जानिए कौन हैं काल भैरव, क्यों की जाती है उनकी पूजा

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सोशल संवाद / डेस्क : भगवान काल भैरव अपने भक्तों के कष्टों को दूर कर बल, बुद्धि, तेज, यश, धन तथा मुक्ति प्रदान करते हैं। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि श्रीलंका, नेपाल, तिब्बत आदि देशों में भी उनकी पूजा की जाती है । भैरव को शिव जी का अंश अवतार माना गया है। भैरव का शाब्दिक अर्थ है भयानक। भैरव अर्थात भय से रक्षा करने वाला। इन्हें शिव का ही रूप माना जाता है। भैरव को दंड पाणी भी कहा जाता है जिसका अर्थ है पापियों को दंड देने वाले। इसीलिए उनका अस्त्र डंडा और त्रिशूल है।  उन्हें स्वासवा भी कहा जाता है अर्थात जिसका वाहन कुत्ता है।

शिव पुराण में उल्लेख मिलता है कि श्रेष्ठता को लेकर एक बार तीनों देवों ब्रह्मा, विष्णु, महेश मे विवाद पैदा हो गया।  तब ब्रह्मा ने शिव की निंदा कर दी। इससे क्रोधित हुए शिव ने रौद्र रूप धारण कर लिया और इसी रौद्र रूप से काल भैरव का जन्म हुआ। काल भैरव ने अपने अपमान का बदला लेने के लिए ब्रह्मा के पांचवे सिर को काट दिया।  इससे भैरव पर ब्रह्म हत्या का दोष लग गया।

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ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति हेतु शिव ने काल भैरव को प्रायश्चित करने को कहा।  जिसके बाद काल भैरव ने  त्रिलोक का भ्रमण किया।  और अंत में काशी पहुंचे और यही वे ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त हो पाए ।तब से काल भैरव काशी में ही स्थापित हो गए और शहर कोतवाल कहलाने लगे।

मान्यता  है कि भैरव शब्द के तीन अक्षरों में ब्रह्मा,विष्णु और महेश तीनों की शक्ति समाहित है। भैरव, शिव के गण और पार्वती के अनुचर माने जाते हैं। सच्चे मन से जो भी इनकी उपासना करता है,उसकी सुरक्षा का भार ये स्वयं उठाते हैं और अपने भक्तों की समस्त मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। साथ ही भैरवजी की पूजा से भूत-प्रेत,नकारात्मक शक्तियां और ऊपरी बाधा आदि जैसी समस्याएं भी दूर होती हैं।

भगवान कालभैरव की उपासना से भूत,प्रेत एवं ऊपरी बाधाएं दूर होती हैं।सभी नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा पाने के लिए इस दिन ॐ कालभैरवाय नम: का जप एवं कालभैरवाष्टक का पाठ करना चाहिए। काल भैरव की पूजा से बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर हो जाती हैं।  बड़े से बड़े शत्रु शांत हो जाते हैं।  अचानक संकट आने लगे और सब अपने साथ छोड़ने लगे तो शनिवार को ॐ भैरवाय नमः का जाप करके नारियल भैरव जी के चरणों में अर्पित करें।  धीरे-धीरे परेशानियां समाप्त होने लगेंगी।

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