घर में पितरों की तस्वीर के सामने भूलकर भी न रखें ये 5 चीजें

By Tami

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Pitru Photo Vastu

धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में पूर्वजों की तस्वीर को घर में सम्मानपूर्वक रखने की परंपरा है। पितृ पक्ष के दौरान पितरों का विशेष रूप से स्मरण किया जाता है और कई परिवार अपने दिवंगत परिजनों की तस्वीर के सामने दीपक जलाकर श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

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वास्तु शास्त्र की कुछ मान्यताओं में पितरों की तस्वीर रखने के स्थान को लेकर विशेष सावधानियां बताई गई हैं। माना जाता है कि जिस स्थान पर पूर्वजों की तस्वीर रखी जाए, वहां साफ-सफाई और शांति का वातावरण होना चाहिए। कुछ वस्तुओं को तस्वीर के सामने या आसपास रखने से बचने की सलाह भी दी जाती है। हालांकि, इन बातों को वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के रूप में ही समझना चाहिए। इनके प्रभावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है।

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पितरों की तस्वीर के सामने मंदिर की सामग्री न रखें

वास्तु और धार्मिक परंपराओं में देवताओं और पितरों के स्थान को अलग रखने की सलाह दी जाती है। इसलिए पितरों की तस्वीर को पूजा घर में देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ रखने या उनके ठीक सामने रखने से बचने की मान्यता है। भगवान की पूजा और पूर्वजों के स्मरण के लिए अलग स्थान रखना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है। इससे दोनों के प्रति सम्मान बनाए रखने की भावना जुड़ी है।

1. तस्वीर के सामने कूड़ेदान या कचरा न रखें

पितरों की तस्वीर के आसपास कूड़ेदान, कचरा या गंदगी रखना उचित नहीं माना जाता। जिस स्थान पर पूर्वजों की तस्वीर लगी हो, उसे साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए। वास्तु मान्यता के अनुसार, गंदगी और अव्यवस्था से घर के वातावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। व्यावहारिक रूप से भी तस्वीर के आसपास स्वच्छता बनाए रखना सम्मान और साफ-सफाई दोनों के लिहाज से बेहतर है।

2. टूटा हुआ कांच और कबाड़ तस्वीर के पास न रखें

पूर्वजों की तस्वीर के सामने या आसपास टूटा हुआ कांच, खराब सामान या अनावश्यक कबाड़ जमा करने से बचना चाहिए। वास्तु परंपरा में टूटे और अनुपयोगी सामान को घर में लंबे समय तक रखने को अच्छा नहीं माना जाता। इसलिए पितरों की तस्वीर के आसपास ऐसी वस्तुओं को रखने के बजाय स्थान को साफ और व्यवस्थित रखना बेहतर है।

3. पितरों की तस्वीर के सामने अपनी तस्वीर न लगाएं

वास्तु संबंधी मान्यताओं में पितरों की तस्वीर के साथ या ठीक सामने जीवित परिवार के सदस्यों की तस्वीर लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। पूर्वजों के लिए निर्धारित स्थान को अलग और सम्मानजनक रखना पारंपरिक रूप से उचित माना जाता है। इसलिए फैमिली फोटो या जीवित सदस्यों की व्यक्तिगत तस्वीरों के लिए अलग स्थान चुनना बेहतर है।

4. जूते-चप्पल और खराब सामान न रखें

पितरों की तस्वीर के सामने जूते-चप्पल, पुरानी छतरी, खराब लोहे का सामान या अन्य कबाड़ रखना वास्तु मान्यताओं में उचित नहीं माना जाता। इसका सबसे सरल कारण यह है कि पूर्वजों की तस्वीर वाला स्थान सम्मान और स्मरण का स्थान माना जाता है। इसलिए वहां जूते-चप्पल या अव्यवस्थित सामान रखने से बचना चाहिए।

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5. नमक, मिर्च और मसालों के डिब्बे न रखें

रसोई में इस्तेमाल होने वाले खुले नमक, लाल मिर्च या मसालों के डिब्बों को पितरों की तस्वीर के ठीक सामने या नीचे रखने से भी बचने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं में पितरों के स्थान को शांत और सात्विक रखने की बात कही जाती है। इसलिए इस स्थान के आसपास अनावश्यक सामान रखने के बजाय इसे साफ और व्यवस्थित रखना बेहतर माना जाता है।

पितरों की तस्वीर घर में कहां लगानी चाहिए?

वास्तु की प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, पितरों की तस्वीर को घर के ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां वह सम्मानपूर्वक दिखाई दे और स्थान साफ-सुथरा रहे। कुछ वास्तु परंपराओं में दक्षिण दिशा को पितरों से संबंधित माना जाता है। वहीं पितरों की तस्वीर को घर के किचन, बेडरूम या ब्रह्मस्थान में रखने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, घर की बनावट और पारिवारिक परंपरा के अनुसार स्थान अलग हो सकता है। इसलिए केवल वास्तु के नाम पर किसी तस्वीर को हटाने या घर में बड़ा बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है।

एक ही पूर्वज की कई तस्वीरें लगाने से बचें

कुछ वास्तु मान्यताओं में एक ही पूर्वज की अलग-अलग तस्वीरों को घर के कई कमरों में लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि किसी पूर्वज की एक से अधिक तस्वीरें हैं तो उन्हें एक ही सम्मानजनक स्थान पर व्यवस्थित तरीके से रखना बेहतर माना जाता है। तस्वीरों की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण उनके लिए निर्धारित स्थान की स्वच्छता और सम्मान है।

शाम को पितरों की तस्वीर के सामने दीपक जलाएं

पितृ पक्ष के दौरान कई परिवार शाम के समय पितरों की तस्वीर के सामने दीपक जलाकर उनका स्मरण करते हैं। दीपक को श्रद्धा और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है।

यदि प्रतिदिन दीपक जलाना संभव न हो तो तस्वीर वाले स्थान पर पर्याप्त और सुरक्षित रोशनी रखी जा सकती है। दीपक हमेशा सुरक्षित जगह पर रखें और आग से जुड़ी सावधानियों का पालन करें।

किचन और बेडरूम में न लगाएं पितरों की तस्वीर

वास्तु की कुछ परंपराओं के अनुसार पितरों की तस्वीर किचन और बेडरूम में नहीं लगानी चाहिए। इसके पीछे इन स्थानों के अलग उपयोग और धार्मिक दृष्टि से पितृ स्थान को अलग रखने की अवधारणा बताई जाती है। इसी तरह घर के बिल्कुल मध्य भाग यानी ब्रह्मस्थान को भी पितरों की तस्वीर के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। वास्तु में ब्रह्मस्थान को घर का केंद्रीय क्षेत्र माना जाता है और इसे हल्का तथा अपेक्षाकृत खुला रखने की सलाह दी जाती है।

पितरों की तस्वीर लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान

पितरों की तस्वीर जिस स्थान पर लगाएं, वहां नियमित रूप से सफाई करें। तस्वीर के आसपास जूते-चप्पल, कूड़ा, टूटा सामान या अनावश्यक वस्तुएं जमा न होने दें। पितरों का स्मरण श्रद्धा से करें और परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार दीपक, तर्पण या अन्य कर्म कर सकते हैं। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में पितृ पूजा से जुड़े नियमों में अंतर होना सामान्य है।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .