धर्म संवाद / डेस्क : सितंबर 2025 का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस महीने कई प्रमुख त्योहारों के साथ एक बड़ी खगोलीय घटना घटेगी—साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण। इसे पूर्ण चंद्र ग्रहण या ब्लड मून कहा जाएगा, क्योंकि इस दौरान चंद्रमा लालिमा लिए हुए दिखाई देगा।
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चंद्र ग्रहण 2025 तिथि और समय (Chandra Grahan 2025 Date and Time)
हिंदू पंचांग और खगोल विज्ञान की गणनाओं के अनुसार:
- ग्रहण प्रारंभ: 7 सितंबर 2025, रात 10:59 बजे
- ग्रहण समाप्त: 8 सितंबर 2025, सुबह 3:23 बजे
- कुल अवधि: लगभग 3 घंटे 24 मिनट
सूतक काल कब से शुरू होगा?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्र ग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है।
- सूतक काल प्रारंभ: 7 सितंबर 2025, दोपहर 12:59 बजे
- सूतक काल समाप्त: 8 सितंबर 2025, सुबह 3:23 बजे
इस अवधि में पूजा-पाठ, शुभ कार्य और धार्मिक अनुष्ठान करना वर्जित माना जाता है। मंदिरों के द्वार भी सूतक काल की शुरुआत से ही बंद कर दिए जाएंगे।
भारत में दिखाई देगा या नहीं?
हाँ, यह चंद्र ग्रहण भारत में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। इसलिए इसका सूतक काल भारत में मान्य होगा। इसके अलावा यह खगोलीय घटना एशिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के कुछ हिस्सों, फिजी द्वीप समूह और अंटार्कटिका में भी देखी जाएगी।
चंद्र ग्रहण और सूतक काल में क्या न करें?
ग्रहण और सूतक काल के दौरान परंपरागत रूप से कुछ कार्य निषिद्ध माने जाते हैं:
- मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और पूजा-अर्चना नहीं की जाती।
- गर्भवती महिलाओं को बाहर निकलने, सब्जी काटने और नुकीले औजारों का प्रयोग करने से बचना चाहिए।
- बच्चों और बुजुर्गों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
- खाना पकाने और भोजन ग्रहण करने से परहेज किया जाता है।
चंद्र ग्रहण और पितृपक्ष
यह चंद्र ग्रहण भाद्रपद पूर्णिमा को लगेगा। इसी दिन से पितृपक्ष की शुरुआत होती है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन पूर्णिमा श्राद्ध कर्म सूतक काल शुरू होने से पहले ही कर लेना चाहिए। चंद्र ग्रहण 2025 धार्मिक और खगोलीय दोनों दृष्टि से बेहद खास रहेगा। यह न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। इस दौरान सूतक काल का पालन करना और धार्मिक नियमों का ध्यान रखना जरूरी है।
