धर्म संवाद / डेस्क : कड़ी मेहनत के बावजूद यदि घर में धन नहीं टिकता, बार-बार आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है या कमाई का अधिकांश हिस्सा बीमारी, कर्ज और अनचाहे खर्चों में निकल जाता है, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके पीछे नकारात्मक ऊर्जा या ग्रह दोष भी एक कारण हो सकते हैं। ऐसे में संकटमोचन हनुमान जी की आराधना को बेहद प्रभावशाली माना गया है।
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धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी को आटे और गुड़ से बना शुद्ध चूरमा अर्पित करने से जीवन की कई बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। हालांकि इस उपाय का पूरा लाभ तभी मिलता है, जब इसे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ किया जाए।
तुलसी दल के बिना अधूरा माना जाता है भोग
हनुमान जी भगवान श्रीराम के परम भक्त हैं। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि बजरंगबली को अर्पित किया जाने वाला कोई भी भोग तुलसी दल के बिना पूर्ण नहीं माना जाता। इसलिए आटे और गुड़ के चूरमे का भोग लगाते समय उसके ऊपर तुलसी का पत्ता अवश्य रखें। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे हनुमान जी प्रसन्न होते हैं और भोग स्वीकार करते हैं।
प्रदोष काल में करें पूजा
हनुमान जी की पूजा के लिए सूर्यास्त के बाद का समय यानी प्रदोष काल अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस समय की गई प्रार्थना और आराधना विशेष फलदायी होती है। पूजा के दौरान स्वच्छ वस्त्र धारण करें, हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं और श्रद्धापूर्वक चूरमे का भोग अर्पित करें।
ज्योतिष में क्या है गुड़ और आटे का महत्व?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गुड़ और गेहूं का संबंध सूर्य और मंगल ग्रह से माना जाता है। जब इन्हें शुद्ध देसी घी के साथ मिलाकर हनुमान जी को अर्पित किया जाता है, तो सूर्य और मंगल की शुभता बढ़ने की मान्यता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार इससे व्यक्ति के आत्मविश्वास, मान-सम्मान और आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
सात्विकता का रखें विशेष ध्यान
जिस दिन यह उपाय करें, उस दिन घर में सात्विक वातावरण बनाए रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्याज, लहसुन, मांसाहार और मदिरा जैसी तामसिक चीजों से दूरी बनाना शुभ माना जाता है।
मंत्र जप और हनुमान चालीसा का पाठ करें
भोग अर्पित करने के बाद कम से कम तीन बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। यदि संभव न हो तो “ॐ हं हनुमते नमः” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें। इसके बाद हनुमान जी से परिवार की सुख-समृद्धि, आर्थिक उन्नति और कर्ज मुक्ति की प्रार्थना करें।
प्रसाद का करें वितरण
पूजा पूर्ण होने के बाद चूरमे के प्रसाद को परिवार के सदस्यों में बांटें और स्वयं भी ग्रहण करें। यदि संभव हो तो प्रसाद का कुछ हिस्सा जरूरतमंद लोगों, गाय या वानरों को भी खिलाएं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में सुख-शांति तथा समृद्धि का वास बना रहता है।
(नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय विश्वासों पर आधारित है। इसकी सत्यता और प्रभाव के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।)
