धर्म सम्वा / डेस्क : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। झारखंड के चतरा जिले में स्थित भोजेश्वर महादेव मंदिर भी सावन के दौरान आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर भोजिया गांव की पहाड़ी पर स्थित यह प्राचीन मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं, ऐतिहासिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करता है।
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मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 120 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। पहाड़ी की चोटी पर विराजमान बाबा भोलेनाथ के दर्शन के बाद भक्त जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
स्वप्न में मिले शिवलिंग से जुड़ी है मंदिर की स्थापना
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, भोजेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना वर्ष 1903 में हुई थी। ग्रामीणों के अनुसार, उसी वर्ष गांव के भीखन सिंह को स्वप्न में भगवान शिव के दर्शन हुए। स्वप्न में उन्हें खरीक गांव के सुग्गिया आहार में एक प्राचीन शिवलिंग होने का संकेत मिला। अगले दिन ग्रामीण गाजे-बाजे के साथ वहां पहुंचे और बताए गए स्थान से शिवलिंग प्राप्त कर उसे भोजिया गांव की पहाड़ी पर पूरे विधि-विधान के साथ स्थापित किया। तब से यह स्थान भगवान शिव के भक्तों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है।
कई चरणों में हुआ मंदिर का विकास
ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर का वर्तमान स्वरूप कई वर्षों की मेहनत का परिणाम है।
- 1903 में शिवलिंग की स्थापना हुई।
- 1964 में यदुनंदन सिंह, विशुन सिंह और अन्य ग्रामीणों के सहयोग से चार पाया वाला मंदिर बनाया गया।
- 1990 में मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया।
- 2003 में मंदिर में विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई।
आज यह मंदिर क्षेत्र के प्रमुख शिवधामों में गिना जाता है।
बाबा भोजेश्वर महादेव के दरबार में पूरी होती है हर मनोकामना
स्थानीय लोगों का विश्वास है कि बाबा भोजेश्वर महादेव के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं। इसी आस्था के कारण आसपास के गांवों के लोग विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत से पहले यहां आकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है।
आज भी रहस्य बना हुआ है प्राचीन शिवलिंग
भोजेश्वर महादेव मंदिर की सबसे रोचक बात यह है कि वर्ष 1903 से पहले सुग्गिया आहार में यह प्राचीन शिवलिंग कैसे पहुंचा, इसकी कोई प्रमाणिक जानकारी आज तक उपलब्ध नहीं है। ग्रामीण इसे अत्यंत प्राचीन शिवलिंग मानते हैं और इससे जुड़ी अनेक लोककथाएं तथा धार्मिक मान्यताएं आज भी प्रचलित हैं। यही रहस्य इस मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता को और बढ़ा देता है।
सावन में लगता है भक्तों का विशाल मेला
सावन का महीना शुरू होते ही भोजेश्वर महादेव मंदिर का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। चतरा ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों और दूर-दराज के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। भक्त 120 सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक तथा विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
पूरे सावन माह मंदिर परिसर “हर-हर महादेव” और “बोल बम” के जयघोष से गूंजता रहता है, जिससे यहां का आध्यात्मिक वातावरण और भी दिव्य हो जाता है।
धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक
भोजेश्वर महादेव मंदिर केवल एक प्राचीन शिवालय नहीं, बल्कि चतरा की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। स्वप्न में मिले शिवलिंग की कथा, पहाड़ी पर स्थित मंदिर, वर्षों पुरानी परंपराएं और सावन में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ इस स्थान को झारखंड के प्रमुख शिवधामों में विशेष पहचान दिलाती है।
यदि आप सावन के दौरान भगवान शिव के किसी प्राचीन और चमत्कारिक मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं, तो भोजेश्वर महादेव मंदिर आपकी यात्रा सूची में अवश्य होना चाहिए।






