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आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन: भोग आरती

By Tami

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धर्म संवाद / डेस्क : भोग आरती वह आराधना है, जिसमें भक्त अपने परिश्रम से बने भोजन को भगवान को अर्पित करता है। मान्यता है कि जब तक भोग नहीं लगता, तब तक भोजन को प्रसाद नहीं माना जाता। भोग अर्पण के साथ की गई आरती मन को शुद्ध करती है और अहंकार का क्षय करती है। इस आरती के शब्दों में विनय और अपनापन झलकता है। भक्त प्रभु से आग्रह करता है कि वे स्नेहपूर्वक अर्पित भोग स्वीकार करें। दूध, दही, माखन, मिश्री, फल और मेवे ये सभी श्रीकृष्ण की प्रिय वस्तुएँ मानी जाती हैं। आरती का मूल भाव यह है कि प्रेम से दिया गया अर्पण ही सच्चा भोग है।

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आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…
दुर्योधन को मेवा त्यागो,
साग विदुर घर खायो प्यारे मोहन,
आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…

भिलनी के बैर सुदामा के तंडुल
रूचि रूचि भोग लगाओ प्यारे मोहन…
आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…

वृदावन की कुञ्ज गली मे,
आओं रास रचाओ मेरे मोहन,
आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…

राधा और मीरा भी बोले,
मन मंदिर में आओ मेरे मोहन,
आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…

गिरी, छुआरा, किशमिश मेवा,
माखन मिश्री खाओ मेरे मोहन,
आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…

सत युग त्रेता दवापर कलयुग,
हर युग दरस दिखाओ मेरे मोहन,
आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…

जो कोई तुम्हारा भोग लगावे
सुख संपति घर आवे प्यारे मोहन,
आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…

ऐसा भोग लगाओ प्यारे मोहन
सब अमृत हो जाये प्यारे मोहन,
आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…

जो कोई ऐसा भोग को खावे
सो त्यारा हो जाये प्यारे मोहन,
आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…

आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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