अयोध्या के अतिरिक्त इन जगहों पे भी है राम मंदिर

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राम मंदिर Ram Mandir

धर्म संवाद / डेस्क : 500 सालों के इंतज़ार के बाद अयोध्या में राम मंदिर का उद्घाटन हुआ और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की गयी। इसके साथ ही राम मंदिर(Ram Mandir) के दरवाज़े भी आम लोगो के लिए खुल गए। पर सिर्फ अयोध्या ही नहीं और भी ऐसे कई जगह हैं जहाँ भव्य राम मंदिर मौजूद है। चलिए उनके बारे में जानते हैं।

रामपुरम राम मंदिर, तमिलनाडु

रामपुरम राम मंदिर, तमिलनाडु

भारत में सबसे प्रमुख राम मंदिरों में से एक, रामपुरम में स्थित यह मंदिर राम भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है। आमतौर पर विभिन्न राम मंदिरों में हमें राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां देखने को मिलती हैं, किंतु यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां आपको श्री राम, सीता और लक्ष्मण के साथ भरत और शत्रुघ्न की मूर्तियां भी देखने को मिलेंगी। 

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भद्राचलम राम मंदिर, आंध्र प्रदेश

भद्राचलम राम मंदिर, आंध्र प्रदेश

यहां का राम मंदिर भी एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जो आंध्र प्रदेश के भद्राचलम नामक स्थान पर स्थित है। भद्राचलम के मंदिर में राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियों के बारे में मान्यता है कि ये स्वयं प्रकट हुई थीं। माना जाता है कि पोकल्ला दम्मक्का नाम की एक महिला को स्वयं भगवान श्रीराम ने स्वप्न में भद्रागिरि पहाडि़यों पर विग्रह के अस्तित्व के बारे में बताया था। जब पोकल्ला ने वहां जाकर इसकी पुष्टि करने का प्रयास किया तो वहां विग्रह को देखकर सुखद आश्चर्य से भर गई। इसके बाद उस जगह की साफ-सफाई करके वहां राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां स्थापित कीं। 

कोदंडा राम मंदिर, कर्नाटक

कोदंडा राम मंदिर, कर्नाटक

कर्नाटक के चिक्कमगलुरु जिले के पास हिरेमगलूर में स्थित, कोडंडारामस्वामी मंदिर स्कंद पुराण की एक अनोखी घटना से जुड़ा है। पाठ के अनुसार, भगवान राम, देवी सीता के साथ अपनी मूल विवाह मुद्रा में परशुराम को यहीं दर्शन दिए थे। मंदिर में अच्छी तरह से गढ़ी गई कलिंगमर्दन, सुग्रीव, योगनरसिम्हा, माधवाचार्य, रामानुजाचार्य, अलवर, वेदांत देसिकों की सुंदर मूर्तियाँ भी हैं। भारत के 1200 राम मंदिरों में से यह एकमात्र मंदिर है जहां भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां बाईं ओर झुकी हुई हैं ।

त्रिप्रयार श्री राम मंदिर, केरल

त्रिप्रयार श्री राम मंदिर, केरल

केरल के त्रिशूर जिले के त्रिप्रयार में त्रिप्रयार श्री रामास्वामी मंदिर में कृष्ण द्वारा पूजित एक मूर्ति है। यह मंदिर राजा दशरथ के पुत्रों को समर्पित नालंबलम के चार मंदिरों में से पहला है। माना जाता है कि इस मंदिर में स्थापित मूर्ति यहां के स्थानीय मुखिया को समुद्र तट पर मिली थी।  इस मूर्ति में भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव के तत्व हैं अत: इसकी पूजा त्रिमूर्ति के रूप में की जाती है।

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राम तीरथ मंदिर, पंजाब

राम तीरथ मंदिर, पंजाब


पंजाब के अमृतसर में स्थित, राम तीरथ मंदिर भगवान राम और सीता के पुत्र लव और कुश के जन्म से जुड़ा है। यहाँ के प्राचीन कुएं के बारे में माना जाता है कि इसमें रोग उपचार करने की शक्तियां हैं।यह वह स्थान भी है जहां ऋषि वाल्मिकी ने लंका विजय के बाद देवी सीता को आश्रय दिया था।

कालाराम मंदिर, महाराष्ट्र

कालाराम मंदिर, महाराष्ट्र

महाराष्ट्र  राज्य के नासिक में कालाराम मंदिर है। हाल ही में पीएम मोदी यहां दर्शन के लिए गए थे। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यह देश का एकमात्र मंदिर है जहां भगवान राम की काले रंग की मूर्ति विराजमान है। इस मूर्ति के बारे में ऐसा कहा जाता है कि भगवान राम की यह काले रंग की मूर्ति गोदावरी नदी में मिली थी।  

राम राजा मंदिर , ओरछा, मध्य प्रदेश

राम राजा मंदिर , ओरछा, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के ओरछा में राम राजा मंदिर, एकमात्र मंदिर के रूप में विशिष्ट है जहां भगवान राम को राजा के रूप में पूजा जाता है।  प्रतिदिन गार्ड ऑफ ऑनर आयोजित किया जाता है, जो राजघराने के अनुष्ठानों से मिलता जुलता है। इस मंदिर में भगवान राम की मूर्ति को पद्मासन में बैठे हुए तलवार और ढाल पकड़े हुए चित्रित किया गया है। साढ़े चार सौ वर्ष से यहाँ राजा राम की सत्ता कायम है।  आस्था ऐसी है कि शादी हो या कोई और मांगलिक कार्यक्रम, पहला निमंत्रण रामराजा सरकार को जाता है। नववधू का गृहप्रवेश भी सरकार के दर्शन से पहले नहीं होता। सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए मंदिर में छापे-हल्दी लगे हाथ की छाप- लगाते हैं। हर साल निमंत्रण पत्र के यहां लगने वाले ढेर और हल्दी के रंग से चटक हुई दीवार यहां की गौरवशाली परंपरा की निशानी है।

एरी-कथा रामर मंदिर, तमिलनाडु

एरी-कथा रामर मंदिर, तमिलनाडु

तमिलनाडु के मदुरन्थाकम में स्थित, एरी-कथा रामर मंदिर के बारे में माना जाता है कि रावण को हराने के बाद, भगवान राम, सीता और लक्ष्मण के साथ, पुष्पक विमानम पर अयोध्या वापस जाते समय मधुरांथाकम में रुके थे। इस मंदिर के मुख्य देवता राम, सीता और लक्ष्मण हैं। गर्भगृह के चारों तरफ अलग-अलग मंदिर हैं। इनमें से एक सीता का मंदिर है, जिनको जनकवल्ली के तौर पर पूजा जाता है।

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