250 साल पुरानी परंपरा, यहां बेड़ियों से बांधकर रखी जाती है मां दुर्गा की प्रतिमा

By Tami

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धर्म संवाद / डेस्क : पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के मेजिया इलाके में दुर्गा पूजा की एक अनोखी परंपरा आज भी निभाई जाती है। यहां पाल परिवार की दुर्गा पूजा में मां दुर्गा की प्रतिमा को लोहे की बेड़ियों से बांधकर रखा जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, करीब 250 साल से चली आ रही इस परंपरा के पीछे देवी की चंचलता से जुड़ी एक रोचक कहानी है।

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मेजिया की पालबाड़ी दुर्गा पूजा की अनोखी परंपरा

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का विशेष महत्व है। यहां कई ऐसे पुराने पूजा आयोजन हैं, जिनकी परंपराएं उन्हें दूसरों से अलग बनाती हैं। बांकुड़ा जिले के मेजिया इलाके में स्थित पालबाड़ी की दुर्गा पूजा भी ऐसी ही एक अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है।

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यहां मां दुर्गा की प्रतिमा को मंदिर की दीवार में लगी लोहे की बेड़ियों से बांधकर रखा जाता है। स्थानीय मान्यता है कि देवी बेहद चंचल हैं और अगर उनकी बेड़ियां खोल दी जाएं, तो वह अपने आसन से कहीं चली जा सकती हैं। इसी मान्यता के कारण पूजा के दौरान प्रतिमा को बेड़ियों से बांधकर रखने की परंपरा आज भी जारी है।

कैसे शुरू हुई मां दुर्गा को बेड़ियों से बांधने की परंपरा?

पाल परिवार के सदस्य आशीष कुमार पाल के अनुसार, उन्होंने बचपन में परिवार के बुजुर्गों से इस परंपरा से जुड़ी एक कहानी सुनी थी। मान्यता है कि अष्टमी के दिन पूजा के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमा अचानक हिलने लगी थी। उस समय परिवार के लोगों ने प्रतिमा को संभाला था।

इसके बाद देवी की प्रतिमा को बेड़ियों से बांधकर रखने की परंपरा शुरू हुई। तभी से पाल परिवार पूजा के दौरान इस विशेष रीति का पालन करता आ रहा है। हालांकि, यह घटना परिवार में प्रचलित मान्यता और पीढ़ियों से चली आ रही मौखिक परंपरा का हिस्सा है।

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कभी भव्य आयोजन के लिए मशहूर थी पालबाड़ी की दुर्गा पूजा

पाल परिवार की दुर्गा पूजा कभी अपनी भव्यता और उत्सव के माहौल के लिए जानी जाती थी। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी रहने के दौरान पूजा कई दिनों तक धूमधाम से मनाई जाती थी। इस अवसर पर रिश्तेदारों, परिचितों और स्थानीय लोगों की बड़ी संख्या में भागीदारी होती थी।

समय के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति में बदलाव आया और पूजा का आयोजन पहले जितना भव्य नहीं रहा। इसके बावजूद परिवार ने अपनी पुरानी परंपराओं को बनाए रखने की कोशिश जारी रखी है। आज भी दुर्गा पूजा के दौरान बेड़ियों से बंधी मां दुर्गा की प्रतिमा श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी रहती है।

हुगली के सप्तग्राम से जुड़ा है पाल परिवार का इतिहास

पाल परिवार की जड़ें पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के प्राचीन सप्तग्राम क्षेत्र से जुड़ी बताई जाती हैं। परिवार की मान्यता के अनुसार, बर्गी हमलों के दौर में सुरक्षा की तलाश में उनके पूर्वजों ने मेजिया का रुख किया था। बाद में परिवार यहीं बस गया और समय के साथ पालबाड़ी की दुर्गा पूजा की परंपरा स्थापित हुई।

250 साल से कायम है अनोखी दुर्गा पूजा की पहचान

मेजिया की पालबाड़ी दुर्गा पूजा अपनी विशिष्ट परंपरा के कारण अलग पहचान रखती है। मां दुर्गा की प्रतिमा को लोहे की बेड़ियों से बांधकर रखने की प्रथा आज भी परिवार की धार्मिक मान्यताओं और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।

दुर्गा पूजा के दौरान यहां की यह अनोखी परंपरा लोगों को आकर्षित करती है और पुरानी पीढ़ियों से चली आ रही लोककथाओं को जीवित रखती है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .