धर्म संवाद / डेस्क : वास्तु शास्त्र और चाइनीज़ वास्तु यानी फेंग शुई के सिद्धांतों को अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली प्राप्त कर सकता है। माना जाता है कि कुछ छोटे-छोटे उपाय अपनाकर न केवल इच्छाओं की पूर्ति होती है, बल्कि धन और ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी का स्थायी वास भी घर में बना रहता है। इन्हीं प्रभावशाली उपायों में से एक है कछुए का प्रतीक, जिसे वास्तु और फेंग शुई दोनों में विशेष स्थान प्राप्त है।
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क्यों खास है कछुआ?
वास्तु और फेंग शुई शास्त्र में कछुए को दीर्घायु, स्थिरता, सुरक्षा और धन का प्रतीक माना गया है। फेंग शुई के अधिकतर शुभ चिन्हों में कछुआ अवश्य देखने को मिलता है। मान्यता है कि कछुआ नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
घर में कछुआ रखने से होने वाले लाभ
- घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है
- आर्थिक समस्याओं में कमी आती है
- करियर और व्यापार में स्थिरता और उन्नति मिलती है
- पारिवारिक कलह और तनाव दूर होता है
- जीवन में धैर्य और सकारात्मक सोच का विकास होता है
कछुआ रखने की सही दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार, कछुए को घर में सही दिशा में रखना अत्यंत आवश्यक है:
- उत्तर दिशा: धन और करियर में उन्नति के लिए शुभ
- उत्तर-पूर्व (ईशान कोण): मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए उत्तम
- पानी में रखा कछुआ: सकारात्मक ऊर्जा और निरंतर प्रगति का प्रतीक माना जाता है
किस धातु या सामग्री का कछुआ रखें?
- धातु (ब्रास/कॉपर) का कछुआ धन वृद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है
- कांच या क्रिस्टल कछुआ सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है
- पत्थर का कछुआ स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करता है
कहां न रखें कछुआ?
- शयन कक्ष में कछुआ रखने से बचें
- बाथरूम या गंदे स्थान पर कभी न रखें
- टूटा या क्षतिग्रस्त कछुआ अशुभ माना जाता है
फेंग शुई में कछुए का महत्व
फेंग शुई के अनुसार कछुआ चार पवित्र जीवों में से एक है। यह सुरक्षा, सफलता और दीर्घकालीन लाभ का प्रतीक है। ऑफिस या कार्यस्थल पर कछुआ रखने से निर्णय क्षमता बढ़ती है और कार्यों में सफलता मिलती है।
