खरनाल में बन रहा भव्य तेजाजी मंदिर, 200 करोड़ की लागत और मकराना मार्बल की खासियत

By Tami

Published on:

Kharnal Tejaji Temple

धर्म संवाद / डेस्क : राजस्थान के नागौर जिले का खरनाल लोकदेवता वीर तेजाजी महाराज की जन्मस्थली के रूप में विशेष धार्मिक महत्व रखता है। अब इसी पावन भूमि पर एक भव्य और विशाल तेजाजी मंदिर का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। मंदिर की वास्तुकला, शिल्पकारी और निर्माण तकनीक इसे सामान्य मंदिरों से अलग पहचान दे रही है।

यह भी पढ़े : गया जी की इस प्राचीन वेदी पर पिंडदान से जुड़ी है खास मान्यता, रामायण काल से है संबंध

निर्माण से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इस मंदिर पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इसके निर्माण में मुख्य रूप से विश्व प्रसिद्ध मकराना के सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया जा रहा है। मंदिर के निर्माण में पत्थरों की नक्काशी से लेकर उन्हें जोड़ने तक का काम बेहद बारीकी से किया जा रहा है।

WhatsApp channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Join Now

200 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा तेजाजी मंदिर

खरनाल में बन रहे नए तेजाजी मंदिर को भव्य स्वरूप देने की योजना है। मंदिर की तीन मंजिला मुख्य संरचना की प्रस्तावित ऊंचाई करीब 108 फीट बताई जा रही है। मंदिर में कुल 306 कलात्मक स्तंभ बनाए जाने की योजना है। निर्माण कार्य से जुड़े लोगों के अनुसार मंदिर का करीब 35 से 40 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। अब मंदिर के विशाल गुंबद और ऊपरी हिस्से के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।

मकराना के सफेद संगमरमर से तैयार हो रहा मंदिर

खरनाल के तेजाजी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसका निर्माण सामग्री भी शामिल है। मंदिर में मकराना के सफेद संगमरमर का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है। मकराना अपने उच्च गुणवत्ता वाले संगमरमर के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। मंदिर निर्माण के लिए इसी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर मार्बल खरनाल पहुंचाया जा रहा है। बताया गया है कि अब तक करीब 17 से 18 हजार घनफीट मार्बल खरनाल पहुंच चुका है। पूरे मंदिर के निर्माण में करीब एक लाख घनफीट संगमरमर इस्तेमाल होने का अनुमान है।

बिना सीमेंट के इंटरलॉकिंग तकनीक से निर्माण

इस मंदिर की निर्माण तकनीक भी काफी खास बताई जा रही है। मंदिर के मुख्य ढांचे में सीमेंट और बजरी के पारंपरिक इस्तेमाल के बजाय मार्बल के बड़े हिस्सों को तांबे और पीतल की प्लेटों के जरिए इंटरलॉकिंग तकनीक से जोड़े जाने की जानकारी दी गई है। मंदिर की नींव भी काफी गहरी और मजबूत बनाई जा रही है। निर्माण विवरण के अनुसार इसका फाउंडेशन करीब 32 फीट गहरा है। इसमें लगभग 25 फीट हिस्सा जमीन के नीचे और करीब 7 फीट हिस्सा जमीन के ऊपर बताया गया है।

306 स्तंभों पर दिखेगी शानदार नक्काशी

मंदिर में बनाए जाने वाले 306 स्तंभों को आकर्षक और कलात्मक रूप देने की योजना है। इन पर अलग-अलग तरह की नक्काशी के साथ वीर तेजाजी महाराज के जीवन से जुड़े प्रसंगों को भी उकेरा जाएगा। मकराना स्थित विशेष वर्कशॉप में बड़ी संख्या में कारीगर संगमरमर को तराशने का काम कर रहे हैं। वहीं खरनाल मंदिर परिसर में भी कारीगर पत्थरों को जोड़ने और इंटरलॉकिंग तकनीक से संरचना तैयार करने में जुटे हुए हैं।

