धर्म संवाद / डेस्क : गणेश चतुर्थी के साथ शुरू होने वाले 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा करने के बाद भगवान गणेश की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं। इसे गणेश विसर्जन कहा जाता है।
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धार्मिक मान्यता है कि गणपति बप्पा को विदाई देते समय भक्त उनसे अपने सभी संकट और परेशानियां दूर करने की प्रार्थना करते हैं। माना जाता है कि गणेश जी भक्तों को सुख, समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद देते हैं।
उज्जैन के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, गणेश विसर्जन के बाद कुछ वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है और कुंडली में अशुभ ग्रहों के प्रभाव को कम करने की कामना की जाती है।
अनंत चतुर्दशी 2026 कब है?
वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर 2026 को रात 11:18 बजे शुरू होगी और 25 सितंबर 2026 को रात 11:06 बजे समाप्त होगी।
उदयातिथि के आधार पर अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसी दिन गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन की परंपरा भी है।
गणेश विसर्जन के बाद किन चीजों का दान करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के बाद जरूरतमंदों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं किन वस्तुओं का दान किया जा सकता है।
1. हरी वस्तुएं, फल और पान का दान
अनंत चतुर्दशी के दिन हरी सब्जियां, हरे फल और पान के पत्ते दान करने की परंपरा बताई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार हरे रंग की वस्तुओं का संबंध बुध ग्रह से माना जाता है। ऐसा दान करने से भगवान गणेश की कृपा मिलने और कुंडली में बुध ग्रह से जुड़े अशुभ प्रभावों में कमी आने की कामना की जाती है।
2. चावल, मूंग दाल और तेल का दान
अगर कोई व्यक्ति आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है तो गणेश विसर्जन के बाद चावल, मूंग की दाल या तेल का दान कर सकता है। आप चाहें तो इन सामग्रियों से खिचड़ी बनाकर जरूरतमंद लोगों को भोजन भी करा सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार अन्नदान को पुण्यदायी माना गया है और इससे जीवन की परेशानियां दूर होने तथा रुके हुए कार्य पूरे होने की कामना की जाती है।
3. आटा, चीनी और नमक का दान
अनंत चतुर्दशी के दिन आटा, चीनी और नमक जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इन वस्तुओं के दान को शुक्र ग्रह से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इससे शुक्र से संबंधित अशुभ प्रभावों को कम करने और जीवन में सुख-सुविधाओं की वृद्धि की कामना की जा सकती है। जरूरतमंद परिवार को राशन सामग्री देना इस दान का व्यावहारिक और उपयोगी तरीका हो सकता है।
4. बेसन, चना दाल और पीले फलों का दान
गणेश विसर्जन के बाद बेसन, चने की दाल, केला या पपीता दान करने की भी धार्मिक मान्यता है। मान्यता के अनुसार पीले रंग की वस्तुओं का संबंध गुरु ग्रह से माना जाता है। इन वस्तुओं का दान करने से भगवान गणेश की कृपा मिलने और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना की जाती है। जरूरतमंद व्यक्ति या परिवार को खाद्य सामग्री दान करना विशेष रूप से पुण्यकारी माना जाता है।
दान करते समय इन बातों का रखें ध्यान
दान हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से दान का उद्देश्य जरूरतमंद की सहायता करना और सेवा भाव रखना माना जाता है। गणेश विसर्जन के बाद दान करते समय दिखावे से बचें और संभव हो तो ऐसी वस्तुएं दान करें जिनका जरूरतमंद व्यक्ति वास्तव में उपयोग कर सके। अन्न, राशन और फल जैसी चीजों का दान इसी दृष्टि से उपयोगी माना जा सकता है।
गणेश विसर्जन के बाद दान का क्या महत्व है?
हिंदू धर्म में दान और सेवा को महत्वपूर्ण धार्मिक कर्म माना गया है। गणेशोत्सव के समापन पर भगवान गणेश को विदाई देने के बाद जरूरतमंदों की सहायता करना सेवा और परोपकार की भावना से जुड़ा है।
ज्योतिषीय मान्यताओं में अलग-अलग वस्तुओं के दान को विभिन्न ग्रहों से जोड़ा जाता है। हालांकि, इन उपायों को धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता के रूप में ही समझना चाहिए। ग्रहों के प्रभाव या आर्थिक समस्याओं के समाधान की कोई वैज्ञानिक गारंटी इन उपायों से नहीं होती।






