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सनातन धर्म में 108 का महत्व: शिव, सूर्य और ज्योतिष का रहस्य

By Tami

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“The Secret of 108 From Shiva to the Universe”

धर्म संवाद / डेस्क : सनातन धर्म में 108 संख्या को अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है। पूजा-पाठ से लेकर मंत्र जाप, माला, ज्योतिष और आध्यात्म तक हर जगह 108 का विशेष महत्व दिखाई देता है। खासतौर पर भगवान शिव से इस संख्या का गहरा संबंध बताया गया है। लेकिन आखिर 108 ही क्यों? आइए जानते हैं इसके पीछे छिपा आध्यात्मिक, वैज्ञानिक और ज्योतिषीय रहस्य।

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108 संख्या में छिपा है ब्रह्मांड का रहस्य

वृंदावन स्थित अखंड दया धाम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद जी महाराज के अनुसार, 108 संख्या संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करती है।

  • अंक 1 परमपिता परमेश्वर की एकता का प्रतीक है
  • अंक 0 निर्गुण और निराकार ब्रह्म को दर्शाता है
  • अंक 8 प्रकृति के आठ तत्वों यानि कि पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, मन, बुद्धि और अहंकार का प्रतिनिधित्व करता है

इस प्रकार 108 संख्या सृष्टि, ईश्वर और प्रकृति के संतुलन को दर्शाती है।

भगवान शिव और 108 का विशेष संबंध

सनातन परंपरा में भगवान शिव से 108 संख्या का गहरा नाता माना जाता है। मान्यता के अनुसार, सृष्टि की रचना से पहले भगवान शिव बाल रूप में प्रकट हुए और रुदन करने लगे। उन्हें शांत करने के लिए ब्रह्मा जी ने अलग-अलग नामों से पुकारा। कहा जाता है कि ब्रह्मा जी ने शिव को 108 नामों से संबोधित किया, और वही नाम आगे चलकर शिव के 108 पवित्र नाम कहलाए।

इसके अलावा, भगवान शिव के तांडव नृत्य की 108 मुद्राएं, और रुद्राक्ष की माला में 108 दाने भी इस संख्या के महत्व को दर्शाते हैं।

सूर्य देव और 108 का संबंध

108 संख्या का संबंध केवल शिव से ही नहीं, बल्कि सूर्य देव से भी है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार:

  • चंद्रमा की 16 कलाएं होती हैं
  • सूर्य देव की कुल 2,16,000 कलाएं मानी जाती हैं

सूर्य छह महीने उत्तरायण और छह महीने दक्षिणायन रहते हैं। इस आधार पर एक समय की सूर्य कला 1,08,000 होती है। जब इस संख्या से अंतिम तीन शून्य हटा दिए जाते हैं, तो शेष बचता है 108। इसी कारण माला के 108 मनकों को सूर्य की 108 कलाओं का प्रतीक माना जाता है।

ज्योतिष शास्त्र में 108 का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में भी 108 संख्या को अत्यंत शुभ माना गया है।

  • 12 राशियाँ × 9 ग्रह = 108
  • 27 नक्षत्र × 4 चरण = 108

इस कारण मंत्र जाप, अनुष्ठान और ग्रह शांति के दौरान 108 बार जप करने की परंपरा प्रचलित है।

मंत्र जाप और माला में 108 क्यों?

मंत्र साधना में 108 बार जाप करने से साधक की एकाग्रता, ऊर्जा और आध्यात्मिक चेतना बढ़ती है। यही कारण है कि जप माला में 108 मनके रखे जाते हैं, जिससे साधक पूर्ण साधना कर सके।

FAQ Section

❓ सनातन धर्म में 108 संख्या क्यों पवित्र मानी जाती है?

108 संख्या ईश्वर, प्रकृति और ब्रह्मांड के संतुलन का प्रतीक मानी जाती है।

❓ भगवान शिव से 108 का क्या संबंध है?

भगवान शिव के 108 नाम, तांडव की 108 मुद्राएं और रुद्राक्ष माला इसके प्रमाण हैं।

❓ माला में 108 दाने क्यों होते हैं?

108 सूर्य की कलाओं, ग्रह-नक्षत्र और मंत्र साधना की पूर्णता को दर्शाता है।

❓ ज्योतिष में 108 का क्या महत्व है?

12 राशियाँ और 9 ग्रह मिलकर 108 बनाते हैं, इसी तरह 27 नक्षत्रों के 4 चरण भी 108 होते हैं।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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