धर्म संवाद / डेस्क : सनातन धर्म में माघ मास का विशेष महत्व बताया गया है। इस पूरे महीने में पवित्र नदियों में स्नान, दान और भगवान की साधना को अत्यंत फलदायी माना गया है। साल 2026 में माघ मास की शुरुआत 4 जनवरी से हो चुकी है। शास्त्रों के अनुसार इस माह में जल में विशेष दैवीय ऊर्जा होती है, जिससे स्नान करने मात्र से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है।
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हालांकि, हर व्यक्ति प्रयागराज संगम या अन्य पवित्र नदियों तक नहीं पहुंच पाता। ऐसे में शास्त्रों में घर पर माघ स्नान करने की भी विधि बताई गई है, जिसे अपनाकर श्रद्धालु इस महापर्व का पूरा लाभ उठा सकते हैं।
माघ स्नान घर पर कैसे करें? | Magh Snan at Home Method
धर्मशास्त्रों के अनुसार यदि घर पर विधि-विधान से माघ स्नान किया जाए, तो वह तीर्थ स्नान के समान पुण्य प्रदान करता है।
घर पर माघ स्नान की विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठें और बिस्तर छोड़ने से पहले सूर्य देव और जल देवता का स्मरण करें
- स्नान के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें अवश्य मिलाएं
- यदि संभव हो तो पानी में काले तिल या कुशा डालें, यह आत्मशुद्धि में सहायक माना गया है
- स्नान करते समय मौन रहें या मन ही मन भगवान विष्णु के नाम का जप करें
- ऐसा करने से साधारण जल भी गंगाजल के समान पवित्र हो जाता है
माघ मास के जरूरी नियम और सावधानियां | Magh Month Rules
माघ मास में केवल स्नान ही नहीं, बल्कि संयमित जीवनशैली अपनाना भी अनिवार्य बताया गया है।
माघ मास के प्रमुख नियम
- स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें, पीले या सफेद वस्त्र शुभ माने जाते हैं
- पूरे महीने सात्विक भोजन करें और वाणी पर संयम रखें
- क्रोध, कटु वचन और निंदा से बचें, क्योंकि ये मन की सकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करते हैं
- दान और सेवा इस महीने के प्राण हैं—
- अन्न दान
- गरम कपड़ों का दान
- जरूरतमंदों की सहायता अवश्य करें
- पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें
- भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव का नाम जप नियमित रूप से करें
माघ मास में घर पर स्नान करने से क्या लाभ मिलते हैं?
शास्त्रों के अनुसार, विधिपूर्वक किया गया माघ स्नान—
- मानसिक शांति प्रदान करता है
- सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है
- आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाता है
- जीवन में स्थिरता और आत्मबल को मजबूत करता है
यदि श्रद्धा और नियमों के साथ घर पर स्नान किया जाए, तो यह तीर्थ स्नान के समान पुण्य देता है।
माघ मास केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और साधना का अवसर है। यदि किसी कारणवश तीर्थ पर जाना संभव न हो, तो भी घर पर माघ स्नान कर व्यक्ति इस पवित्र माह का संपूर्ण फल प्राप्त कर सकता है।
