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Chaiti Chhath 2026: खरना के साथ शुरू हुआ 36 घंटे का निर्जला व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व

By Tami

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Chaiti Chhath 2026 खरना के साथ शुरू हुआ 36 घंटे का निर्जला व्रत, जानें पूजा विधि और महत्व

धर्म संवाद / डेस्क : चैत्र महीने में मनाया जाने वाला आस्था का महापर्व चैती छठ 2026 पूरे श्रद्धा और नियमों के साथ शुरू हो चुका है। 23 मार्च को इस चार दिवसीय पर्व का दूसरा दिन ‘खरना’ मनाया जा रहा है, जो छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जाता है।

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खरना से शुरू होता है कठिन व्रत

खरना के दिन व्रती पूरे दिन उपवास रखती हैं और शाम को विधि-विधान से पूजा करने के बाद गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करती हैं। इसके बाद ही 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है, जिसमें व्रती न अन्न ग्रहण करती हैं और न ही जल पीती हैं।

Chaiti Chhath 2026 क्या है खरना पूजा की विधि?
  • सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है
  • पूरे दिन उपवास रखा जाता है
  • शाम को सूर्यास्त के बाद छठी मैया की पूजा होती है
  • गुड़ की खीर, रोटी और फल का भोग लगाया जाता है
  • प्रसाद ग्रहण करने के बाद निर्जला व्रत शुरू होता है
36 घंटे का निर्जला व्रत क्यों है खास?

छठ पूजा में रखा जाने वाला यह व्रत बेहद कठिन माना जाता है। इसमें व्रती पूरी तरह से जल और भोजन का त्याग कर देती हैं। यह व्रत शरीर और मन की शुद्धि, अनुशासन और गहरी आस्था का प्रतीक है।

छठ पूजा का धार्मिक महत्व

छठ पर्व सूर्य देव और छठी मैया को समर्पित है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से:

  • परिवार में सुख-समृद्धि आती है
  • संतान सुख की प्राप्ति होती है
  • स्वास्थ्य और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है
आगे के प्रमुख अनुष्ठान
  • तीसरा दिन: डूबते सूर्य को अर्घ्य (संध्या अर्घ्य)
  • चौथा दिन: उगते सूर्य को अर्घ्य (उषा अर्घ्य)
  • इसके बाद व्रत का पारण किया जाता है

चैती छठ सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था, संयम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। खरना से शुरू होकर 36 घंटे का निर्जला व्रत इस पर्व को और भी विशेष बनाता है, जो भक्तों की अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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