धर्म संवाद / डेस्क: आज यानी 17 सितंबर 2026 को देशभर में विश्वकर्मा पूजा मनाई जा रही है। भगवान विश्वकर्मा को निर्माण, शिल्प, वास्तुकला और तकनीक का देवता माना जाता है। इस दिन कारखानों, वर्कशॉप, दुकानों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मशीनों, औजारों और उपकरणों की पूजा करने की परंपरा है।
यह भी पढ़े : विश्वकर्मा पूजा 2026: जानें भगवान विश्वकर्मा की कथा
मान्यता है कि विश्वकर्मा पूजा के दिन भगवान विश्वकर्मा की विधि-विधान से पूजा करने के बाद उनकी आरती करने से सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा की आरती और पाठ का भी विशेष महत्व बताया गया है।
भगवान विश्वकर्मा की आरती
विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर पूजा-अर्चना के बाद भगवान विश्वकर्मा की आरती की जाती है। आरती के दौरान श्रद्धालु भगवान से सुख, शांति, समृद्धि और कार्यक्षेत्र में सफलता की कामना करते हैं।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता, रक्षक स्तुति धर्मा।।
आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में, ज्ञान विकास किया।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
रोग ग्रस्त राजा ने जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर दूर दुख कीना।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
जब रथकार दंपति, तुम्हारी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन की दुविधा मिट जाए, अटल शांति पावे।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
श्री विश्वकर्मा जी की आरती जो कोई जन गावे।
कहत गजानंद स्वामी, सुख-संपत्ति पावे।।
ॐ जय श्री विश्वकर्मा, प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।






