धर्म संवाद / डेस्क : महाराष्ट्र के नासिक और त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के बीच एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक आयोजन के साथ महाकुंभ का शंखनाद हो गया है। गोदावरी नदी के पवित्र तट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धर्म ध्वजारोहण का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। नासिक के रामकुंड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने धर्म ध्वजा फहराई। इस दौरान देश के प्रमुख संतों, शंकराचार्यों, 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।
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यह आयोजन केवल एक धार्मिक परंपरा का निर्वहन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और संत परंपरा के प्रति आस्था का प्रतीक बनकर सामने आया। धर्म ध्वजारोहण के साथ ही नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर धार्मिक उत्साह और तैयारियों ने नई गति पकड़ ली है।
रामकुंड में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया धर्म ध्वजारोहण
नासिक के ऐतिहासिक रामकुंड में आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्म ध्वजारोहण किया। वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच संपन्न हुए इस कार्यक्रम में विभिन्न वैष्णव संप्रदायों के प्रमुख संत, महंत और साधु-संत शामिल हुए।
इस अवसर पर जगद्गुरु रामानंदाचार्य, जगद्गुरु नरेंद्राचार्य, जगद्गुरु माधवाचार्य, अयोध्या की हनुमानगढ़ी के महंत ज्ञान दास सहित वैष्णव अखाड़ों के कई प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया।
रामकुंड को हिंदू धर्म में विशेष पवित्रता प्राप्त है। गोदावरी नदी के तट पर स्थित यह तीर्थ धार्मिक अनुष्ठानों, स्नान और पितृ कर्मों के लिए प्रसिद्ध है। सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान इस स्थान का महत्व और भी बढ़ जाता है।
त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने फहराई धर्म ध्वजा
दूसरी ओर, त्र्यंबकेश्वर स्थित पवित्र कुशावर्त तीर्थ में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने धर्म ध्वजारोहण किया। इस दौरान श्रृंगेरी शारदा पीठ के शंकराचार्य विधुशेखर भारती सहित विभिन्न अखाड़ों के प्रमुख संत और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
समारोह में निरंजनी अखाड़ा, महानिर्वाणी अखाड़ा, जूना अखाड़ा, बड़ा उदासीन अखाड़ा, आवाहन अखाड़ा और आनंद अखाड़ा सहित कई प्रमुख धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
जूना अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरि, महंत नरेंद्र पुरी, महंत सत्य गिरि और महंत शंकरानंद सरस्वती सहित अनेक संतों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया।
क्या है नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ का धार्मिक महत्व?
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत कलश निकला था, तब अमृत की बूंदें पृथ्वी पर चार पवित्र स्थानों पर गिरी थीं। इन्हीं चार स्थानों में नासिक भी शामिल माना जाता है। अन्य तीन प्रमुख कुंभ स्थल प्रयागराज, हरिद्वार और उज्जैन हैं।
नासिक और त्र्यंबकेश्वर में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ का संबंध देवगुरु बृहस्पति यानी गुरु ग्रह के सिंह राशि में प्रवेश से है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, गुरु के सिंह राशि में आने पर यहां सिंहस्थ कुंभ का विशेष योग बनता है।
इस दौरान गोदावरी नदी में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि महाकुंभ के पवित्र अवसर पर गोदावरी में स्नान और पूजा-अर्चना करने से पापों से मुक्ति तथा आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
धर्म ध्वजा का क्या है महत्व? जानिए केसरिया रंग से लेकर सिंह की आकृति का अर्थ
सिंहस्थ महाकुंभ में धर्म ध्वजारोहण का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। धर्म ध्वजा को सनातन परंपरा, त्याग, तपस्या, वैराग्य और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
इस महाकुंभ के लिए तैयार धर्म ध्वजा और उसके स्तंभों पर विभिन्न धार्मिक प्रतीकों को स्थान दिया गया है। इनका अपना विशेष आध्यात्मिक अर्थ है।
1. केसरिया रंग: धर्म ध्वजा का केसरिया रंग त्याग, तपस्या, वैराग्य और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक माना जाता है। यह साधु-संतों की तपस्या और सनातन परंपरा की आध्यात्मिक चेतना को दर्शाता है।
2. सूर्य और चंद्रमा की आकृतियां: सूर्य और चंद्रमा को सनातन धर्म की निरंतरता और शाश्वत परंपरा का प्रतीक माना जाता है। इनकी आकृतियां धर्म की अनंतता का संदेश देती हैं।
3. समुद्र मंथन के 14 रत्न: धर्म ध्वजा के स्तंभों पर समुद्र मंथन से जुड़े विभिन्न प्रतीकों को दर्शाया गया है। इनमें ऐरावत हाथी, कामधेनु, कौस्तुभ मणि और अमृत कलश जैसे दिव्य रत्न शामिल हैं।
4. सिंह की आकृति: सिंह को साहस, शक्ति, शौर्य और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। यह धर्म की रक्षा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का संदेश देता है।
महाकुंभ से नासिक और त्र्यंबकेश्वर की धार्मिक पहचान को मिलेगी नई ऊर्जा
नासिक और त्र्यंबकेश्वर दोनों ही हिंदू धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल हैं। सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संत, अखाड़ों के महंत, नागा साधु और करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है।
धर्म ध्वजारोहण के साथ ही इस आयोजन को लेकर धार्मिक गतिविधियों और तैयारियों का महत्व बढ़ गया है। आने वाले समय में शाही स्नान, धार्मिक शोभायात्राओं, संत समागम और विभिन्न आध्यात्मिक आयोजनों को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिलेगा।
नासिक के रामकुंड और त्र्यंबकेश्वर के कुशावर्त तीर्थ पर फहराई गई धर्म ध्वजा अब सिंहस्थ महाकुंभ की आध्यात्मिक परंपरा और सनातन आस्था का प्रमुख प्रतीक बन गई है।






