धर्म संवाद / डेस्क : Puri Jagannath Temple में मनाई जाने वाली स्नान पूर्णिमा (Snana Yatra) हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और भव्य उत्सवों में से एक है। यह पर्व ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को आयोजित किया जाता है और इसे विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत माना जाता है।
यह भी पढ़े : भगवान जगन्नाथ के भोग को ‘अबाढ़ा’ क्यों कहते हैं? जानिए महाप्रसाद और 56 भोग का रहस्य
इस अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का भव्य महास्नान किया जाता है, जिसमें हजारों-लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं।
स्नान पूर्णिमा क्या है? (Snana Purnima Significance)
स्नान पूर्णिमा को “स्नान यात्रा” भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान जगन्नाथ अपने भाई-बहन के साथ भक्तों को दर्शन देने के लिए विशेष रूप से बाहर आते हैं।
मुख्य आकर्षण:
- भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का महास्नान
- 108 पवित्र कलशों से जलाभिषेक
- रथ यात्रा की शुरुआत का प्रतीक पर्व
108 कलशों से होता है पवित्र स्नान (Mahasnana Ritual)
इस विशेष दिन मंदिर के पवित्र “सुन कुआं” (सोने के कुएं) से जल निकाला जाता है। इस जल में जड़ी-बूटियां, सुगंधित इत्र और औषधीय तत्व मिलाए जाते हैं।
इसके बाद:
- 108 कलशों से भगवान का स्नान कराया जाता है
- वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अनुष्ठान संपन्न होता है
- यह दृश्य अत्यंत भव्य और दिव्य माना जाता है
गजानन वेश: हाथी रूप में भगवान का श्रृंगार
स्नान के बाद एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है जिसे गजानन वेश (Hathi Besha) कहा जाता है।
इसमें:
- भगवान जगन्नाथ और बलभद्र को हाथी के रूप में सजाया जाता है
- यह रूप भक्तों के लिए अत्यंत आकर्षक और दुर्लभ दर्शन होता है
अनवसर काल: भगवान का 15 दिन का एकांतवास
मान्यता के अनुसार स्नान के बाद भगवान “अस्वस्थ” हो जाते हैं। इसलिए वे भक्तों से दूर एकांत में रहते हैं, जिसे अनवसर काल कहा जाता है।
इस दौरान:
- मंदिर के गर्भगृह में विशेष देखभाल होती है
- आम भक्तों के दर्शन बंद रहते हैं
- पुजारी सेवा-पूजा करते हैं
नवयौवन दर्शन: भक्तों को फिर मिलते हैं दर्शन
15 दिनों के अनवसर काल के बाद भगवान पूरी तरह स्वस्थ होकर नए रूप में प्रकट होते हैं, जिसे नवयौवन दर्शन कहा जाता है।
यह अवसर:
- भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है
- रथ यात्रा से ठीक पहले भगवान के दर्शन होते हैं
सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी
पुरी में आयोजित इस विशाल आयोजन में लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। अनुमान के अनुसार भीड़ 3 से 4 लाख तक पहुंच जाती है।
सुरक्षा व्यवस्था:
- 729 पुलिसकर्मियों की तैनाती
- 15 एसपी रैंक अधिकारी
- 30 डीएसपी रैंक अधिकारी
- 87 इंस्पेक्टर
- 350+ एएसआई और एसआई अधिकारी
सेंट्रल आईजी सत्यजीत नायक के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारू दर्शन के लिए:
- मजबूत बैरिकेडिंग व्यवस्था
- भीड़ नियंत्रण योजना
- आपातकालीन मेडिकल और रेस्क्यू टीम
- CCTV और निगरानी सिस्टम
तैनात किए गए हैं।
