धर्म संवाद / डेस्क : हिंदू धर्म में दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाने वाली नरक चतुर्दशी का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे छोटी दिवाली और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर मृत्यु के देवता भगवान यमराज की पूजा और उनके नाम से दीपदान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन घर के बाहर दक्षिण दिशा में यम दीप जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार के सदस्यों को लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है।
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नरक चतुर्दशी केवल दीप जलाने का पर्व नहीं है, बल्कि इसका संबंध भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध और बुराई पर अच्छाई की विजय से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और शाम के समय दीप जलाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
इस साल नरक चतुर्दशी की तिथि को लेकर पंचांग में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। आइए जानते हैं नरक चतुर्दशी 2026 कब मनाई जाएगी, यम दीप जलाने की परंपरा कैसे शुरू हुई, इसका धार्मिक महत्व क्या है और इस दिन किन कामों को करने से बचना चाहिए।
नरक चतुर्दशी 2026 कब है? जानें सही तारीख
वैदिक पंचांग के अनुसार, नरक चतुर्दशी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस साल चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 7 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 49 मिनट पर होगी और इसका समापन 8 नवंबर 2026 को सुबह 11 बजकर 29 मिनट पर होगा।
उदयातिथि और पर्व की परंपरा के अनुसार, इस साल नरक चतुर्दशी 7 नवंबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी। इसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है। इसके अगले दिन यानी 8 नवंबर को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा।
नरक चतुर्दशी पर क्यों जलाया जाता है यम दीप?
नरक चतुर्दशी के दिन यम दीप जलाने की परंपरा सदियों पुरानी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मृत्यु के देवता भगवान यमराज के नाम से दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।
मान्यता है कि घर के बाहर दक्षिण दिशा में दीपक जलाकर भगवान यमराज से परिवार के सभी सदस्यों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए।
इस दिन दीपदान का एक विशेष आध्यात्मिक अर्थ भी बताया जाता है। दीपक को अंधकार, नकारात्मकता और बुराइयों को दूर करने का प्रतीक माना जाता है। इसलिए नरक चतुर्दशी की शाम यम दीप जलाकर जीवन में सकारात्मकता और मंगल की कामना की जाती है।
यम दीप जलाने का क्या है धार्मिक महत्व?
हिंदू धर्म में दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है। इसलिए नरक चतुर्दशी पर दक्षिण दिशा में दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान यमराज की पूजा और दीपदान करने से व्यक्ति को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। साथ ही परिवार में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है।
यम दीप जलाते समय व्यक्ति भगवान यमराज से प्रार्थना करता है कि परिवार के सभी सदस्यों को लंबी आयु और निरोगी जीवन प्राप्त हो। इस परंपरा को मृत्यु के भय से मुक्ति और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का प्रतीक भी माना जाता है।
छोटी दिवाली को क्यों कहा जाता है नरक चतुर्दशी?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन समय में नरकासुर नाम का एक अत्याचारी राक्षस था। उसने अपनी शक्तियों के बल पर देवताओं और ऋषि-मुनियों को परेशान कर रखा था। उसके अत्याचारों से धरती पर भय और आतंक का माहौल बन गया था। मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध करके उसके आतंक से लोगों को मुक्ति दिलाई थी। इसी विजय की स्मृति में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन घरों में दीप जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाया जाता है। यही वजह है कि नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है।
नरक चतुर्दशी पर घर में क्या करना चाहिए?
छोटी दिवाली के दिन घर की साफ-सफाई और सजावट का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि स्वच्छ और पवित्र वातावरण में मां लक्ष्मी का आगमन होता है।
इस दिन आप ये काम कर सकते हैं:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें।
- घर को फूलों, रंगोली और दीपों से सजाएं।
- शाम के समय भगवान यमराज के निमित्त दीपदान करें।
- घर के मुख्य द्वार और अन्य शुभ स्थानों पर दीपक जलाएं।
- भगवान श्रीकृष्ण और मां लक्ष्मी का स्मरण करें।
- जरूरतमंद लोगों की सहायता करें और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करें।
नरक चतुर्दशी के दिन भूलकर भी न करें ये काम
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन कुछ कार्यों से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन संयम, पवित्रता और अच्छे व्यवहार का पालन करना शुभ होता है।
1. किसी जीव को नुकसान न पहुंचाएं
नरक चतुर्दशी पर भगवान यमराज की पूजा की जाती है। इसलिए इस दिन किसी भी जीव की हत्या या उसे नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। सभी जीवों के प्रति दया और करुणा का भाव रखना चाहिए।
2. दक्षिण दिशा को गंदा न रखें
दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है। इसलिए इस दिन घर की दक्षिण दिशा में गंदगी या अव्यवस्था नहीं रखनी चाहिए। इस दिशा की अच्छी तरह सफाई करें और परंपरा के अनुसार यम दीप जलाएं।
3. तामसिक भोजन से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के दिन सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन मांस-मदिरा और अन्य तामसिक खाद्य पदार्थों से परहेज करने की परंपरा है।
4. तेल का दान करने से बचें
कुछ पारंपरिक मान्यताओं में नरक चतुर्दशी के दिन तेल का दान न करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, दान के नियम अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं।
5. घर में झगड़ा और विवाद न करें
दीपावली और उससे जुड़े पर्व खुशहाली और सकारात्मकता के प्रतीक हैं। इसलिए नरक चतुर्दशी के दिन घर में कलह, क्रोध और अपशब्दों से बचना चाहिए। परिवार के सदस्यों के साथ प्रेम और सद्भाव बनाए रखें।
