा का एक संदेश यह भी है कि जिस साधन से व्यक्ति अपनी आजीविका कमाता है, उसका सम्मान और उचित रखरखाव किया जाना चाहिए।
विश्वकर्मा पूजा 2026 की विधि
1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें
विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें।
2. पूजा स्थल तैयार करें
लकड़ी की चौकी पर साफ पीले या लाल रंग का कपड़ा बिछाएं। इसके बाद चौकी पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। पूजा स्थल और आसपास के स्थान पर गंगाजल का छिड़काव करें। जिन औजारों, मशीनों या उपकरणों की पूजा करनी है, उन्हें भी साफ करके पूजा स्थल के पास रखें।
3. भगवान विश्वकर्मा को पुष्प और अक्षत अर्पित करें
भगवान विश्वकर्मा को फूल और फूलों की माला अर्पित करें। इसके बाद रोली, कुमकुम और अक्षत से तिलक करें। इसी तरह अपने औजारों और मशीनों पर भी रोली और अक्षत लगाएं। वाहनों की पूजा कर रहे हैं तो उन्हें भी साफ करके तिलक करें और फूल अर्पित करें।
4. कलश की स्थापना करें
पूजा स्थल पर जल से भरा कलश स्थापित करें। कलश पर रोली और अक्षत लगाएं। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए विधि-विधान से पूजा करें। आप अपनी परंपरा और आचार्य के निर्देश के अनुसार विश्वकर्मा भगवान के मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
5. दीपक जलाकर भोग लगाएं
भगवान विश्वकर्मा के सामने शुद्ध देसी घी का दीपक जलाएं। धूप और अगरबत्ती अर्पित करें। इसके बाद भगवान को फल, मिठाई, पंचमेवा और अन्य नैवेद्य अर्पित करें। पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा से अपने काम में सफलता, सुख-समृद्धि, सुरक्षा और उन्नति की प्रार्थना करें।
6. मशीनों और कार्यस्थल की पूजा करें
फैक्ट्री, दुकान, ऑफिस या वर्कशॉप में पूजा कर रहे हैं तो भगवान विश्वकर्मा की पूजा के बाद वहां मौजूद मशीनों, औजारों और कार्य उपकरणों की भी पूजा करें। औजारों और मशीनों पर तिलक लगाकर फूल अर्पित करें। वाहन की पूजा करते समय भी उसे अच्छी तरह साफ कर तिलक और पुष्प अर्पित किए जा सकते हैं।
7. आरती और प्रसाद वितरण
पूजा पूरी होने के बाद भगवान विश्वकर्मा की आरती करें। परिवार के सदस्यों, कर्मचारियों और सहकर्मियों के साथ आरती में शामिल हों। अंत में सभी लोगों को प्रसाद वितरित करें और भगवान विश्वकर्मा से कार्यक्षेत्र में सुख-समृद्धि और उन्नति की कामना करें।
विश्वकर्मा पूजा पर औजारों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता?
कई क्षेत्रों और कार्यस्थलों पर विश्वकर्मा पूजा के दिन औजारों और मशीनों का इस्तेमाल नहीं करने की परंपरा है। इसके पीछे धार्मिक रूप से भगवान विश्वकर्मा के प्रति सम्मान की भावना जुड़ी है। इस दिन काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करके उन्हें विश्राम देने की परंपरा कई औद्योगिक और कारीगर समुदायों में देखने को मिलती है। हालांकि, यह परंपरा क्षेत्र और समुदाय के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
विश्वकर्मा पूजा का महत्व
विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रम, कौशल, तकनीक और निर्माण कार्य के सम्मान से भी जुड़ा पर्व है। भगवान विश्वकर्मा की पूजा के माध्यम से लोग अपने कार्य और उससे जुड़े साधनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। विशेष रूप से इंजीनियर, आर्किटेक्ट, कारीगर, बढ़ई, लोहार, मैकेनिक, वाहन चालक, मशीन ऑपरेटर, फैक्ट्री कर्मचारी और व्यापारी इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं।
निष्कर्ष
विश्वकर्मा जयंती के दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ अपने कार्यस्थल, मशीनों, औजारों और वाहनों की पूजा करने की परंपरा है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से कार्य में सफलता और उन्नति की कामना की जाती है। इसलिए विश्वकर्मा पूजा से पहले सामग्री की पूरी तैयारी कर लें और अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। पूजा की विधि और मंत्रों में क्षेत्र, परिवार तथा परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है। किसी विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंडित या आचार्य की सलाह लेना उचित है।






