Karwa Chauth 2026: इन 6 लोगों को नहीं रखना चाहिए निर्जला व्रत

By Tami

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धर्म संवाद / डेस्क : करवा चौथ का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, कई महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के दर्शन और पूजा तक निर्जला उपवास करती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाता है।

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हालांकि, करवा चौथ का व्रत रखते समय धार्मिक आस्था के साथ अपनी सेहत का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। लंबे समय तक पानी नहीं पीने और भोजन नहीं करने से शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन, कमजोरी, चक्कर और ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों के लिए निर्जला व्रत रखना स्वास्थ्य के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है।

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ऐसे में अगर आप भी करवा चौथ का व्रत रखने की तैयारी कर रही हैं, तो पहले यह जान लें कि किन लोगों को निर्जला व्रत रखने से बचना चाहिए और व्रत के दौरान सेहत का ध्यान कैसे रखा जा सकता है।

करवा चौथ का निर्जला व्रत किन लोगों को नहीं रखना चाहिए?

1. डायबिटीज के मरीज

डायबिटीज यानी मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए लंबे समय तक बिना खाए-पिए रहना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर इंसुलिन या ब्लड शुगर कम करने वाली कुछ दवाएं लेने वाले मरीजों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बहुत कम होने का खतरा बढ़ सकता है।

वहीं, कुछ परिस्थितियों में ब्लड शुगर बढ़ने और डिहाइड्रेशन की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में डायबिटीज के मरीजों को बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए। डॉक्टर से पहले ही व्रत की सुरक्षा, दवाओं और ब्लड शुगर की निगरानी के बारे में बात करना जरूरी है।

2. गर्भवती महिलाएं

गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर को पर्याप्त तरल पदार्थ और पोषण की जरूरत होती है। लंबे समय तक पानी और भोजन नहीं लेने से डिहाइड्रेशन, कमजोरी, सिरदर्द और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

खासकर जिन महिलाओं को उल्टी, लो ब्लड प्रेशर, गर्भावस्था में डायबिटीज या अन्य स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। गर्भावस्था में निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। स्वास्थ्य को जोखिम में डालकर व्रत रखना उचित नहीं है।

3. स्तनपान कराने वाली महिलाएं

बच्चे को स्तनपान कराने वाली महिलाओं के शरीर को पर्याप्त पानी और ऊर्जा की जरूरत होती है। लंबे समय तक पानी नहीं पीने और भोजन नहीं करने से प्यास, सिरदर्द, कमजोरी और थकान महसूस हो सकती है।

पर्याप्त तरल पदार्थ और पोषण नहीं मिलने पर कुछ महिलाओं में दूध बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। इसका असर महिला की सेहत और स्तनपान की दिनचर्या पर पड़ सकता है। इसलिए स्तनपान कराने वाली महिलाओं को निर्जला व्रत रखने से पहले डॉक्टर से व्यक्तिगत सलाह लेनी चाहिए।

4. किडनी और हृदय रोग से पीड़ित लोग

किडनी और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अपनी स्थिति के अनुसार खानपान, पानी और दवाओं का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। लंबे समय तक पानी नहीं पीने से शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन प्रभावित हो सकता है।

कुछ मरीजों में डिहाइड्रेशन से किडनी के कामकाज पर असर पड़ने का खतरा हो सकता है। वहीं, हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए भी बीमारी और दवाओं के अनुसार सावधानी जरूरी है।

ध्यान दें कि कुछ किडनी और हृदय रोगियों को डॉक्टर पहले से ही तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह देते हैं। ऐसे में पानी की मात्रा अपने आप बढ़ाना या घटाना भी सही नहीं है। व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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5. लो ब्लड प्रेशर और बार-बार चक्कर आने वाले लोग

जिन लोगों को पहले से लो ब्लड प्रेशर, बेहोशी, चक्कर आने या अत्यधिक कमजोरी की समस्या रहती है, उन्हें निर्जला व्रत रखते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

लंबे समय तक पानी और भोजन नहीं लेने से कुछ लोगों में कमजोरी और चक्कर की समस्या बढ़ सकती है। गर्म वातावरण, अधिक शारीरिक मेहनत और लंबे समय तक खड़े रहने से परेशानी और बढ़ सकती है। यदि आपको पहले भी उपवास के दौरान चक्कर या बेहोशी आ चुकी है, तो निर्जला व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

6. बुजुर्ग और गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग

बुजुर्गों में कभी-कभी प्यास का एहसास कम हो जाता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ सकता है। खासकर वे लोग जो मूत्रवर्धक दवाएं लेते हैं या जिन्हें पहले से कोई पुरानी बीमारी है, उन्हें उपवास के दौरान अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

इसके अलावा बुखार, उल्टी, दस्त या किसी गंभीर बीमारी से उबर रहे लोगों के लिए भी निर्जला व्रत परेशानी बढ़ा सकता है। ऐसे लोगों को अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर व्रत रखने से बचना चाहिए।

करवा चौथ के व्रत में सेहत का ध्यान कैसे रखें?

अगर आप करवा चौथ का व्रत रखने वाली हैं और आपकी सेहत इसकी अनुमति देती है, तो कुछ सावधानियां अपनाकर जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

  • सरगी में पौष्टिक भोजन करें: फल, दही, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें, ताकि शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिल सके।
  • व्रत से पहले पर्याप्त पानी पिएं: यदि आपको डॉक्टर ने पानी सीमित करने की सलाह नहीं दी है, तो व्रत शुरू होने से पहले सामान्य रूप से पर्याप्त तरल पदार्थ लें।
  • भारी मेहनत से बचें: व्रत के दौरान तेज धूप, कठिन व्यायाम और ज्यादा शारीरिक मेहनत से बचना बेहतर है।
  • शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें: बहुत ज्यादा कमजोरी, लगातार चक्कर या अस्वस्थ महसूस होने पर व्रत जारी रखने की जिद न करें।
  • दवाओं में बदलाव न करें: डायबिटीज या दूसरी पुरानी बीमारियों की दवाएं अपने आप बंद न करें और न ही उनके समय में बदलाव करें।
  • डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें: यदि आपको कोई पुरानी बीमारी है, तो व्रत रखने से पहले अपनी स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लें।

निर्जला व्रत के दौरान इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

लंबे समय तक पानी और भोजन नहीं लेने से कुछ लोगों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। यदि व्रत के दौरान निम्न लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज न करें:

  • बहुत ज्यादा कमजोरी या चक्कर आना
  • बेहोशी या भ्रम की स्थिति
  • कंपकंपी, पसीना या अचानक घबराहट
  • बहुत कम पेशाब होना या पेशाब का रंग गहरा होना
  • दिल की धड़कन तेज होना या असामान्य रूप से बेचैनी महसूस होना

यदि बेहोशी, भ्रम, गंभीर कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। जरूरत पड़ने पर व्रत तोड़ें और पानी या भोजन लेने के बारे में अपनी स्थिति के अनुसार उचित चिकित्सा सलाह लें। बेहोश व्यक्ति को मुंह से पानी या भोजन नहीं देना चाहिए।

क्या करवा चौथ पर निर्जला व्रत रखना जरूरी है?

करवा चौथ पर निर्जला व्रत रखने की परंपरा प्रचलित है, लेकिन हर व्यक्ति की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें अलग होती हैं। गर्भवती महिलाएं, डायबिटीज के मरीज, स्तनपान कराने वाली महिलाएं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए भी स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है। अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार व्रत के तरीके में बदलाव करने या निर्जला उपवास से बचने के बारे में परिवार और चिकित्सक से चर्चा की जा सकती है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .