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घर के मुख्य दरवाजे पर रखें सही रंग का डोरमैट, वास्तु के अनुसार बढ़ सकती है सुख-समृद्धि

By Tami

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धर्म संवाद / डेस्क : अक्सर लोग अपने घर को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए महंगे फर्नीचर, पेंटिंग्स और सजावटी सामान पर हजारों रुपये खर्च करते हैं। लेकिन घर के प्रवेश द्वार पर रखी एक साधारण सी चीज को नजरअंदाज कर देते हैं, जो वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। यह चीज है डोरमैट (पायदान)

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अधिकांश लोग डोरमैट का उपयोग केवल धूल-मिट्टी रोकने के लिए करते हैं, लेकिन वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि सही दिशा और सही रंग का डोरमैट घर में सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने और नकारात्मकता को दूर रखने में मदद कर सकता है।

वास्तु के अनुसार कैसा होना चाहिए डोरमैट?

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर हमेशा आयताकार (Rectangular) डोरमैट रखना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि आयताकार आकार स्थिरता, संतुलन और निरंतर प्रगति का प्रतीक है। वहीं गोल या अनियमित आकार के पायदान ऊर्जा के संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।

दिशा के अनुसार चुनें डोरमैट का रंग

उत्तर दिशा (North)

उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर की दिशा माना जाता है। इस दिशा में हल्के नीले रंग का डोरमैट शुभ माना जाता है। वास्तु मान्यता के अनुसार यह आर्थिक उन्नति और धन आगमन के अवसर बढ़ाता है।

उत्तर-पूर्व दिशा (North-East)

ईशान कोण में हल्के पीले रंग का डोरमैट रखने की सलाह दी जाती है। यह दिशा ज्ञान, बुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ी मानी जाती है।

पूर्व दिशा (East)

पूर्व दिशा सूर्य देव की दिशा मानी जाती है। यहां हल्के और सकारात्मक रंगों का प्रयोग शुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार इस दिशा में गहरे नीले, हरे और काले रंग से बचना चाहिए।

दक्षिण-पूर्व दिशा (South-East)

अग्नि तत्व से जुड़ी इस दिशा में लाल रंग का डोरमैट शुभ माना जाता है। यह ऊर्जा, उत्साह और प्रगति का प्रतीक माना जाता है।

दक्षिण-पश्चिम दिशा (South-West)

इस दिशा में क्रीम या हल्के पीले रंग का डोरमैट रखने से स्थिरता और पारिवारिक संतुलन बना रहता है।

उत्तर-पश्चिम दिशा (North-West)

वायव्य कोण में हल्के नीले या पीले रंग का डोरमैट शुभ माना जाता है। यह घर में सकारात्मक वातावरण और मानसिक शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

डोरमैट से जुड़े महत्वपूर्ण वास्तु नियम

  • डोरमैट को नियमित रूप से साफ रखें।
  • फटा या खराब हो चुका पायदान तुरंत बदल दें।
  • डोरमैट पर भगवान, ॐ या स्वास्तिक जैसे धार्मिक प्रतीकों का उपयोग न करें।
  • मुख्य दरवाजे पर अत्यधिक गहरे काले रंग का डोरमैट लगाने से बचें।
  • पायदान के नीचे सेंधा नमक या कपूर की छोटी पोटली रखने की परंपरा भी कई लोग अपनाते हैं, जिसे नकारात्मकता दूर करने का उपाय माना जाता है।

ध्यान रखें

वास्तु शास्त्र पारंपरिक मान्यताओं और विश्वासों पर आधारित है। इसके प्रभावों के संबंध में वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। इसलिए इन्हें आस्था और व्यक्तिगत विश्वास के आधार पर अपनाया जा सकता है।

निष्कर्ष

घर का मुख्य द्वार केवल प्रवेश का रास्ता नहीं बल्कि सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश बिंदु भी माना जाता है। ऐसे में सही रंग और दिशा का डोरमैट चुनना वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर में सुख, शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने वाला माना जाता है। यदि आप भी अपने घर में सकारात्मक बदलाव चाहते हैं, तो डोरमैट से जुड़े इन सरल वास्तु नियमों पर ध्यान दे सकते हैं।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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