See also  गया जी की इस प्राचीन वेदी पर पिंडदान से जुड़ी है खास मान्यता, रामायण काल से है संबंध

राम मंदिर और सोमनाथ की वास्तुकला की झलक

खरनाल में बन रहे तेजाजी मंदिर की वास्तुकला में देश के कई प्रसिद्ध मंदिरों की स्थापत्य विशेषताओं को शामिल किए जाने की योजना है। मंदिर के गर्भगृह को सोमनाथ मंदिर की शैली से प्रेरित बताया जा रहा है। वहीं शिखर में सांवरिया सेठ मंदिर जैसी भव्यता देने की योजना है। मुख्य प्रवेश द्वार की डिजाइन में अयोध्या के राम मंदिर की स्थापत्य शैली की झलक दिखाई देने की बात कही गई है। इसके अलावा मंदिर के स्तंभों पर दक्षिण भारत की द्रविड़ स्थापत्य शैली से प्रेरित नक्काशी भी देखने को मिलेगी।

मंदिर में दिखेगी वीर तेजाजी महाराज की गाथा

वीर तेजाजी राजस्थान के प्रमुख लोकदेवताओं में गिने जाते हैं। उनके जीवन से जुड़ी लोकगाथाएं राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धा के साथ सुनी और सुनाई जाती हैं। खरनाल को वीर तेजाजी महाराज की जन्मस्थली माना जाता है। ऐसे में नए मंदिर की नक्काशी में उनके जीवन और लोक आस्था से जुड़े प्रसंगों को स्थान देने की योजना है। इससे मंदिर केवल पूजा स्थल ही नहीं, बल्कि लोक संस्कृति और इतिहास को दर्शाने वाला प्रमुख केंद्र भी बन सकता है।

करीब 100 कारीगर कर रहे मार्बल पर काम

मंदिर निर्माण से जुड़ी जानकारी के अनुसार मकराना की वर्कशॉप में करीब 100 कुशल कारीगर संगमरमर को आकार देने और उस पर नक्काशी करने में जुटे हैं। इसके अलावा खरनाल में 15 से 20 कारीगर पत्थरों को जोड़ने और तांबे-पीतल की इंटरलॉकिंग का काम कर रहे हैं। मार्बल के प्रत्येक हिस्से को मंदिर की डिजाइन के अनुसार तैयार किया जा रहा है। इसके बाद उन्हें खरनाल लाकर निर्धारित स्थान पर फिट किया जा रहा है।

मकराना मार्बल की खासियत क्या है?

मकराना का संगमरमर अपनी सफेदी, मजबूती और चमक के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर निर्माण में इस्तेमाल किए जा रहे मार्बल की गुणवत्ता को लेकर निर्माण से जुड़े शिल्पियों की ओर से इसे बेहद उच्च गुणवत्ता वाला बताया गया है। निर्माण से जुड़े दावों के अनुसार, इसमें कैल्शियम की मात्रा बहुत अधिक और लौह तत्व बेहद कम है। इसी वजह से इसे लंबे समय तक सफेद और चमकदार बने रहने के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। मंदिर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पत्थर की वास्तविक गुणवत्ता हालांकि विशेषज्ञ परीक्षण और तकनीकी रिपोर्ट से ही सुनिश्चित की जा सकती है।

आस्था और वास्तुकला का नया केंद्र बनेगा खरनाल

खरनाल में निर्माणाधीन तेजाजी मंदिर पूरा होने के बाद राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अपनी अलग पहचान बना सकता है। मंदिर की विशाल संरचना, संगमरमर की नक्काशी, इंटरलॉकिंग तकनीक और देश के अलग-अलग मंदिरों से प्रेरित स्थापत्य शैली इसे खास बना रही है।

वीर तेजाजी महाराज की जन्मस्थली होने के कारण खरनाल पहले से ही श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में नए मंदिर के निर्माण से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .