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गणेश विसर्जन 2026: प्रेमानंद महाराज ने बताए जरूरी नियम

By Tami

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Ganesh Visarjan Premanand Maharaj

धर्म संवाद / डेस्क : गणेश उत्सव हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। गणेश चतुर्थी के दिन भक्त पूरे श्रद्धाभाव के साथ अपने घरों और पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना करते हैं। इसके बाद कई दिनों तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना और आरती की जाती है। उत्सव के समापन पर भक्त नम आंखों से गणपति बप्पा को विदाई देते हैं।

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गणेश विसर्जन को लेकर धार्मिक मान्यताओं में विशेष सावधानी बरतने की बात कही गई है। इसी क्रम में वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने भी भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन को लेकर श्रद्धालुओं को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखने की सलाह दी है।

उनका कहना है कि भगवान गणेश ही नहीं, बल्कि किसी भी देवी-देवता की प्रतिमा को सम्मान और श्रद्धा के साथ विसर्जित किया जाना चाहिए। प्रतिमा को नदी, तालाब या घाट पर इस तरह नहीं फेंकना चाहिए कि उससे भगवान का अपमान हो।

गणेश विसर्जन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश की प्रतिमा को घर या पंडाल में पूरे सम्मान के साथ स्थापित किया जाता है। ऐसे में विसर्जन के समय भी उसी श्रद्धा और मर्यादा को बनाए रखना जरूरी माना जाता है।

कई बार सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आते हैं, जिनमें गणेश प्रतिमाओं को नदी या तालाब में फेंकते हुए देखा जाता है। कुछ जगहों पर विसर्जन के बाद क्षतिग्रस्त प्रतिमाओं को मशीनों की मदद से हटाया जाता है।

धार्मिक दृष्टि से ऐसी स्थिति को उचित नहीं माना जाता। प्रेमानंद महाराज ने भी भक्तों से अपील की है कि प्रतिमा के विसर्जन के दौरान भगवान के प्रति श्रद्धा और सम्मान का भाव बनाए रखें।

प्रतिमा को नदी या तालाब में फेंकना क्यों उचित नहीं?

गणपति बप्पा की विदाई का अर्थ प्रतिमा को जल्दबाजी में पानी में फेंक देना नहीं है। विसर्जन एक धार्मिक प्रक्रिया है, जिसमें भगवान को विधिवत विदाई दी जाती है। इसलिए प्रतिमा को धीरे-धीरे और सम्मानपूर्वक जल में विसर्जित करना चाहिए। साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि विसर्जन के कारण जल स्रोत प्रदूषित न हों।

विशेष रूप से प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP), केमिकल रंग और अन्य ऐसी सामग्री से बनी मूर्तियां पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हो सकती हैं। इसलिए मिट्टी से बनी और प्राकृतिक रंगों वाली गणेश प्रतिमा को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प माना जाता है।

प्रेमानंद महाराज के अनुसार घर पर कैसे करें गणेश विसर्जन?

अगर घर में स्थापित गणपति की प्रतिमा छोटी है और स्थानीय नियम इसकी अनुमति देते हैं, तो घर पर ही कृत्रिम कुंड या बड़े पात्र में विसर्जन किया जा सकता है। इसके लिए एक साफ और उपयुक्त स्थान पर पानी से भरा बड़ा पात्र या अस्थायी कुंड तैयार किया जा सकता है। पूजा और आरती के बाद भगवान गणेश से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।

इसके बाद प्रतिमा को पूरे सम्मान के साथ पानी में विसर्जित करें। प्रतिमा के पूरी तरह घुलने के बाद उस मिट्टी का उपयोग पौधों या अन्य उचित स्थान पर किया जा सकता है, बशर्ते मूर्ति प्राकृतिक मिट्टी से बनी हो और उसमें हानिकारक सामग्री न हो।

कैसी होनी चाहिए गणेश जी की मूर्ति?

गणेश उत्सव के लिए प्रतिमा चुनते समय पर्यावरण का भी ध्यान रखना चाहिए। ऐसी मूर्ति लेना बेहतर है जो प्राकृतिक मिट्टी से बनी हो और पानी में आसानी से घुल सके। POP से बनी प्रतिमाओं और रासायनिक रंगों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। इससे धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरण की भी रक्षा की जा सकती है। मूर्ति खरीदते समय यह जरूर पूछें कि वह किस सामग्री से बनी है और उसमें किस तरह के रंगों का इस्तेमाल किया गया है।

गणेश विसर्जन से पहले क्या करें?

विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा करें। आरती करें और उन्हें मोदक, लड्डू या अपनी श्रद्धा के अनुसार नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद परिवार के सभी सदस्य गणपति बप्पा से जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करें। विसर्जन के समय भक्त आमतौर पर ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ का जयघोष करते हुए भगवान को विदाई देते हैं।

गणेश विसर्जन में इन गलतियों से बचें

  • भगवान गणेश की प्रतिमा को पानी में फेंकें नहीं।
  • विसर्जन के दौरान प्रतिमा का अपमान या अनादर न करें।
  • प्रतिमा को मशीनों या भारी वाहनों से न कुचलें।
  • गंदे या प्रदूषित जल स्रोत में विसर्जन से बचें।
  • POP और हानिकारक रसायनों से बनी मूर्तियों का इस्तेमाल न करें।
  • स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन स्थल और नियमों का पालन करें।
  • विसर्जन के बाद पूजा सामग्री या प्लास्टिक को जल स्रोत में न छोड़ें।

आस्था के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी जरूरी

गणेश विसर्जन केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। यदि हर भक्त प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा चुने और निर्धारित कृत्रिम कुंड या पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन स्थल का इस्तेमाल करे, तो आस्था के साथ प्रकृति की भी रक्षा की जा सकती है। इसलिए बप्पा को विदाई देते समय श्रद्धा, सम्मान और पर्यावरण—तीनों का ध्यान रखना जरूरी है।

FAQs: गणेश विसर्जन 2026

गणेश विसर्जन कैसे करना चाहिए?

गणेश विसर्जन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ करना चाहिए। छोटी प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा होने पर स्थानीय नियमों के अनुसार घर पर कृत्रिम कुंड या बड़े पात्र में भी विसर्जन किया जा सकता है।

गणेश जी की मूर्ति किस सामग्री की होनी चाहिए?

पर्यावरण की दृष्टि से प्राकृतिक मिट्टी से बनी और आसानी से घुलने वाली मूर्ति को प्राथमिकता देना बेहतर है।

क्या POP की गणेश प्रतिमा लेनी चाहिए?

पर्यावरणीय दृष्टि से POP की मूर्तियों से बचना और प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा चुनना बेहतर विकल्प है।

क्या गणेश प्रतिमा को नदी में फेंकना सही है?

प्रतिमा को फेंकना उचित नहीं माना जाता। विसर्जन हमेशा सम्मानपूर्वक और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना चाहिए।

क्या घर पर गणेश विसर्जन किया जा सकता है?

छोटी और प्राकृतिक सामग्री से बनी प्रतिमा के लिए, स्थानीय नियमों की अनुमति होने पर घर पर कृत्रिम कुंड या उपयुक्त पात्र में विसर्जन किया जा सकता है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

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