पितृ पक्ष में श्राद्ध तिथि कैसे पता करें? मृत्यु की तारीख से ऐसे जानें तिथि

By Tami

Published on:

Shraddha Tithi

धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना गया है। इस अवधि में परिवार के दिवंगत सदस्यों की आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान जैसे कर्म किए जाते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, पितृ पक्ष के दौरान उसी तिथि पर उसका श्राद्ध किया जाता है।

यह भी पढ़े : पितृ पक्ष 2026: शुरू होने से पहले कर लें ये जरूरी काम, जानें श्राद्ध के दौरान क्या करें और क्या नहीं

लेकिन कई परिवारों में ऐसी स्थिति होती है कि किसी सदस्य की मृत्यु की अंग्रेजी तारीख तो पता होती है, लेकिन उस दिन हिंदू पंचांग के अनुसार कौन सी तिथि थी, इसकी जानकारी नहीं होती। ऐसे में लोग असमंजस में पड़ जाते हैं कि पितृ पक्ष में उनका श्राद्ध किस दिन किया जाए।

WhatsApp channel Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Join Now

अगर आपके साथ भी ऐसा है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। पंचांग की मदद से मृत्यु की अंग्रेजी तारीख के आधार पर उस दिन की हिंदू तिथि का पता लगाया जा सकता है।

श्राद्ध की तिथि कैसे पता करें?

मृत व्यक्ति की श्राद्ध तिथि जानने का सबसे आसान तरीका पंचांग है। इसके लिए आप किसी पुराने वर्ष का पंचांग देख सकते हैं या किसी विश्वसनीय ऑनलाइन पंचांग की सहायता ले सकते हैं। मान लीजिए किसी व्यक्ति के पिता का निधन 1 अगस्त 1998 को हुआ था। परिवार को मृत्यु की तारीख तो पता है, लेकिन यह जानकारी नहीं है कि उस दिन हिंदू पंचांग के अनुसार कौन सी तिथि थी।

ऐसी स्थिति में पंचांग में 1 अगस्त 1998 की तारीख देखें। उस दिन के पंचांग में संबंधित माह, पक्ष और तिथि की जानकारी मिल जाएगी। उदाहरण के तौर पर, यदि उस दिन पंचांग में अष्टमी तिथि बताई गई है और सूर्योदय के समय अष्टमी विद्यमान थी, तो उस व्यक्ति की मृत्यु तिथि को अष्टमी माना जाएगा। इसके आधार पर पितृ पक्ष में अष्टमी तिथि के दिन उनका श्राद्ध किया जा सकता है।

हालांकि, वास्तविक श्राद्ध तिथि तय करते समय मृत्यु का सही स्थानीय समय, स्थान और उस दिन के सूर्योदय के अनुसार पंचांग की गणना देखना बेहतर होता है।

हिंदू तिथि और अंग्रेजी तारीख में क्या अंतर है?

अंग्रेजी कैलेंडर में सामान्य तौर पर रात 12 बजे के बाद तारीख बदल जाती है। लेकिन हिंदू पंचांग की तिथि इस तरह 24 घंटे की निश्चित अवधि में नहीं चलती। एक तिथि कभी 24 घंटे से कम तो कभी उससे अधिक समय तक रह सकती है। इसी वजह से केवल अंग्रेजी तारीख देखकर श्राद्ध की तिथि तय करना सही नहीं होता।

श्राद्ध के लिए संबंधित दिन की पंचांग तिथि देखना जरूरी माना जाता है। विशेष रूप से यह देखना महत्वपूर्ण होता है कि उस दिन सूर्योदय के समय कौन सी तिथि चल रही थी। इसी आधार पर मृत्यु की अंग्रेजी तारीख से संबंधित हिंदू तिथि का पता लगाया जा सकता है।

