धर्म संवाद/ डेस्क : गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित सबसे प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है। इस दिन घरों और पूजा पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है और विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। गणपति उत्सव के दौरान महाराष्ट्र समेत देश के कई हिस्सों में भक्त भजन, मंत्र और आरती के माध्यम से विघ्नहर्ता भगवान गणेश की आराधना करते हैं।
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गणेश पूजा के दौरान गाई जाने वाली सबसे लोकप्रिय आरतियों में ‘सुखकर्ता दुखहर्ता’ का विशेष स्थान है। मान्यता है कि श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान गणेश की आरती करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।
गणेश चतुर्थी पर क्यों गाई जाती है ‘सुखकर्ता दुखहर्ता’ आरती?
‘सुखकर्ता दुखहर्ता’ भगवान गणेश की प्रसिद्ध मराठी आरती है। इसके माध्यम से गणपति बप्पा को सुख प्रदान करने वाले, दुखों को दूर करने वाले और विघ्नों का नाश करने वाले देवता के रूप में नमन किया जाता है।
आरती में भगवान गणेश के स्वरूप, उनके आभूषणों और उनके दिव्य रूप का सुंदर वर्णन मिलता है। भक्त आरती के दौरान भगवान गणेश से अपने जीवन के संकट दूर करने और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
सुखकर्ता दुखहर्ता आरती
सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची
नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
कंठी झलके माल मुकताफळांची।
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव।
रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया।
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव।
लम्बोदर पीताम्बर फणिवर वंदना
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे, निर्वाणी रक्षावे
सुरवर वंदना।
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकामना पूर्ति
जय देव जय देव।
भगवान गणेश की आरती का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। उन्हें विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य कहा जाता है। यही वजह है कि गणेश चतुर्थी के अवसर पर विशेष आरती और पूजा का आयोजन किया जाता है।
भक्तों का विश्वास है कि गणपति बप्पा की आराधना करने से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने का आशीर्वाद मिलता है। आरती के दौरान दीप प्रज्वलित करके भगवान गणेश का ध्यान करने से पूजा का वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
गणेश आरती के बाद क्या करें?
गणपति बप्पा की आरती पूरी होने के बाद भक्त भगवान गणेश को प्रणाम कर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना कर सकते हैं। इसके बाद भगवान को प्रसाद अर्पित किया जाता है। गणेश पूजा में मोदक और लड्डू का विशेष महत्व माना जाता है। इसके अलावा दूर्वा और लाल फूल भगवान गणेश को अर्पित करने की परंपरा भी है।
गणेश चतुर्थी पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
गणेश चतुर्थी के दिन पूजा करते समय स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें। पूजा स्थल को साफ करके भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद गणेश जी को जल, दूर्वा, फूल, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा के अंत में भगवान गणेश की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों के साथ प्रसाद ग्रहण करें।
‘सुखकर्ता दुखहर्ता’ आरती का संदेश
इस आरती का मूल भाव भगवान गणेश से सुख, शांति और संकटों से मुक्ति की प्रार्थना करना है। इसमें गणपति के सुंदर स्वरूप का वर्णन करते हुए भक्त उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। गणेश उत्सव के दौरान जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ ‘जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति’ का जयघोष करते हैं, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
