धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में कार्तिक मास को पूजा-पाठ, दान-पुण्य और दीपदान के लिए विशेष महत्व वाला महीना माना जाता है। इस दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने के साथ तुलसी पूजन की भी खास परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में श्रद्धापूर्वक पूजा करने, दीपक जलाने और जरूरतमंदों की सहायता करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
यह भी पढ़े : Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर करें ये 9 उपाय, मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जरूर करें ये काम
कार्तिक मास में तुलसी के पौधे के सामने दीपक जलाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय हैं और उनकी पूजा करने से घर में सुख-शांति तथा समृद्धि की कामना की जाती है। यही वजह है कि इस महीने में कई श्रद्धालु प्रतिदिन तुलसी पूजन और दीपदान का नियम अपनाते हैं।
वर्ष 2026 में कार्तिक मास की शुरुआत 26 अक्टूबर से मानी जा रही है। ऐसे में भक्त महीने के पहले दिन से ही पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों की शुरुआत कर सकते हैं। आइए जानते हैं कार्तिक मास में तुलसी के सामने दीपक जलाने का महत्व, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा की विधि और इस महीने से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताएं।
कार्तिक मास में क्यों की जाती है भगवान विष्णु की पूजा?
हिंदू पंचांग में कार्तिक मास को भगवान विष्णु की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु आषाढ़ मास की देवशयनी एकादशी पर योगनिद्रा में जाते हैं और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी पर जागते हैं। देवउठनी एकादशी के साथ चातुर्मास का समापन होता है और कई परंपराओं में मांगलिक कार्यों की शुरुआत मानी जाती है।
इस महीने में श्रद्धालु भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप, दीपदान और दान-पुण्य करते हैं। कई लोग प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद पूजा करते हैं और शाम के समय घर के मंदिर में दीपक जलाते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक मास में भक्ति और सेवा भाव से किए गए कार्य पुण्यदायी होते हैं। इस दौरान भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का स्मरण करने की भी परंपरा है।
कार्तिक मास में रोज तुलसी के सामने जलाएं घी का दीपक
कार्तिक मास में तुलसी पूजन का विशेष महत्व बताया गया है। हिंदू धर्म में तुलसी को पूजनीय माना जाता है और उनका संबंध भगवान विष्णु की उपासना से जोड़ा जाता है। इसलिए इस महीने में तुलसी के पौधे की पूजा और सेवा करना शुभ माना जाता है।
आप कार्तिक मास के पहले दिन से ही रोज सुबह स्नान करने के बाद तुलसी के पौधे के सामने घी का दीपक जला सकते हैं। यदि सुबह पूजा करना संभव न हो, तो अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार शाम को भी दीपक जला सकते हैं।
दीपक जलाने के बाद तुलसी माता को प्रणाम करें और परिवार की सुख-शांति तथा कल्याण की प्रार्थना करें। पौधे के आसपास साफ-सफाई रखें और उसकी नियमित देखभाल करें।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में नियमित तुलसी पूजन और दीपदान को शुभ कार्य माना जाता है। हालांकि, पूजा के समय और विधि में क्षेत्रीय तथा पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अंतर हो सकता है।
मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की एक साथ करें पूजा
कार्तिक मास में भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं में भगवान विष्णु को पालनकर्ता और मां लक्ष्मी को धन, वैभव तथा समृद्धि की देवी माना जाता है। इस महीने में आप घर के पूजा स्थल पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जला सकते हैं। इसके बाद फूल अर्पित करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र जाप करें।
पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप किया जा सकता है:
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।
मां लक्ष्मी की आराधना के लिए आप इस मंत्र का जाप भी कर सकते हैं:
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
मंत्र जाप के बाद परिवार के सुख, शांति और कल्याण की कामना करें। धार्मिक परंपराओं में नियमित पूजा को मन की एकाग्रता और भक्ति का माध्यम माना जाता है।
कार्तिक मास में दीपदान का क्या है महत्व?
कार्तिक मास में दीपदान को विशेष पुण्यदायी माना जाता है। इस दौरान घर के मंदिर, तुलसी के पौधे और अन्य पूजा स्थलों पर दीपक जलाने की परंपरा है। कई श्रद्धालु शाम के समय भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए दीपदान करते हैं।
दीपक को धार्मिक परंपराओं में प्रकाश, शुभता और अज्ञान के अंधकार को दूर करने का प्रतीक माना जाता है। कार्तिक मास में नियमित दीपदान करना इसी आस्था से जुड़ा है।
यदि आप भी इस महीने दीपदान का नियम अपनाना चाहते हैं, तो अपनी सुविधा के अनुसार रोजाना एक दीपक जला सकते हैं। दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें और उसे जलता हुआ छोड़कर न जाएं।
कार्तिक मास में पड़ते हैं दीपावली समेत कई प्रमुख त्योहार
कार्तिक मास धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने में दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह जैसे प्रमुख पर्व आते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में पंचांग और परंपराओं के अनुसार कुछ पर्वों की तिथियों में अंतर हो सकता है।
इन त्योहारों के दौरान घरों में पूजा-पाठ, दीपदान, व्रत और दान-पुण्य किए जाते हैं। तुलसी विवाह के अवसर पर तुलसी के पौधे और भगवान शालिग्राम के विवाह की परंपरा भी कई परिवारों में प्रचलित है।
कार्तिक मास की शुरुआत से ही पूजा-पाठ का नियमित नियम अपनाने से श्रद्धालुओं को पूरे महीने अपनी धार्मिक परंपराओं से जुड़े रहने का अवसर मिलता है।
कार्तिक मास में दान-पुण्य करना भी माना जाता है शुभ
कार्तिक मास में पूजा के साथ दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में जरूरतमंदों की सहायता करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है।
आप किसी जरूरतमंद परिवार को भोजन उपलब्ध करा सकते हैं या किसी व्यक्ति की आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। दान करते समय अपनी आर्थिक स्थिति का ध्यान रखना चाहिए। सेवा और सहायता के ऐसे कार्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदना को भी बढ़ावा देते हैं।
कार्तिक मास 2026 में कब तक करें तुलसी पूजन?
कार्तिक मास में तुलसी पूजन और दीपदान को केवल एक दिन तक सीमित रखने के बजाय पूरे महीने करने की परंपरा है। श्रद्धालु कार्तिक मास के पहले दिन से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार नियमित पूजा कर सकते हैं।
सुबह स्नान के बाद तुलसी के पौधे की सेवा करें और शाम को दीपक जलाकर भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी का स्मरण करें। इसके साथ अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य और सेवा के कार्य भी कर सकते हैं।
तिथि संबंधी जरूरी जानकारी: कार्तिक मास की शुरुआत और समाप्ति की तारीख स्थानीय पंचांग तथा अपनाई जाने वाली अमांत या पूर्णिमांत परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है। प्रकाशन से पहले 26 अक्टूबर 2026 की शुरुआत और कार्तिक पूर्णिमा की तिथि को संबंधित स्थानीय पंचांग से सत्यापित कर लें।






