धर्म संवाद / डेस्क : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के प्रसिद्ध गंगरेल बांध में उस वक्त लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई, जब बोटिंग स्थल के पास भगवान नेमीनाथ जी की एक प्रतिमा मिली। प्रतिमा मिलने की जानकारी जैसे ही जैन समाज के लोगों को हुई, वे मौके पर पहुंचे और विधि-विधान के साथ प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
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जैन समाज के अनुसार, यह प्रतिमा करीब 37 साल पुरानी बताई जा रही है। फिलहाल प्रतिमा को इतवारी बाजार स्थित श्री पार्श्वनाथ जैन श्वेतांबर मंदिर में सुरक्षित रखा गया है।
राजस्थान के जयपुर में बनी है प्रतिमा
जैन समाज के मुताबिक मिली प्रतिमा करीब 11 इंच की है। बताया जा रहा है कि इसका निर्माण राजस्थान के जयपुर में हुआ था। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह प्रतिमा गंगरेल बांध के बोटिंग स्थल तक कैसे पहुंची। समाज के लोगों का अनुमान है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने प्रतिमा को यहां लाकर छोड़ दिया होगा। फिलहाल इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
दो महीने तक मंदिर में सुरक्षित रखी जाएगी प्रतिमा
जैन समाज ने फिलहाल प्रतिमा को सुरक्षित रखने का फैसला लिया है। समाज के अनुसार, करीब दो महीने तक प्रतिमा को मंदिर में सुरक्षित रखा जाएगा। यदि इस अवधि के दौरान कोई व्यक्ति प्रतिमा की उचित पहचान या उससे संबंधित वैध दावा लेकर सामने नहीं आता है, तो इसे गुजरात के पालीताना स्थित तीर्थ भंडार में जमा कराने की बात कही गई है। जैन समाज से जुड़े आकाश गोलछा के मुताबिक, प्रतिमा की पहचान या दावे से संबंधित जानकारी सामने आने तक इसे सुरक्षित रखा जाएगा।
पालीताना ले जाने की भी कही गई बात
जैन समाज के अनुसार, जैन परंपरा में पुरानी अथवा विसर्जन योग्य प्रतिमाओं को धार्मिक प्रक्रिया के तहत पालीताना क्षेत्र ले जाने की परंपरा बताई जाती है।
विजय गोलछा के मुताबिक, ऐसी स्थिति में प्रतिमा को पालीताना ले जाकर संतयोजय नदी में धार्मिक प्रक्रिया के तहत विसर्जित करने की बात भी सामने आई है। हालांकि, फिलहाल प्रतिमा को मंदिर में सुरक्षित रखा गया है और आगे की प्रक्रिया दावे या पहचान सामने आने के बाद तय की जाएगी।
गंगरेल बांध जैसे पर्यटन स्थल पर मिली प्रतिमा से बढ़ी चर्चा
गंगरेल बांध धमतरी जिले के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे पर्यटन स्थल के बोटिंग क्षेत्र के पास भगवान नेमीनाथ की प्रतिमा मिलने के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। जैन समाज ने प्रतिमा को सुरक्षित रखने के साथ ही मामले की जानकारी संबंधित पुलिस को भी दी है। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि करीब 11 इंच की यह प्रतिमा गंगरेल बांध तक कैसे पहुंची और इसे यहां किसने छोड़ा।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगा पूरा सच
फिलहाल प्रतिमा जैन समाज की देखरेख में सुरक्षित है। पुलिस को मामले की जानकारी दिए जाने के बाद प्रतिमा के गंगरेल बांध तक पहुंचने के कारणों की जांच की जा सकती है। यदि प्रतिमा से जुड़े किसी व्यक्ति या संस्था की पहचान होती है, तो उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
