धर्म संवाद / डेस्क : मन तड़पत हरि दर्शन को आज हिंदी सिनेमा का एक ऐसा लोकप्रिय भजन है, जो आज भी भगवान श्रीहरि के भक्तों के मन में विशेष स्थान रखता है। इस भजन में एक भक्त की अपने आराध्य के दर्शन पाने की गहरी इच्छा, मन की व्याकुलता और पूर्ण समर्पण की भावना दिखाई देती है। इसके मधुर बोल सुनने वाले को भक्ति और आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराते हैं।
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इस भजन की सबसे खास बात यह है कि इसमें भक्त भगवान से अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए उनके दर्शन की विनती करता है। वह कहता है कि प्रभु के बिना उसके सभी काम अधूरे हैं और अब उसे केवल भगवान के दर्शन की आस है।
मन तड़पत हरि दर्शन को आज भजन के बोल
मन तड़पत हरि दर्शन को आज भजन के बोल भक्त और भगवान के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण के भाव को खूबसूरती से व्यक्त करते हैं। यहां पढ़ें इस भजन के बोल:
मन तड़पत हरि दर्शन को आज
मोरे तुम बिन बिगड़े सकल काज
विनती करत हूं रखियो लाज
मन तड़पत हरि दर्शन को आज
मन तड़पत हरि…
तुम्हरे द्वार का मैं हूं जोगी
हमरी ओर नजर कब होगी
सुनो मोरे व्याकुल मन की बात
मन तड़पत हरि दर्शन को आज
मन तड़पत हरि…
बिन गुरु ज्ञान कहां से पाऊं
दीजो दान हरी गुन गाऊं
सब गुनी जन पे तुम्हारा राज
मन तड़पत हरि दर्शन को आज
मन तड़पत हरि…
मुरली मनोहर आस न तोड़ो
दुख भंजन मोरा साथ न छोड़ो
मोहे दर्शन भिक्षा दे दो आज, दे दो आज
मन तड़पत हरि दर्शन को आज
मन तड़पत हरि दर्शन को आज
मोरे तुम बिन बिगड़े सकल काज
विनती करत हूं रखियो लाज
मन तड़पत हरि…
मन तड़पत हरि दर्शन को आज भजन का अर्थ
इस भजन में भक्त भगवान श्रीहरि से उनके दर्शन की प्रार्थना करता है। वह कहता है कि प्रभु के बिना जीवन के सभी कार्य अधूरे हैं। भक्त भगवान से अपनी लाज रखने और उसकी विनती सुनने की गुहार लगाता है।
‘तुम्हरे द्वार का मैं हूं जोगी’ पंक्ति में भक्त स्वयं को भगवान के द्वार पर खड़ा एक साधक बताता है। वह अपने आराध्य की कृपा भरी नजर का इंतजार कर रहा है।
वहीं, ‘बिन गुरु ज्ञान कहां से पाऊं’ पंक्ति गुरु के महत्व को दर्शाती है। भक्त मानता है कि गुरु के मार्गदर्शन के बिना ईश्वर की सच्ची भक्ति और ज्ञान प्राप्त करना कठिन है।
भजन की अंतिम पंक्तियों में भक्त भगवान श्रीकृष्ण को मुरली मनोहर और दुख भंजन कहकर पुकारता है। वह उनसे अपनी आस न तोड़ने और दर्शन देने की विनती करता है।






