धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से कई व्रत किए जाते हैं। इनमें जीवित्पुत्रिका व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। इसे आम बोलचाल में जितिया या जिउतिया व्रत भी कहा जाता है। बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के कई क्षेत्रों में महिलाएं इस व्रत को श्रद्धा के साथ करती हैं।
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जितिया व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। इस पर्व से जुड़ी कई लोक और धार्मिक परंपराएं हैं, जिनमें जितिया धागा धारण करना भी प्रमुख है। मान्यता है कि पूजा के बाद धागा धारण करना संतान की मंगलकामना और सुरक्षा के संकल्प का प्रतीक है।
जितिया धागा क्या होता है?
जितिया धागा आमतौर पर लाल या पीले रंग का धागा होता है, जिसे व्रती महिलाएं पूजा के बाद धारण करती हैं। कुछ परंपराओं में इसमें एक छोटा लॉकेट या धार्मिक प्रतीक भी पिरोया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे केवल धागा नहीं, बल्कि मां के संकल्प और संतान के मंगल की कामना का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान इसे भगवान जीमूतवाहन को अर्पित करने के बाद धारण करने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है।
जितिया व्रत में धागा क्यों बांधा जाता है?
जितिया धागे को लेकर कई पारंपरिक मान्यताएं प्रचलित हैं। सबसे प्रमुख मान्यता के अनुसार, मां इस धागे को संतान की सुरक्षा और दीर्घायु की कामना के साथ धारण करती है। धागा बांधते समय व्रती महिलाएं अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य, सुख और जीवन में आने वाली परेशानियों से रक्षा की प्रार्थना करती हैं। इसी वजह से जितिया धागे को मां और संतान के बीच प्रेम, आस्था और सुरक्षा के भाव से भी जोड़ा जाता है।
भगवान जीमूतवाहन से क्या है संबंध?
जितिया व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में जीमूतवाहन को त्याग और परोपकार से जुड़ा पात्र माना गया है। जितिया पर्व से जुड़ी कथाओं में उनके द्वारा नागवंश की रक्षा किए जाने का उल्लेख मिलता है। इसी धार्मिक कथा और लोकविश्वास के कारण जीवित्पुत्रिका व्रत में भगवान जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। व्रती महिलाएं संतान की लंबी आयु और मंगल की कामना करते हुए पूजा करती हैं और इसके बाद जितिया धागा धारण करती हैं।
जितिया धागा हाथ में बांधें या गले में?
जितिया धागा कलाई या गले में धारण करने की परंपरा अलग-अलग क्षेत्रों में देखने को मिलती है। कुछ परिवारों में महिलाएं इसे कलाई में बांधती हैं, जबकि कुछ जगहों पर इसे गले में पहनने की परंपरा है। धागे में धार्मिक प्रतीक या लॉकेट पिरोने की परंपरा भी कुछ क्षेत्रों में मिलती है। इसलिए इसे धारण करने की विधि परिवार और स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।
जितिया धागे में कितनी गांठ लगाई जाती है?
कुछ लोक मान्यताओं के अनुसार, जितिया धागे में संतानों की संख्या से एक अधिक गांठ लगाने की परंपरा है। उदाहरण के लिए, यदि किसी महिला की दो संतान हैं तो धागे में तीन गांठ लगाई जा सकती हैं। हालांकि, यह नियम सभी क्षेत्रों में समान रूप से लागू नहीं होता। इसलिए गांठों की संख्या को सार्वभौमिक धार्मिक नियम मानने के बजाय स्थानीय परंपरा के रूप में देखना उचित है।
जितिया धागे का लाल और पीला रंग क्यों?
जितिया धागा सामान्यतः लाल या पीले रंग का बताया जाता है। हिंदू धार्मिक परंपराओं में दोनों रंगों का अपना विशेष महत्व है। लाल रंग को शक्ति, शुभता और मंगल का प्रतीक माना जाता है, जबकि पीला रंग धार्मिकता, पवित्रता और समृद्धि से जोड़ा जाता है। इसी वजह से इन रंगों के धागे का इस्तेमाल कई धार्मिक अनुष्ठानों में किया जाता है।
जितिया धागा कितने समय तक पहनना चाहिए?
जितिया धागा कितने समय तक धारण करना है, इसे लेकर अलग-अलग परिवारों में अलग परंपराएं हैं। कुछ महिलाएं पूजा के बाद इसे कुछ समय के लिए धारण करती हैं, जबकि कुछ लंबे समय तक इसे बांधकर रखती हैं। इसलिए 24 घंटे या एक साल तक धारण करने जैसी मान्यताओं को सार्वभौमिक नियम नहीं माना जाना चाहिए। अपने परिवार की परंपरा और स्थानीय रीति के अनुसार इसे धारण करना उचित है।
जितिया धागा उतारते समय क्या ध्यान रखें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब जितिया धागा उतारा जाए तो उसे सामान्य कूड़े में फेंकने की बजाय सम्मानपूर्वक रखने या विसर्जित करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में मिलती है। कुछ लोग इसे किसी पवित्र नदी में प्रवाहित करते हैं, जबकि कुछ लोग पेड़ के नीचे रखने की परंपरा का पालन करते हैं। हालांकि, पर्यावरण की दृष्टि से धागे या किसी भी सामग्री को जलस्रोत में प्रवाहित करने से बचना बेहतर है। स्थानीय धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए इसे स्वच्छ और सम्मानजनक तरीके से रखना अधिक उचित है।
जितिया धागा केवल परंपरा नहीं, मां के संकल्प का प्रतीक
जितिया व्रत में धागा धारण करने की परंपरा को मां के उस संकल्प से जोड़ा जाता है, जिसमें वह अपनी संतान के सुख, स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करती है।
इसलिए जितिया धागे का महत्व केवल उसके रंग या गांठों में नहीं, बल्कि उससे जुड़े श्रद्धा, मातृत्व और संतान के प्रति मंगलकामना के भाव में माना जाता है।