उदाहरण से समझें श्राद्ध तिथि का नियम

मान लीजिए किसी व्यक्ति की मृत्यु 1 अगस्त 1998 को हुई। अब उस तारीख को पंचांग में देखने पर पता चलता है कि सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि चल रही थी। ऐसे में मृत्यु की तिथि अष्टमी मानी जाएगी। पितृ पक्ष में जब कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि आएगी, तब उस व्यक्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान आदि कर्म करने की परंपरा है। इसी तरह यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु पंचमी, सप्तमी, दशमी या किसी अन्य तिथि को हुई थी, तो पितृ पक्ष में उसी तिथि के दिन उसका श्राद्ध किया जाता है।

See also  पितृ पक्ष में क्या नहीं खरीदना चाहिए? जानें 6 चीजों की मान्यता

पितृ पक्ष में किस दिन करें श्राद्ध?

पितृ पक्ष में प्रतिपदा से लेकर अमावस्या तक अलग-अलग तिथियों पर श्राद्ध करने की परंपरा है। परिवार में जिस व्यक्ति की मृत्यु जिस हिंदू तिथि को हुई थी, सामान्यतः उसी तिथि पर पितृ पक्ष में उसका श्राद्ध किया जाता है।

उदाहरण के लिए:

  • मृत्यु तिथि प्रतिपदा थी तो प्रतिपदा श्राद्ध
  • मृत्यु तिथि द्वितीया थी तो द्वितीया श्राद्ध
  • मृत्यु तिथि पंचमी थी तो पंचमी श्राद्ध
  • मृत्यु तिथि अष्टमी थी तो अष्टमी श्राद्ध
  • मृत्यु तिथि दशमी थी तो दशमी श्राद्ध
  • मृत्यु तिथि एकादशी थी तो एकादशी श्राद्ध
  • मृत्यु तिथि द्वादशी थी तो द्वादशी श्राद्ध
  • मृत्यु तिथि अमावस्या थी तो अमावस्या श्राद्ध

इस तरह मृत्यु की तिथि के आधार पर पितृ पक्ष में श्राद्ध का दिन निर्धारित किया जाता है।

अगर मृत्यु की तारीख ही पता नहीं हो तो क्या करें?

कई बार परिवार को अपने पूर्वज की मृत्यु की सही तारीख तक मालूम नहीं होती। ऐसी स्थिति में भी धार्मिक परंपरा में एक विशेष व्यवस्था बताई गई है। सर्वपितृ अमावस्या को उन पितरों के लिए श्राद्ध करने की परंपरा है, जिनकी मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती या जिनका श्राद्ध उनकी निर्धारित तिथि पर किसी कारण से नहीं हो पाया।

इस दिन परिवार ऐसे दिवंगत सदस्यों के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान आदि कर सकता है। इसी वजह से सर्वपितृ अमावस्या को पितृ पक्ष का बेहद महत्वपूर्ण दिन माना जाता है।

क्या मृत्यु की अंग्रेजी तारीख से श्राद्ध की तिथि निकाली जा सकती है?

हां, मृत्यु की अंग्रेजी तारीख के आधार पर उस दिन की हिंदू तिथि का पता लगाया जा सकता है। इसके लिए उस वर्ष के पंचांग में मृत्यु की तारीख देखनी होगी। लेकिन ध्यान रखें कि पंचांग की गणना स्थान और सूर्योदय के समय के अनुसार बदल सकती है। इसलिए पुराने समय की मृत्यु तिथि निकालते समय संभव हो तो उसी स्थान के पंचांग या किसी जानकार पंडित/ज्योतिषाचार्य से पुष्टि कर लेना बेहतर है।

पितृ पक्ष 2026 कब से शुरू होगा?

इस वर्ष पितृ पक्ष का प्रारंभ 27 सितंबर 2026, रविवार से माना जा रहा है। इस अवधि में पितरों के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक कर्म किए जाते हैं।

पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार पितरों का स्मरण करते हैं और उनकी आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .