Do you want to subscribe our notifications ?

शारदीय नवरात्रि में चावल के 108 दानों से करें ये उपाय, मां दुर्गा की कृपा पाने के लिए जानें विधि

By Tami

Published on:

navratri-chawal-108-dane-upay

धर्म संवाद / डेस्क : सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व है। यह पर्व मां दुर्गा की उपासना और शक्ति की साधना के लिए समर्पित होता है। नवरात्रि के नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन पावन दिनों में श्रद्धापूर्वक की गई पूजा से मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

यह भी पढ़े : महाष्टमी पर करें ये 4 उपाय, मां महागौरी करेंगी कृपा

नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए कई धार्मिक उपाय भी किए जाते हैं। इन्हीं में से एक उपाय साबुत चावल के 108 दानों से जुड़ा है। मान्यता है कि इस उपाय को करते समय मां भगवती के मंत्र का जाप और अपनी मनोकामना का स्मरण करना शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं कि नवरात्रि में चावल के 108 दानों से जुड़ा यह उपाय कैसे किया जाता है और पूजा के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

नवरात्रि में चावल के 108 दानों का क्या है महत्व?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में चावल को पूजा-पाठ और शुभ कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। इसे अक्षत भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है बिना टूटा हुआ चावल। देवी-देवताओं की पूजा में अक्षत अर्पित करना शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना करते समय साबुत चावल के 108 दानों का उपयोग करके विशेष पूजा की जा सकती है। इस दौरान भक्त मां भगवती का ध्यान करते हैं और अपनी मनोकामना की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

अयोध्या के पंडित कल्कि राम के अनुसार, नवरात्रि में मां आदिशक्ति की उपासना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इन दिनों श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई साधना भक्तों को मानसिक संबल प्रदान करती है। हालांकि, चावल के 108 दानों से जुड़े इस उपाय के फल की कोई निश्चित गारंटी नहीं है। इसे धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में ही देखना चाहिए।

नवरात्रि में चावल के 108 दानों से उपाय करने की विधि

अगर आप नवरात्रि के दौरान यह धार्मिक उपाय करना चाहते हैं, तो पूजा करते समय स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखें। इसकी विधि इस प्रकार है।

1. स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें

सुबह या शाम स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद अपने पूजा स्थल की सफाई करें और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने आसन लगाकर बैठ जाएं।

2. 108 साबुत चावल के दाने लें

बिना टूटे हुए साफ चावल के 108 दाने गिनकर एक स्वच्छ कटोरे में रखें। पूजा में इस्तेमाल होने वाले चावल साफ और साबुत होने चाहिए। कटोरे को मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने रख दें।

3. मां दुर्गा के सामने दीपक जलाएं

धार्मिक परंपरा के अनुसार, पूजा के दौरान मां दुर्गा के समक्ष दीपक जलाया जा सकता है। यदि आप सरसों के तेल और घी के दीपक जलाना चाहते हैं, तो उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखें। ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रहें और दीपक को जलता हुआ अकेला न छोड़ें।

4. मां भगवती का ध्यान करें

अब हाथ जोड़कर मां दुर्गा का ध्यान करें। मन को शांत रखते हुए अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना करें। इस दौरान माता रानी के प्रति श्रद्धा और विश्वास बनाए रखें।

5. 108 बार मंत्र का जाप करें

अब चावल के एक-एक दाने को हाथ में लेकर मां दुर्गा के मंत्र का जाप करें। हर दाने के साथ मंत्र बोलें और दाने को कटोरे में डालते जाएं। इस प्रकार 108 दानों के साथ 108 बार मंत्र का जाप पूरा करें।

मंत्र इस प्रकार है:

ॐ दुं दुर्गायै नमः।

मंत्र जाप के दौरान मन को एकाग्र रखें और मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य तथा जीवन में सद्बुद्धि और सकारात्मकता बनाए रखने की प्रार्थना करें।

नवरात्रि में मां दुर्गा के मंत्र जाप का महत्व

नवरात्रि को शक्ति की उपासना का पर्व माना जाता है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के मंत्रों का जाप, दुर्गा सप्तशती का पाठ, दुर्गा चालीसा का पाठ और आरती करने की परंपरा है।

‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मां दुर्गा की आराधना में प्रचलित मंत्र है। भक्त इस मंत्र का जाप देवी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने और मन को एकाग्र करने के लिए करते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित पूजा-पाठ और मंत्र जाप से व्यक्ति को मानसिक शांति तथा कठिन परिस्थितियों का सामना करने का संबल मिल सकता है। पूजा के दौरान अपनी सामर्थ्य के अनुसार साधना करना और दूसरों के प्रति सद्भाव बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

नवरात्रि में पूजा करते समय इन बातों का रखें ध्यान

नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा करते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
  • चावल के उपाय के लिए साबुत और साफ दानों का इस्तेमाल करें।
  • मंत्र जाप के दौरान मन को शांत और एकाग्र रखने का प्रयास करें।
  • व्रत रखते समय अपनी सेहत और शारीरिक क्षमता का ध्यान रखें।
  • दीपक और कपूर का इस्तेमाल करते समय आग से सुरक्षा के नियमों का पालन करें।
  • किसी भी धार्मिक उपाय को निश्चित परिणाम देने वाला न मानें। पूजा को आस्था, आत्मिक शांति और सकारात्मक संकल्प का माध्यम समझें।

Tami

Tamishree Mukherjee I am researching on Sanatan Dharm and various hindu religious texts since last year .

Exit mobile version