धर्म संवाद / डेस्क : मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि इस बार रविवार को पड़ रही है। ज्योतिष के अनुसार यह तिथि कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस दिन सूर्य वृश्चिक राशि में और चंद्रमा मीन राशि में विराजमान रहेंगे। द्रिक पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 से 12:31 बजे तक रहेगा, जबकि राहुकाल सुबह 4:05 से 5:24 बजे तक रहेगा।
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हालांकि इस तिथि को कोई बड़ा त्योहार नहीं है, लेकिन रविवार का विशेष महत्व होने के कारण सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग इसे और अधिक शुभ बना रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह योग तब बनता है जब कोई विशेष नक्षत्र किसी विशेष वार के साथ आता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए कार्य शुभ फल देते हैं और नए कार्यों की सफलता की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।
रविवार व्रत का महत्व
स्कंद पुराण और नारद पुराण में रविवार व्रत को विशेष फलदायी बताया गया है। यह व्रत उन लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी माना जाता है, जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर हो या सूर्य दोष हो।
इस व्रत की शुरुआत किसी भी मास के शुक्ल पक्ष के पहले रविवार से की जा सकती है। लगातार 12 रविवारों तक व्रत कर अंत में विधिवत उद्यापन किया जाता है।
व्रत विधि
- रविवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- पूजा स्थल को स्वच्छ करके चौकी पर साफ कपड़ा बिछाएं और पूजन सामग्री रखें।
- व्रत कथा का पाठ करें।
- तांबे के लोटे में जल, अक्षत, रोली और फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें।
- अर्घ्य देने से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
क्या करें इस दिन?
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ अत्यंत शुभ माना जाता है।
सूर्य देव के मंत्र—
“ऊं सूर्याय नमः”
“ऊं घृणि सूर्याय नमः”
का जप करने से विशेष लाभ मिलता है।
इस दिन गुड़ और तांबे का दान शुभ फल प्रदान करता है।
लाभ
इन सभी उपायों से सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। जीवन में सुख-समृद्धि, मान-सम्मान, और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। साथ ही शारीरिक ऊर्जा, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता भी बढ़ती है।
मार्गशीर्ष शुक्ल दशमी पर पड़ रहा यह योग नए कार्यों की शुरुआत, व्रत पालन और सूर्य साधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।






