धर्म संवाद / डेस्क : शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना का विशेष महत्व होता है। इन नौ दिनों में भक्त माता रानी को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं, मंत्रों का जाप करते हैं और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा के लिए सुबह, शाम और रात के अलग-अलग समय का अपना धार्मिक महत्व माना जाता है?
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हिंदू धर्म में सूर्योदय के आसपास का समय पूजा-पाठ और ध्यान के लिए शुभ माना जाता है। वहीं, सूर्यास्त के समय प्रदोष काल में दीपक जलाकर मां दुर्गा की आरती करने की परंपरा है। इसके अलावा, कुछ धार्मिक परंपराओं में राहुकाल के दौरान मंत्र जाप और मध्यरात्रि के निशीथ काल में विशेष साधना का भी उल्लेख मिलता है।
ऐसे में आइए जानते हैं कि नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा किस समय करनी चाहिए, सुबह और शाम की आराधना का क्या महत्व है और रात में साधना करने से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं क्या हैं।
नवरात्रि में सुबह पूजा करना क्यों माना जाता है शुभ?
हिंदू धार्मिक परंपरा में सुबह का समय पूजा-पाठ, ध्यान और मंत्र जाप के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्योदय के आसपास स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करना और शांत मन से देवी की आराधना करना प्रचलित है। नवरात्रि के दौरान भक्त सुबह मां दुर्गा के सामने दीपक जलाते हैं, पुष्प अर्पित करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या देवी मंत्रों का पाठ करते हैं।
सुबह नियमित पूजा करने से दिन की शुरुआत भक्ति और सकारात्मक विचारों के साथ होती है। इस दौरान साधक मन को एकाग्र करके माता रानी से सुख, शांति, समृद्धि और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
ध्यान रखें कि पूजा का सटीक शुभ समय तिथि, स्थान और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए विशेष अनुष्ठान या घटस्थापना के लिए पंचांग में दिए गए मुहूर्त को देखना उचित रहता है।
शाम के प्रदोष काल में करें मां दुर्गा की आरती
सुबह के अलावा शाम का समय भी मां दुर्गा की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। सूर्यास्त के आसपास के समय में संध्या आरती, दीपदान और देवी स्तुति करने की परंपरा है। नवरात्रि में कई घरों और मंदिरों में शाम को मां दुर्गा के सामने घी या तेल का दीपक जलाया जाता है। इसके बाद धूप, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करके माता रानी की आरती की जाती है।
प्रदोष काल सामान्यतः सूर्यास्त के आसपास की अवधि को कहा जाता है। इसका सटीक समय स्थान और दिन के अनुसार बदलता है। इसलिए यदि आप किसी विशेष मुहूर्त में पूजा करना चाहते हैं, तो स्थानीय पंचांग की सहायता ले सकते हैं।
जो भक्त सुबह पूजा नहीं कर पाते, वे अपनी दिनचर्या के अनुसार शाम को भी श्रद्धापूर्वक मां दुर्गा की आराधना कर सकते हैं। धार्मिक परंपराओं में पूजा के साथ-साथ श्रद्धा, स्वच्छता और मन की एकाग्रता को भी महत्व दिया जाता है।
नवरात्रि में राहुकाल के दौरान मंत्र जाप करना चाहिए या नहीं?
राहुकाल को लेकर लोगों के मन में अक्सर सवाल रहता है कि क्या इस दौरान मां दुर्गा की पूजा या मंत्र जाप किया जा सकता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में राहुकाल को सामान्य शुभ कार्यों, जैसे विवाह, गृह प्रवेश या नई शुरुआत के लिए अनुकूल समय नहीं माना जाता। हालांकि, पूजा-पाठ, मंत्र जाप, ध्यान और देवी स्तुति को लेकर अलग-अलग परंपराओं में अलग मान्यताएं मिलती हैं।
राहुकाल की अवधि सामान्यतः लगभग 90 मिनट मानी जाती है, लेकिन इसका समय प्रतिदिन बदलता रहता है। यह स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर निर्धारित किया जाता है। यदि आप नवरात्रि के दौरान राहुकाल में मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करना चाहते हैं, तो अपनी पारिवारिक या धार्मिक परंपरा के अनुसार ऐसा कर सकते हैं। इसे लेकर सभी परंपराओं में एक जैसा नियम नहीं है।
यह भी ध्यान रखें कि राहुकाल के दौरान मंत्र जाप करना अनिवार्य नहीं है। आप सुबह या शाम अपनी सुविधानुसार नियमित पूजा कर सकते हैं।
रात में निशीथ काल के दौरान मां दुर्गा की साधना का महत्व
निशीथ काल का संबंध मध्यरात्रि के आसपास की अवधि से है। कुछ धार्मिक और तांत्रिक परंपराओं में इस समय को विशेष साधना, ध्यान और मंत्र उपासना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। नवरात्रि में विशेष अनुष्ठान करने वाले साधक अपनी परंपरा और विधि के अनुसार रात्रि में देवी की उपासना करते हैं। इस दौरान मंत्र जाप, ध्यान और देवी स्तुति की जाती है।
सामान्य भक्त भी रात में सोने से पहले मां दुर्गा का ध्यान कर सकते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार देवी मंत्र या दुर्गा चालीसा का पाठ कर सकते हैं। इसके लिए मध्यरात्रि तक जागना आवश्यक नहीं है। यदि कोई साधक विशेष तांत्रिक अनुष्ठान करना चाहता है, तो उसे योग्य गुरु या संबंधित परंपरा के जानकार के मार्गदर्शन में ही करना चाहिए। निशीथ काल का सटीक समय भी स्थानीय पंचांग से देखना चाहिए।
नवरात्रि में मां दुर्गा के किन मंत्रों का जाप कर सकते हैं?
नवरात्रि में भक्त अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार मां दुर्गा के मंत्रों का जाप कर सकते हैं। सामान्य उपासना के लिए निम्न मंत्र प्रचलित हैं।
1. मां दुर्गा का नवार्ण मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
इस मंत्र का जाप देवी उपासना की अनेक परंपराओं में किया जाता है।
2. मां दुर्गा का सरल प्रार्थना मंत्र
ॐ दुं दुर्गायै नमः॥
भक्त इस मंत्र का जाप शांत मन से मां दुर्गा का ध्यान करते हुए कर सकते हैं।
3. देवी की स्तुति
नवरात्रि में दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती और सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ भी प्रचलित है। अपनी श्रद्धा, समय और परंपरा के अनुसार इनमें से किसी का पाठ किया जा सकता है। मंत्र जाप के दौरान उच्चारण, एकाग्रता और श्रद्धा का ध्यान रखें। किसी विशेष अनुष्ठान के लिए संबंधित पूजा-विधि का पालन करना उचित है।
नवरात्रि में पूजा करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना उपयोगी है।
- पूजा से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को साफ रखें और मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं।
- अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार मंत्र जाप या पाठ करें।
- पूजा के दौरान मन को शांत रखें और अनावश्यक जल्दबाजी से बचें।
- घटस्थापना या विशेष अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए मुहूर्त का पालन करें।
- यदि रात में दीपक जलाते हैं, तो आग से सुरक्षा का ध्यान रखें और दीपक को असुरक्षित स्थिति में जलता हुआ न छोड़ें।






