धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में बुधवार का दिन बुध ग्रह और भगवान श्री गणेश को समर्पित माना गया है। बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, शिक्षा, व्यापार, तर्कशक्ति और संचार का कारक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह कमजोर हो, तो उसे शिक्षा, व्यापार, नौकरी और निर्णय लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
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ऐसी मान्यता है कि हर बुधवार श्रद्धा और नियमपूर्वक ‘बुध स्तोत्र’ का पाठ करने से बुध ग्रह की शुभता बढ़ती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आने लगते हैं। हालांकि, यह सभी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।
बुध स्तोत्र पाठ का धार्मिक महत्व
बुध स्तोत्र का उल्लेख प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि इसका नियमित पाठ करने से बुध ग्रह की अशुभता कम होती है और व्यक्ति को बुद्धि, विवेक, अच्छी वाणी तथा निर्णय लेने की क्षमता प्राप्त होती है। विद्यार्थी, व्यापारी और नौकरीपेशा लोग विशेष रूप से इसका पाठ करते हैं।
”गाइये गणपति जगवंदन ।
शंकर सुवन भवानी के नंदन ॥
सिद्धि सदन गजवदन विनायक ।
कृपा सिंधु सुंदर सब लायक ॥
गाइये गणपति जगवंदन ।
शंकर सुवन भवानी के नंदन ॥
मोदक प्रिय मुद मंगल दाता ।
विद्या बारिधि बुद्धि विधाता ॥
गाइये गणपति जगवंदन ।
शंकर सुवन भवानी के नंदन ॥
मांगत तुलसीदास कर जोरे ।
बसहिं रामसिय मानस मोरे ॥
गाइये गणपति जगवंदन ।
शंकर सुवन भवानी के नंदन” ॥
”बुध स्तोत्र”
”पीताम्बर: पीतवपु किरीटी, चतुर्भुजो देवदु:खापहर्ता ।
धर्मस्य धृक सोमसुत: सदा मे, सिंहाधिरुढ़ो वरदो बुधश्च ।।
प्रियंगुकनकश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम ।
सौम्यं सौम्यगुणोपेतं नमामि शशिनन्दनम ।।
सोमसुनुर्बुधश्चैव सौम्य: सौम्यगुणान्वित: ।
सदा शान्त: सदा क्षेमो नमामि शशिनन्दनम ।।
उत्पातरूपी जगतां चन्द्रपुत्रो महाद्युति: ।
सूर्यप्रियकरोविद्वान पीडां हरतु मे बुधं ।।
शिरीषपुष्पसंकाशं कपिलीशो युवा पुन: ।
सोमपुत्रो बुधश्चैव सदा शान्तिं प्रयच्छतु ।।
श्याम: शिरालश्चकलाविधिज्ञ:, कौतूहली कोमलवाग्विलासी ।
रजोधिको मध्यमरूपधृक स्या-दाताम्रनेत्रो द्विजराजपुत्र:।।
अहो चन्द्रासुत श्रीमन मागधर्मासमुदभव: ।
अत्रिगोत्रश्चतुर्बाहु: खड्गखेटकधारक: ।।
गदाधरो नृसिंहस्थ: स्वर्णनाभसमन्वित: ।






