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सावन में कढ़ी क्यों नहीं खाते? जानिए धार्मिक, आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक कारण

By Tami

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सावन में कढ़ी क्यों नहीं खाते

धर्म संवाद / डेस्क : सावन का महीना भगवान शिव की आराधना, व्रत-उपवास और सात्विक जीवनशैली का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ के साथ खान-पान से जुड़े कई नियमों का पालन किया जाता है। इन्हीं में से एक परंपरा है सावन के महीने में कढ़ी न खाना। कई घरों में आज भी बड़े-बुजुर्ग इस मौसम में कढ़ी बनाने और खाने से मना करते हैं।

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क्या यह केवल धार्मिक परंपरा है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण भी है? आइए जानते हैं।

धार्मिक मान्यता: भगवान शिव की पूजा से जुड़ी है परंपरा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना पूरी तरह भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दौरान शिवलिंग पर दूध, दही, जल और बेलपत्र अर्पित किए जाते हैं। सनातन परंपरा में माना जाता है कि जिन वस्तुओं का उपयोग भगवान के अभिषेक में प्रमुख रूप से किया जाता है, उनका स्वयं सेवन कम करना चाहिए। चूंकि कढ़ी खट्टे दही से बनाई जाती है, इसलिए सावन में इसे न खाने की परंपरा प्रचलित है। इसके अलावा, सावन संयम, सात्विकता और आत्मसंयम का महीना माना जाता है। इसलिए हल्का और सात्विक भोजन करने की सलाह दी जाती है।

आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में शरीर की पाचन शक्ति (अग्नि) कमजोर हो जाती है। ऐसे में भारी और खट्टे भोजन को पचाना कठिन हो सकता है। कढ़ी में उपयोग होने वाले दही और बेसन का मिश्रण कुछ लोगों के लिए इस मौसम में पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ा सकता है।

इस दौरान कढ़ी खाने से कुछ लोगों को:

  • गैस और अपच की समस्या
  • एसिडिटी
  • पेट फूलना
  • वात दोष बढ़ने जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

इसी कारण आयुर्वेद वर्षा ऋतु में संतुलित और सुपाच्य भोजन लेने की सलाह देता है।

वैज्ञानिक कारण भी हैं महत्वपूर्ण

मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीव तेजी से पनपते हैं।

ऐसे मौसम में:

  • दूध और दही जल्दी खराब हो सकते हैं।
  • सही तरीके से संग्रहित न होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
  • कमजोर पाचन वाले लोगों में पेट संबंधी समस्याएं होने की संभावना अधिक रहती है।

इसी वजह से इस मौसम में दही से बने कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित मात्रा में करने की सलाह दी जाती है।

सावन में हरी पत्तेदार सब्जियां भी क्यों कम खाई जाती हैं?

परंपरागत रूप से सावन में हरी पत्तेदार सब्जियां भी कम खाने की सलाह दी जाती है। वर्षा ऋतु में इनमें मिट्टी, कीड़े या सूक्ष्मजीव होने की संभावना अधिक रहती है। हालांकि, यदि इन्हें अच्छी तरह साफ करके और सही तरीके से पकाकर खाया जाए तो जोखिम काफी कम किया जा सकता है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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